नए साल 2026 की शुरुआत के साथ रीवा और विंध्य अंचल में विकास, आस्था और पर्यटन की नई तस्वीर उभर रही है। हवाई सेवा, सड़क, रेल, उद्योग, शिक्षा, स्वास्थ्य और पर्यटन के क्षेत्रों में बीते वर्ष की उपलब्धियों और आने वाले साल की योजनाओं ने लोगों में नई उम्मीदें जगा दी हैं।
By: Star News
Jan 01, 20264:29 PM
हाइलाइट्स
रीवा, स्टार समाचार वेब
कुछ बातों, कुछ इरादों और कुछ वादों के साथ साल 2025 हमसे विदा हो गया। अब हम नए इरादों के साथ आज से नए साल का स्वागत करने जा रहे हैं। विंध्य की राजधानी का कद रखने वाले रीवा जिले के रहवासी नए साल का पहला दिन देव दर्शन व सैर सपाटे के साथ व्यतीत करेंगे। इसके साथ ही आज की भोर के साथ उगने वाले सूरज के संग उन बातों और वादों पर भी चर्चाएं होंगी जिन्हें हम बीते साल में छोड़ आए थे। आने वाले दिनों में यह साल लोगों के लिए यादगार बनेगा, इसके भी प्रयास होंगे। वर्ष के अंतिम दिन जहां लोगों ने देर शाम तक रंगारंग पार्टी व कार्यक्रमों के माध्यम से साल को विदा किया, तो वहीं भाव भक्ति के बीच नव वर्ष का आगाज होगा।
हवाई सेवा
सड़क परिवहन
इंडस्ट्री
पर्यटन
रेल
स्वास्थ्य
शिक्षा
राजनीति
ऐतिहासिक पल
इस वर्ष 31 अक्टूबर को रीवा में सैनिक स्कूल में नौसेना अध्यक्ष एडमिरल दिनेश त्रिपाठी तथा थल सेना अध्यक्ष जनरल उपेन्द्र द्विवेदी ने मंच साझा किया। दोनों सेनाध्यक्ष सैनिक स्कूल रीवा के पुरा छात्र हैं। संयोगवश दोनों वर्तमान में जल और थल सेना की कमान संभाल रहे हैं। यह विन्ध्य के लिए बहुत बड़ा गौरव है। पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद राष्ट्रीय साहित्य सम्मेलन में शामिल होने के लिए सात नवम्बर को रीवा पधारे।
रीवा व मऊगंज जिले में आपके लिए है बहुत कुछ
नए साल का पहला दिन गुरुवार को पड़ रहा। नए साल के स्वागत में परिवार के साथ यदि आप कहीं घूमने जाना चाह रहे हैं। कुछ जगहों को आप जरूर घूमने फिरने के लिए चुन सकते हैं। इन जगहों पर देशभर से लोग पर्यटन के लिए आते हैं। रीवा और मऊगंज के वाटर फॉल देश में सुर्खियां बटोर रहे हैं। विंध्य की धरती पर सफेद शेरों की वापसी हुई और तेजी से मुकुंदपुर चिड़ियाघर का विस्तार हो रहा है। नया देखने के लिए यहां अब बहुत कुछ खास है। कई नए वन्यजीव पर्यटकों को देखने को मिलेंगे।
मुकुंदपुर सफारी :
रीवा से मुकुंदपुर की दूरी करीब 40 किमी के आसपास है। इसकी शुरुआत 2016 में हुई। करीब 40 साल बाद विंध्य में सफेद बाघों की वापसी इसी जू से हुई थी। विंध्या के रूप में सफेद बाघ की घर वापसी हुई थी। वर्तमान समय में यहां 122 से अधिक प्रजाति के वन्यजीव हैं। सफेद शेर, बब्बर शेर, रॉयल बंगाल टाइगर, स्लाथ वियर एवं सोन कुत्ता सहित कई अन्य वन्यजीव यहां मौजूद हैं। रंग बिरंगी चिड़ियों के लिए वॉक इन एवियरी भी बनाया गया है। पिछले साल यहां 1 जनवरी को रिकार्ड 14 हजार पर्यटक आए थे। इस साल रिकार्ड के टूटने का आसार है।
चचाई वाटर फॉल :
