सतना और मैहर जिलों में सार्वजनिक वितरण प्रणाली चरमराई। सरकारी रिपोर्ट में 823 में से 623 राशन दुकानों के बंद होने से हजारों जरूरतमंद परिवार संकट में।
By: Yogesh Patel
Feb 09, 202612:18 PM
हाइलाइट्स:
सतना, स्टार समाचार वेब
सतना और मैहर जिलों की सार्वजनिक वितरण प्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। रविवार को जारी ताजा आॅनलाइन सरकारी रिपोर्ट में सामने आया है कि दोनों जिलों में बड़ी संख्या में उचित मूल्य दुकानें (एफपीएस) बंद पड़ी हैं। इससे हजारों गरीब और जरूरतमंद परिवारों को समय पर राशन मिलने में गंभीर परेशानी होने की आशंका है।
खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग द्वारा जारी रिपोर्ट ने सतना और मैहर जिलों की राशन वितरण व्यवस्था की चिंताजनक स्थिति उजागर कर दी है। रिपोर्ट के अनुसार सतना जिले में कुल 536 उचित मूल्य दुकानें संचालित हैं, लेकिन इनमें से केवल 135 दुकानें ही सक्रिय पाई गईं, जबकि 401 दुकानें पूरी तरह निष्क्रिय रहीं। इसी तरह मैहर जिले में कुल 287 दुकानों में से सिर्फ 65 दुकानें चालू हैं और 222 दुकानें बंद हैं। दोनों जिलों को मिलाकर देखा जाए तो कुल 823 दुकानों में से 623 दुकानें बंद होना गंभीर लापरवाही को दर्शाता है।
जिलों के ब्लॉकों की स्थिति
सतना जिले के मझगवां, नागौद, रामपुर बघेलान और सतना (सोहावल) जनपद पंचायत क्षेत्रों में सबसे अधिक दुकानें बंद पाई गई हैं। उचेहरा जनपद में भी स्थिति संतोषजनक नहीं है। शहरी क्षेत्रों में नगर निगम सतना के अंतर्गत आने वाली कई दुकानों में नियमित वितरण नहीं हो पाया। वहीं मैहर जिले में जनपद पंचायत मैहर, अमरपाटन और रामनगर की स्थिति भी बेहद खराब बताई गई है। नगर पालिका मैहर और नगर परिषद अमरपाटन में एक भी उचित मूल्य दुकान सक्रिय नहीं मिली, जिससे शहरी गरीबों की परेशानी और बढ़ गई है।
लेन देन भी सीमित मिला
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि रिपोर्ट वाले दिन सतना जिले में केवल 116 दुकानों और मैहर जिले में मात्र 62 दुकानों ने ही लेन-देन किया। इससे स्पष्ट है कि राशन वितरण बेहद सीमित स्तर पर हुआ। कुछ दुकानों को आंशिक रूप से आॅफलाइन बताया गया है, जहां तकनीकी कारणों से डेटा डाउनलोड नहीं हो पाया।
इसलिए हुआ ऐसा
जानकारों का कहना है कि नेटवर्क समस्या, ई-पीओएस मशीनों की खराबी, दुकानदारों की लापरवाही और प्रशासनिक निगरानी की कमी इसके प्रमुख कारण हो सकते हैं। यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो इसका सीधा असर गरीब, मजदूर और अंत्योदय परिवारों पर पड़ेगा। जनता अब प्रशासन से मांग कर रही है कि बंद दुकानों को शीघ्र सक्रिय किया जाए, दोषियों पर कार्रवाई हो और राशन वितरण व्यवस्था को पारदर्शी एवं सुचारु बनाया जाए, ताकि जरूरतमंदों को उनका हक समय पर मिल सके।