सतना जिला क्रिकेट संघ (डीसीए) में लंबे समय से जारी वित्तीय अनियमितताओं, चयन में पक्षपात और संगठन को निजी पार्टी की तरह चलाने के खिलाफ पूर्व क्रिकेटर्स और खेल प्रेमियों ने उठाई आवाज। सांसद गणेश सिंह व एमपीसीए अध्यक्ष ज्योतिरादित्य सिंधिया को सौंपा गया ज्ञापन, डीसीए को भंग कर पारदर्शी कार्यकारिणी के गठन की मांग। बैलेंस शीट में गड़बड़ी, अपनों को रेवड़ी, खिलाड़ियों को ठेंगा-हर पहलू पर उठे गंभीर सवाल।

हाइलाइट्स
सतना, स्टार समाचार वेब
जिला क्रिकेट एसोसिएशन (डीसीए) सतना में लंबे समय से जारी कथित भ्रष्टाचार, वित्तीय अनियमितताओं और पक्षपातपूर्ण चयन प्रणाली के खिलाफ जिले के पूर्व क्रिकेट खिलाड़ियों और खेल प्रेमियों ने खुलकर मोर्चा खोल दिया है। इस संबंध में एक प्रतिनिधि मंडल ने सांसद गणेश सिंह को ज्ञापन सौंपते हुए डीसीए को तत्काल प्रभाव से भंग करने और नई कार्यकारिणी के गठन की मांग की है। इस आशय का एक पत्र मप्र क्रिकेट एसोसिएशन (एमपीसीए) के अध्यक्ष ज्योतिरादित्य सिंधिया के नाम का पत्र भी दिया गया है। ज्ञापन सौंपने वालों में प्रमुख रूप से राजेश कैला, अभिनव भट्ट, राजकुमार श्रीवास्तव, विराम जैन, विराग जैन, साकेत गौतम, पंकज दुबे, उमेश तिवारी, गिरीश शाह, आकाश खुराना, सौरभ खंडेलवाल, प्रदीप शर्मा, रतन श्रीवास्तव, ललित खुराना, राजेश मिश्रा, संदीप सिंह उर्फ जग्गी, मनीष यादव, रमेश पांडे सहित कुल 20 पूर्व खिलाड़ी और खेल से जुड़े प्रतिनिधि शामिल रहे। ज्ञापन देने वालों ने बताया कि इस ज्ञापन के माध्यम से जिले में क्रिकेट को राजनीतिक और निजी स्वार्थ से मुक्त कर वास्तविक प्रतिभाओं को आगे लाने की पुरजोर अपील की गई है।
प्राइवेट पार्टी की तरह डीसीए का इस्तेमाल करने के आरोप
डीसीए अध्यक्ष राजेश शुक्ला, सचिव आनंद सिंह और उनकी टीम द्वारा बीते वर्षों से संगठन को निजी संपत्ति की तरह संचालित किया जा रहा है। संगठन की आमसभा की बैठकें पिछले 9-10 वर्षों से कागजों में ही दिखाई गई हैं, जबकि इसकी कोई वास्तविकता नहीं है, साथ ही प्रबंध समिति के दस्तावेज भी एक ही हस्तलिपि में तैयार किए गए हैं, जिससे उनकी प्रमाणिकता संदेहास्पद है।
अपनों को रेवड़ी, किकेटर्स को ठेंगा
ज्ञापन में अपनों को रेवड़ी बाटने व क्रिकेटर्स को ठेंगा दिखाने की बात कहते हुए उल्लेख किया गया है कि बिना किसी क्रिकेट पृष्ठभूमि के कुछ लोगों को भी डीसीए का सदस्य बना दिया गया, जिनमें राजेश शुक्ला और उनके पुत्र, आनंद सिंह और उनके पुत्र जयवर्द्धन शामिल हैं, वहीं पूर्व क्रिकेट खिलाड़ियों को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया गया। इस पूरे प्रकरण में एमपीसीए चेयरमैन ज्योतिराद्तिय सिंधिया व सांसद गणेश सिंह से मांग की गई है कि वे मामले की उच्च स्तरीय जांच सुनिश्चित कराएं और डीसीए को भंग कर एक पारदर्शी व जवाबदेह कार्यकारिणी का गठन करवाएं, जिससे जिले की युवा प्रतिभाओं को निष्पक्ष अवसर मिल सके।
आरडीसीए की जांच में भी सामने आ चुका भ्रष्टाचार
सबसे गंभीर आरोप वित्तीय अनियमितताओं को लेकर हैं। संगठन के संविधान की धारा 19 के अनुसार सभी वित्तीय दस्तावेजों पर कोषाध्यक्ष के हस्ताक्षर अनिवार्य होते हैं, लेकिन 2019 के बाद किसी भी चेक या फंड ट्रांसफर में कोषाध्यक्ष विराग जैन के हस्ताक्षर नहीं हैं। यही नहीं, दो अलग-अलग चार्टर्ड अकाउंटेंट्स द्वारा हस्ताक्षरित बैलेंस शीट प्रस्तुत की गई हैं, जिनमें आंकड़े मेल नहीं खाते और यह बड़ी वित्तीय गड़बड़ी की ओर इशारा करते हैं। रीवा डिविजनल क्रिकेट एसोसिएशन (आरडीसीए) की जांच समिति द्वारा की गई जांच में भी 42 में से 30 से अधिक सदस्यों ने डीसीए के वर्तमान अध्यक्ष और सचिव के खिलाफ बयान दिए हैं। खिलाड़ियों के अभिभावकों ने भी चयन प्रक्रिया में रिश्वतखोरी और पक्षपात के आरोप लगाए हैं। प्रतिनिधियों का आरोप है कि जिले की टीम में सिर्फ 3-4 खिलाड़ियों को बार-बार शामिल किया गया, जबकि योग्य खिलाड़ियों को जानबूझकर दरकिनार कर दिया गया।


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