यह वाटर फॉल बीहर नदी पर स्थित है। यह 430 फीट की ऊंचाई से नीचे गिरती है। यह अपनी प्राकृतिक सुंदरता और ऐतिहासिक महत्व के लिए प्रसिद्ध है। टोंस वाटर फॉल के कारण इसमें साल भर पानी नहीं रहता। हालांकि बारिश के मौसम में यह बेहद मनमोहक रहता है। यह मप्र का दूसरा सबसे ऊंचा झरना है।
पुरवा वाटर फॉल :
पुरवा जलप्रपात करीब 230 फीट ऊंचा है। यह सेमरिया तहसील में स्थित है। वर्तमान समय में इसकी खूबसूरती देखते बनती है। पर्यटकों के लिए यहां खास इंतजाम किए गए हैं। सुरक्षा के लिहाज से चारों तरफ फेंसिंग कर दी गई है। यहां साल भर पानी रहता है। यहां नए साल में पर्यटकों की भीड़ लगती है। इसकी गहराई लोगों को काफी आकर्षित करती है।
क्योंटी वाटर फॉल :
क्योंटी वाटर फॉल रीवा से 40 किमी दूर है। वहीं प्रयागराज से 80 किमी, बनारस से करीब 150 और अयोध्या से 260 किमी दूर है। क्योंटी में दो जलप्रपात हैं। एक हमेशा सूखा रहता है। दूसरे में बारह महीने महाना नदी की मुख्यधारा झरने के साथ बहती है। लोगों का ऐसा कहना है कि दोनों जलप्रपातों के बीच रात में बहस हुई थी। उस दौरान यह तय हुआ कि नदी का लगाव जिस जलप्रपात से होगा, उसी में मुख्यधारा समाहित होगी। इसी वजह से रात में ही नदी का स्वरूप और रास्ता दोनों बदल गया। क्योंटी जलप्रपात के पास ही 17-18वीं शताब्दी में बना किला भी है। इसे रीवा रियासत के बघेलवंश के राजाओं ने बनवाया था।
बहुती वाटर फॉल :
यह वाटर फॉल मऊगंज जिला के नईगढ़ी में स्थित है। बहुती वाटर फॉल मप्र का सबसे ऊंचाई वाटर फॉल है। इस वाटर फॉल को देखने हाल में ही मप्र के सीएम भी पहुंचे थे। यह वाटर फॉल सेलर नदी पर स्थित है। इस वाटर फॉल की ऊंचाई 650 फीट है।
महामृत्युंजय मंदिर किला :
रीवा किला परिसर में एक अद्वितीय और प्राचीन शिव मंदिर है जो अपने 1001 छिद्रों वाले स्वयंभू शिवलिंग के लिए विश्व में प्रसिद्ध है। ऐसा माना जाता है कि दर्शन और अभिषेक से अकाल मृत्यु का भय दूर होता है। ऐसा मंदिर कहीं और नहीं है। यह मंदिर 600 साल पुराना है। बघेल राजाओं ने इस मंदिर की स्थापना की थी।
चिरहुला मंदिर :
चिरहुला मंदिर को सिविल न्यायालय कहा जाता है। रीवा में जो भी आता है, चिरहुला मंदिर में बिना दर्शन किए लौट कर नहीं जाता। यहां नए वर्ष में काफी भीड़ उमड़ती है। यहां हनुमान जी से जो भी मुरादें मांगी जाती हैं। वह पूरी होती हैं। रीवा रीवा शहर के चंद किमी की दूरी पर ही है।
खेमसागर मंदिर :
यह मंदिर हनुमना जी का अद्भुत स्थल है। यहां अलग ही शांति और शक्ति का एहसास होता है। इसे सुप्रीम दरबार के नाम से भी जाना जाता है। यह रीवा शहर से करीब 7 किमी की दूरी पर स्थित है। यहां भी नववर्ष में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है।
रामसागर मंदिर :
अपनी खास अदालती मान्यता के लिए यह प्रसिद्ध है। भक्त इसे हाईकोर्ट दरबार कहते हैं। जहां भक्तों की हनुमान जी के दर्शन करने से सारी मुरादें पूरी होती है। मान्यता है कि चिरहुला मंदिर में सुनवाई नहीं होने पर लोग रामसागर मंदिर में अर्जी लगाते हैं और यहां उनकी अर्जी सुनी जाती है।
