सतना की ए-ग्रेड कृषि उपज मंडी अब बी-ग्रेड की ओर बढ़ रही है। लगातार घटते राजस्व, सचिव की अनुपस्थिति, और मंडी परिसर में अव्यवस्थाओं और सुरक्षा की कमी के चलते किसान और व्यापारी परेशान हैं। जानिए इस गिरावट के पीछे के मुख्य कारण और मंडी प्रशासन की लापरवाही की पूरी कहानी।

हाइलाइट्स
सतना, स्टार समाचार वेब
अमूमन कोई भी व्यवसायिक संस्था समय के साथ अपनी आय को बढ़ाते हुए आगे की ओर बढ़ती है लेकिन विंध्य की कृषि उपज मंडियों की कहानी बिल्कुल उलटी है। सतना कृषि उपज मंडी साल दर साल घटते राजस्व के कारण ए-ग्रड से बी की ओर अग्रसर है तो रीवा मंडी बी-ग्रेड से सी में प्रवेश कर चुकी है।
किसानों व व्यापारियों के लिए अनाज कारोबार का सबसे भरोसेमंद स्थल रहे कृषि उपज मंडी से क्या अन्नदाताओं व अनाज व्यापारियों का मोहभंग हो रहा है? सवाल इसलिए क्योंकि ए-ग्रेड का का तमगा हासिल करने वाली सतना कृषि उपज मंडी का राजस्व लगातार घटता जा रहा है। एक ओर जब मंहगाई बढ़ी है और अनाजों की एमएसपी बढ़ी है तो कमाई भी बढ़नी चाहिए लेकिन मंडी की कमाई पर लगातार गृहण लगता जा रहा है। हालात यह हैं कि तकरीबन 3 साल पहले तक वर्ष 2022-2023 तक 14 से 15 करोड़ का राजस्व कमाने वाली मंडी की कमाई 7 से 8 करोड़ तक सिमट गई है।
प्रदेश की 18 मंडियो में से एक, विंध्य की इकलौती
उल्लेखनीय है कि प्रदेश में मौजूदा समय पर 18 ए-ग्रेड की मंडियां है जिसमे से सतना कृषि उपज मंडी भी है। विंध्य के रीवा व शहडोल संभाग के बीच सतना कृषि उपज मंडी इकलौती ए-ग्रेड मंडी है लेकिन यह तमगा साल दरसाल घटती कमाई के चलते अब खतरे की निशान की ओर बढ़ रहा है। हैरानी है कि अनाज के हर जिंस के दाम सरकार ने बढ़ाए हैं बावजूद इसके कमाई का आकड़ा बढ़ने के बजाय लगातार घट रहा है। जानकारों का मानना है कि यदि यही आलम रहा तो ए-ग्रेड का तमगा सतना से ठीक उसी तरह छिन सकता है जिस प्रकार से राजस्Þव कम होने के चलते रीवा कृषि उपज मंडी का बी-ग्रेड का तमगा छिन गया है। गौरतलब है कि रीवा की बी-ग्रेड मंडी कमाई में कमी के चलते सी-ग्रेड पर आ गई है। इसका बड़ा कारण मंडी परिसर की अव्यवस्थाएं हैं जिसके चलते किसान कम दाम में भी व्यापारियों को अनाज देने के लिए मजबूर हो जाते हैं, लेकिन मंडी आने को तैयार नहीं होते ।
सतना-रीवा के बीच झूल रहे सचिव
अमूमन सचिव को मंडी का सबसे बड़ा अधिकारी माना जाता है जिस पर मंडी परिसर को व्यवस्थित रखने का दायित्व है, लेकिन सरकार ए-ग्रेड मंडी को जुगाड़ से चला रही है। हालात यह हैं कि सतना कृषि उपज मंडी के सचिव को रीवा मंडी का भी प्रभार दे दिया गया जिसके चलते सचिव करूणेश तिवारी सतना मंडी में बमुश्किल दो से तीन दिन का समय ही दे पाते हैं। नतीजतन विंध्य की सबसे बड़ी मंडी कर्मचारियों के भरोसे चलती है। हालंकि सरकार ने एसडीएम को मंडी का प्रशासक बनाया है लेकिन उन्हें इतनी फुरसत ही नहीं है कि वे मंडी पहुंचकर वहां की अनियमितताओं पर अंकुश लगा सकें। नतीजतन मंडी में अनियमितताएं जारी हैं और किसान व व्Þयापारी इसमें पिस रहा है। हाल ही में मंडी परिसर की अव्यवस्थाओं व चोरी की इतनी घटनाएं सामने आईं लेकिन प्रशासक, मंडी सचिव व कर्मचारियों की कोई संयुक्त बैठक आयोजित कर विसंगतियों पर अंकुश लगाने की रणनीति तक तैयार नहीं की गई। जाहिर है कि अन्नदाता और मंडी प्रशासन की अंतिम प्रथमिकताओं में है।
सुरक्षा व्यवस्था भी हासिए पर
सतना कृषि उपज मंडी में सुरक्षा के प्रति बरती जा रही लापरवाही ने मंडी की सुरक्षा व्यवस्था को हासिए पर ला दिया है। भोपाल की आरबी एसोसिएट्स भी मंडी परिसर की सुरक्षा करने में नाकाम साबित हो रही है, जिसके चलते कृषि उपज मंडी चोरो का अड्डाबनती जा रही है जहां आए दिन अनाज चोरी की वारदात हो रही हैं। बताया जाता है कि मौजूदा समय पर आरबी एसोसिएट्स भोपाल के सुरक्षा प्रहरी मंडी में तैनात हैं जिनकी संख्या 9 है। इनमे से एक-एक सुरक्षा प्रहरी कोठी, मझगवां व बिरसिंहपुर उपमंडी में है जबकि शेष सुरक्षा प्रहरियों पर मंडी की सुरक्षा का जिम्मा है। इसके अलावा मंडी के उपनिरीक्षक लक्ष्मीकांत शर्मा व शशिधर तिवारी भी मंडी परिसर की सुरक्षा पर नजर रखने का दायित्व संभालते हैं, बावजूद इसके मंडी परिसर में चोरी की घटनाएं होना कई संगीन सवालों को जन्म दे रहा है।


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