सतना-पन्ना रेललाइन के निर्माण कार्य में तेजी, सीएओसी एमएस हासमी ने बरेठिया, नागौद, सकरिया तक का निरीक्षण कर अधिकारियों को दिए निर्देश। नागौद तक अगस्त में ट्रैक तैयार करने का लक्ष्य, सितंबर में हो सकता है सीआरएस ट्रायल। दूसरी ओर, भूमि अधिग्रहण से प्रभावित किसानों ने नौकरी और मुआवज़े की मांग को लेकर सांसद को ज्ञापन सौंपा, चेताया आंदोलन की चेतावनी।

हाइलाइट्स
सतना, स्टार समाचार वेब
पश्चिम मध्य रेलवे जोन के मुख्य प्रशासनिक अधिकारी निर्माण एमएस हासमी ने सतना- पन्ना रेल लाइन का निरीक्षण कर चल रहे निर्माण कार्यों का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान परियोजना से जुड़े अधिकारियों व ठेकेदारों को कार्य की गुणवत्ता को बनाए रखने व समय सीमा में निर्धारित कार्यो को पूरा करने के निर्देश दिए। बताया गया कि शनिवार को सीएओसी एमएस हासमी ने सतना-पन्ना रेल लाइन में बरेठिया, नागौद, सकरिया में चल रहे निर्माण कार्यो का जायजा लिया। वहीं सकरिया-पन्ना के बीच बन रही टनल का निरीक्षण किया। श्री हासमी ने कहा कि इसी माह में बरेठिया से नागौद के बीच ट्रैक तैयार करने का टारगेट रखा। बताया गया कि अगले माह ट्रैक तैयार हो जाने के बाद सीआरएस ट्रायल हो सकता है। निरीक्षण के दौरान चीफ इंजीनियर जॉन सिंह मीना, डिप्टी सीई सुनील प्रजापति, एईएन एके पांडेय सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे। 2026-27 तक में पूरी परियोजना को तैयार करने का लक्ष्य लेकर रेलवे कार्य कर रहा है।
18 किमी का ट्रैक है रेडी
सतना-पन्ना रेललाइन प्रोजेक्ट में प्रथम चरण में सतना से बरेठिया स्टेशन तक लगभग 18 किमी की पिछले साल ही तैयार हो गई थी। बरेठिया से नागौद के बीच दूसरे चरण में कार्य चल रहा है। बताया गया कि बरेठिया से नागौद नदी तक 7 किमी की लाइन तैयार है। नागौद नदी से नागौद स्टेशन तक में 2 किमी की पटरी जल्द ही बिछाई जाएगी। माना जा रहा है कि नागौद तक लाइन तैयार हो जाने के बाद रेलवे पैसेंजर ट्रेन दौड़ा सकता है। वहीं नागौद से पन्ना के बीच भी अर्थवर्क, स्टेशन बिल्डिंग निर्माण, यार्ड के कार्य एवं टनल व ब्रिज के कार्य चल रहे है।
जमीन के बदले चाहिए नौकरी, रेलवे में भर्ती प्रक्रिया शुरू करने उठी आवाज
ललितपुर - सिगरौली रेल परियोजना व सतना-रीवा रेल दोहरीकरण से प्रभावित किसानों ने सांसद को ज्ञापन सौंपकर रेलवे की बंद भर्ती प्रक्रिया को पुन: प्रारंभ करने की मांग उठाई है। बिरहुली, सकरिया एवं सतना रीवा रेल लाइन के प्रभावित किसानों ने सांसद को यह ज्ञापन रविवार को उस वक्त दिया जब रेल अधिकारियों की मौजूदगी में रीवा-हडपसार पुणे ट्रेन को हरी झंडी दिखाने पहुंचे थे। किसानों ने सांसद को ज्ञापन सौपते हुए चेतावनी दी हैं कि यदि सालों से किए जा रहे संघर्ष पर प्रशासन ने ध्यान न दिया तो पश्चिम मध्य रेल महाप्रबंधक कार्यालय के बाहर एवं जनप्रतिनिधियों के कार्यालय के बाहर प्रभावित किसान धरना प्रदर्शन करने के लिए बाध्य होंगे।
न मिली नौकरी, न मिला मुआवजा
ज्ञापन में किसानों ने बताया है बिरहुली व सकरिया के प्रभावित किसानों द्वारा 88 दिन आंदोलन के बाद रेलवे के मंडल रेल प्रबंधक कार्यालय कार्मिक शाखा से जारी आदेश के अनुसार सतना रीवा - दोहरीकरण रेल लाइन के बिरहली व सकरिया के प्रभावित किसान एवं उनके आश्रित को रेलवे में नौकरी दी जानी थी लेकिन अब तक किसी को नौकरी नहीं मिली है। किसानों ने ज्ञापन में बताया है कि रीवा, सीधी ,सिंगरौली एवं पन्ना जिले के कुछ किसानो को रोजगार दिया जा चुका है। इसी प्रकार सतना रीवा रेल लाइन के कोटरा, हिनौता, बगहाई, तपा एवं अन्य गांव के किसानो को भी अभी तक रोजगार नहीं मिला । किसानों ने बताया कि 11 नवंबर 2019 के बाद के किसानों को नौकरी के एवज में 5-5 लाख रुपये देने के निर्देश दिए थे लेकिन अब तक न तो मुआवजा ही मिला है और न ही नौकरी। इस अवसर पर किसान नेता प्रमोद गौतम दीपक सिंह दीपू ध्रुव प्रताप सिंह ऋतुराज सिंह नितेश कुमार गौतम रत्नेश मिश्रा डीके मिश्रा एवं अन्य किसान मौजूद रहे।

मुलताई में कुछ बैंक, कुछ शॉपिंग कॉम्प्लेक्स बिना पार्किंग के संचालित हो रहे हैं, तथा कुछ लोगों ने पार्किंग के लिए जगह बहुत कम दी है। जो वाहन पार्किंग के लिए पर्याप्त नहीं है। इससे ग्राहको को वाहन खड़े करने में बहुत परेशानी होती है। आखिर बिना पार्किंग के बैंक कैसे संचालित हो रहे हैं। ये तो नियमों का उल्लघंन हो रहा है। सड़क किनारे वाहन खड़े करने से यातायात व्यवस्था प्रभावित होती है। कई बार दुर्घटना तक हो जाती है। सरकारी जमीन पर वाहन खड़े हो रहे हैं । जबकि जिस भवन मे बैंक संचालित होती है उसकी स्वयं की पार्किंग होना जरूरी है। मुलताई में संचालित सभी बैंकों की पार्किंग व्यवस्था की जांच होना चाहिए। कुछ बेसमेंट बिना अनुमति के बने हैं। कुछ व्यावसायिक भवनों के नक्शे बिना पार्किंग दिए पास हुए हैं। कुछ लोगों ने सरकारी जमीन पर पक्का अतिक्रमण कर लिया है। जांच होना चाहिए। रवि खवसे, मुलताई (मध्यप्रदेश)

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