देवतालाब शिव मंदिर :
देवतालाब में स्थित शिव मंदिर काफी पुराना है। इस मंदिर को लेकर ऐसी मान्यता है कि इसका निर्माण एक ही पत्थर को काट कर किया गया है। एक ही रात में इस मंदिर का निर्माण हुआ था। ऐसी मान्यता है कि विश्वकर्मा भगवान ने इस मंदिर का निर्माण किया था। जहां शिवलिंग दिन में रंग बदलता है। इस मंदिर के दर्शन को चारधाम यात्रा का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।
भैरवनाथ मंदिर :
उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल के प्रयासों से गुढ़ के समीप स्थित भैरवनाथ मंदिर को भव्य दिव्य स्वरूप मिला है। भैरवनाथ मंदिर परिसर को आकर्षक और बेहतरीन बनाने का कार्य अंतिम चरण में है। सभी कार्य पूर्ण हो जाने पर भैरवनाथ लोक का पूर्ण विकसित व सुंदर स्वरूप होगा। ग्यारह सौ वर्ष पुरानी आस्था को नया स्वरूप मिला है। यह स्थल धार्मिक स्थल के साथ ही पर्यटन स्थल के तौर पर विकसित होगा। श्रद्धालुओं के लिये धर्मशाला व अन्य सुविधायें भी उपलब्ध रहेंगी। भैरवनाथ मंदिर के पहाड़ी में पीपल के 100 पौधे लगाये जा रहे हैं। उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने भैरवनाथ मंदिर में भगवान आशुतोष की पूजा अर्चना की तथा रूद्राभिषेक किया। उन्होंने भैरवनाथ की पूजा भी की। प्रयागराज के वैदिक आचार्यों ने विधि विधान से पूजा अर्चना संपन्न कराई। इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री ने गुढ़ विधायक नागेन्द्र सिंह के साथ पीपल के पौधे लगाये। उप मुख्यमंत्री ने कहा कि भैरवनाथ लोक का लोकार्पण जनवरी माह के अंत में मुख्यमंत्री द्वारा किया जायेगा।
रानीतालाब मंदिर :
ऐसी मान्यता है कि यहां लवाना प्रजाति के एक दल ने लगभग 200 साल पहले व्यापार करने रीवा आए थे। इस दौरान उनके साथ सैकड़ों की संख्या में घोड़े थे। जिन पर पत्थरों से बनी बेशकीमती मूर्तियां व कलाकृतियां थी। एक पखवाड़ा के विश्राम के बाद जब दल यहां से रवाना हुआ तो एक मूर्ति टस से मस नहीं हुई। काफी प्रयास के बाद भी जब मूर्ति नहीं हिली तो दल छोड़ कर आगे बढ़ गया। इसके बाद वहीं पर रहने वाले शुक्ला परिवार को स्वप्न में देवी ने अपने मौजूद रहने की जानकारी देकर टीले में विराजित करने का निर्देश दिया। तब से यह स्थान मॉ कालिका के नाम से प्रसिद्ध है।
बसामन मामा :
बसामन मामा गौअभ्यारण्य में एक जनवरी को गोलोक दर्शन महोत्सव आयोजित किया जा रहा है। उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल गोलोक दर्शन महोत्सव का शुभारंभ करेंगे। बसामन मामा गौअभ्यारण्य में हजारों बेसहारा गौवंश को आश्रय दिया जा रहा है। इस संबंध में गौअभ्यारण्य प्रबंधन समिति के सचिव सेवानिवृत्त संयुक्त संचालक पशुपालन डॉ. राजेश मिश्रा ने कहा है कि बसामन मामा तीर्थ के समीप ही गौअभ्यारण्य स्थित है। इसमें एक जनवरी को आयोजित गोलोक दर्शन में आमजनता गौशाला का भ्रमण करते हुए गायों का पूजन कर सकती है।