सतना जिले की पांचों विधानसभा सीटों में मतदाता सूची के गहन पुनरीक्षण के दौरान 100% से अधिक डिजिटाइजेशन दर्ज किया गया है। कुल पंजीकृत मतदाताओं से ज्यादा लोगों का सत्यापन होने पर अनियमितताओं के संकेत मिले हैं। रिपोर्ट के अनुसार 54 हजार से अधिक मतदाताओं के नाम कट सकते हैं। मृत्यु, स्थान परिवर्तन और अनुपस्थिति जैसे कारण सामने आए हैं। पढ़ें पूरी रिपोर्ट।
By: Yogesh Patel
Dec 05, 20253:27 PM
हाइलाइट्स:
सतना, स्टार समाचार वेब
मतदाता सूची के गहन पुर्नरीक्षण कार्य में सतना जिले की पांचों विधानसभा सीटों में 100 फीसदी डिजिटाइजेशन का काम पूर्ण कर लिया गया है। सबसे आश्चर्यजनक बात तो यह है कि दो विधानसभा चित्रकूट और रैगांव में 100 फीसदी से ज्यादा डिजिटाइजेशन का काम हुआ है तो जिले की पांचों विधानसभा सीटों में जितने मतदाता नहीं है उससे ज्यादा का सत्यापन कर दिया गया है। शाम 6 बजे तक एसआईआर से जुड़ी जिले की पांचों विधानसभा सीटों की बात करें तो 12 लाख 19 हजार 494 मतदाताओं वाले सतना जिले में 12 लाख 19 हजार 543 मतदाताओं का सत्यापन किया गया है।
कट सकते हैं 54 हजार से ज्यादा मतदाताओं के नाम
4 दिसम्बर तक एसआईआर की सामने आई रिपोर्ट की मानें तो जिले की पांचों विधानसभा सीटोें में लगभग 54 हजार से ज्यादा मतदाताओं के नाम कट सकते हैं। हालांकि इनके नाम काटने से पहले संबंधित मतदाताओं को आखिरी मौका देने के लिए एक नोटिस जारी की जाएगी। जिन मतदाताओं के नाम कटना करीब-करीब तय मानें जा रहे हैं इनमें से 14 हजार 767 मतदाताओं की मृत्यु अंतिम मैपिंग में बताई गई है। इस लिहाज से इनका नाम कटना तय है। जबकि 4412 मतदाता अनुपस्थित पाए गए। जबकि 32 हजार 866 मतदाता अन्यत्र शिफ्ट हो गए हैं (विवाह हो गया है, किराए से रहते थे छोड़कर चले गए हैं, किसी अन्य विधानसभा में नाम जुड़ गया है)। इनके नाम भी करीब-करीब कटने तय हैं।
आॅनलाइन फीडिंग में बीएलओ से हुई गड़बड़ी
बताया जाता है कि एसआईआर के कार्य में 100 फीसदी से ज्यादा डिजिटाइजेशन और विधानसभा में जितने मतदाता नहीं उससे ज्यादा का सत्यापन किए जाने के पीछे माना जा रहा है कि यह उन बीएलओ की गलती की वजह से हुआ है जिनका आॅनलाइन फीडिंग में हाथ तंग है। तो कुछ बीएलओ की लापरवाही भी मानी जा रही है कि वे एसआईआर के काम को जल्द से जल्द पूर्ण करने के चक्कर में मतदाता कहां का है यह ध्यान नहीं दिया और उसका नाम उठाकर मतदाता सूची में जोड़ दिया।
चार बार हुई मैपिंग
बताया जाता है कि मतदाता सूची के गहन पुर्नरीक्षण (एसआईआर) के बाद बनने वाली मतदाता सूची पूरी तरह से शुद्ध हो इसके लिए चार बार मैपिंग की गई है। पहली बार वोटर लिस्ट में व्यक्ति का नाम है कि नहीं, यह देखा गया। दूसरी बार 2003 की वोटर लिस्ट से मिलाकर देखा गया। जबकि तीसरी बार 2003 की मतदाता सूची में परिवार के सदस्यों के साथ मिलान कर के देखा गया। चौथी बार जिस व्यक्ति का जहां उसके माता- पिता का नाम था वहीं उसकी मैपिंग कर दी गई।
फोटो निर्वाचक नामावली प्रारूप का प्रकाशन 16 को
भारत निर्वाचन आयोग के संशोधित कार्यक्रम अनुसार 16 दिसम्बर को निर्वाचक नामावली का प्रारूप प्रकाशन किया जाना है। प्रारूप प्रकाशन के पूर्व 4 से 9 दिसम्बर के बीच विधानसभा स्तर पर नवीन मतदान केन्द्रों के युक्तियुक्तकरण के संबंध में कार्यवाही की जानी है। अपर कलेक्टर एवं उप जिला निर्वाचन अधिकारी विकास सिंह ने जिले की सभी विधानसभा क्षेत्रों के अनुविभागीय अधिकारी राजस्व एवं निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी को निर्देशित करते हुए कहा है कि आयोग द्वारा जारी कार्यक्रम के अनुसार समय-सीमा में समस्त कार्यवाहियां किया जाना सुनिश्चित करें।
12 लाख 19 हजार 494 मतदाता
12 लाख 19 हजार 543 का सत्यापन
विधानसभा कुल मतदाता डिजिटाइजेशन प्रतिशत