सतना पतेरी में सीवरकर्मी जहरीली गैस से बेहोश। बिना सुरक्षा उपकरणों के उतारे गए मजदूर। नोडल अधिकारी को शो-कॉज, ठेका कंपनी पर लापरवाही का आरोप।

हाइलाइट्स:
सतना, स्टार समाचार वेब
शहर में जिस सीवर परियोजना को बड़े-बड़े दावों व वादों के साथ शुरू किया गया था, वह लोगों के लिए ही नहीं बल्कि सीवर का काम करने वाले कर्मचारियों के लिए भी मुसीबत का सबब बना हुआ है। जिस लापरवाही व अव्यवस्था के बीच सीवर परियोजना का काम सतना में कराया जा रहा है उससे सीवरकर्मियों की जान पर ही खतरा मंडराने लगा है। रविवार को क्रिस्तुकुला स्कूल चौराहा पतेरी में घटी घटना ने यह सवाल खड़े कर दिए हैं कि आम जनमानस की परवाह न करने वाली ठेका कंपनी को क्या अपने ही कर्मचारियों की जान की परवाह नहीं है? उल्लेखनीय है कि पीसी स्नेहल कम्पनी द्वारा सीवर लाइन का काम किया जा रहा है। सीवर लाइन की सफाई के लिए उतरे कर्मियों के बेहोश होने के मामले में नगर निगम ने सीवर का काम देख रहे नोडल अधिकारी को शो- कॉज जारी कर संविदा एजेंसी की लापरवाही पर जवाब मांगा है।
एक-एक कर हुए बेहोश, एसडीएम-टीआई ने संभाला मोर्चा
दरअसल इन दिनों पूरे शहर की तरह ही क्रिस्तुकुला विद्यालय चौराहा पतेरी में भी सीवर लाइन का काम किया जा रहा है। बताया जाता है कि बारिश के दौरान सीवर लाइन में भरे पानी व मलबे की सफाई के इरादे से सीवर लाइन परियोजना में काम कर रहे कर्मचारी पहुंचे। बताया गया कि दोपहर तकरीबन साढ़े 11 बजे अहरी टोला निवासी किशन परमार पिता सुशील परमार सीवर लाइन के चेंबर का ढक्कन खोलकर बिना किसी सुरक्षा उपकरणों के तकरीबन 20 फीट गहरी सीवर लाइन में घुसा और वहां मौजूद जहरीली गैस के प्रभाव से बेहोश हो गया। जब सुशील की कोई आहट नहीं मिली तो मौके पर मौजूद सुपरवाइजर आदर्श शुक्ला पिता बाल प्रभाकर शुक्ला सीवर लाइन में घुसा लेकिन वह भी बेहोश हो गया। दो कर्मचारियों के भीतर जाकर चुप्पी साध लेने के बाद जब तीसरा कर्मचारी सतर्क होकर घुसा तो उसने उन्हें बेहोश देखा और स्वयं अचेत होने के पहले बदहवास अवस्था में बाहर निकल आया। सीवर लाइन में 2 कर्मचारियों के बेहोश होने की खबर लगते ही पतेरी में हड़कंप मच गया और सैकड़ों लोग एकत्र हो गए। उधर सूचना पाकर प्रशासनिक अधिकारी व पुलिस बल भी पहुंचा। एसडीएम व सिविल लाइन टीआई ने मौके पर मोर्चा संभाला और आनन-फानन बेहोश कर्मचारियों को जिला अस्पताल लाया गया जहां डा. अंकिता पांडे व मेडिकल टीम ने कर्मचारियों का इलाज किया। चिकित्सकों के अनुसार इलाज के बाद कर्मचारियों की हालत खतरे से बाहर है। एहतियातन उन्हें 24 घंटे की चिकित्सकीय निगरानी में जिला अस्पताल में भर्ती रखा गया है।
न कोई किट, न सुरक्षा उपकरण, हादसों से सबक नहीं
सतना में 'बीरबल की खिचड़ी' बनी सीवर लाइन परियोजना अब तक अपने ही दो कर्मचारियों की जिंदगी लील चुकी है, बावजूद इसके कर्मचारियों की सुरक्षा के कोई प्रबंध नहीं किए गए हैं। हालात यह हैं कि दो कर्मचारियों को गंवाने के बाद भी जब रविवार को तकरीबन 20 फीट की गहराई में काम करने सीवर कर्मी पहुंचे तो न तो उनके पास मास्क थे और न ही बूट, ग्लब्स व अन्य सामान। जाहिर है कि ठेका कंपनी को न तो अपने कर्मचारियों की जान की परवाह है और न ही शहरवासियों की। गौरतलब है कि राजेंद्र नगर वार्ड 26 सीवर लाइन में माउंटेन चैन के धंसकर गिर जाने से इसी साल 23 फरवरी को सीधी जिले के मुनेश तिवारी के दबकर गड्ढे में गिरने से मौत हो गई थी। इसी प्रकार 11 जनवरी 2014 को मारूति नगर की शारदा कालोनी में सीवर लाइन में काम कर रहे इनविराट कंपनी के कर्मचारी खिलाड़ी कुशवाहा की सीवर के मलबे में दबकर मौत हुई थी। उम्मीद जताई जा रही थी कि प्रशासनिक अधिकारी ठेका कंपनी पर सुरक्षा इंतजामों को लेकर सख्ती करेंगे और यह सुनिश्चित कराएंगे कि कोई कर्मचारी कंपनी की लापरवाह कार्यशैली का शिकार न बनें लेकिन दो मौतों के बाद भी बिना सुरक्षा के सीवर लाइन में उतारे गए कर्मचारियों का मामला बताता है कि ठेका कंपनी की मनमानी पर न तो नगर निगम के अफसरों का अंकुश है और न ही जन प्रतिनिधियों का।
मैनुअल पर पाबंदी फिर भी बरती लापरवाही
सीवर के चेम्बरों की सफाई मैनुअली कराने पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाया गया है, विभागीय स्तर पर लगाए गए प्रतिबंध के बावजूद सीवर के काम से जुड़ी कम्पनी पीसी स्नेहल द्वारा तमाम गाइड लाइनों को दरकिनार कर चंद पैसे बचाने के लिए मजदूरों से चेम्बर की सफाई कराई जा रही है। बताया जाता है कि चेम्बर की सफाई का काम मशीन से कराया जाना चाहिए, यदि श्रमिकों से कराया जाना जरूरी हुआ तो इसके लिए पहले एक कमेटी बनेगी और सफाई के दौरान मौके पर एम्बुलेंस भी मौजूद होनी चाहिए लेकिन कम्पनी द्वारा किसी भी गाइड लाइन का पालन नहीं किया जा रहा था। अब देखना यह है कि सीवर लाइन के काम में लगी संविदा एजेंसी पीसी स्नेहल पर नगर निगम की मेहरवानी बनी रहती है या फिर संविदा एजेंसी के जिम्मेदारों पर कोई कार्रवाई होती है?
माना जा रहा मीथेन का रिसाव
माना जा रहा है कि सीवर लाइन के कर्मचारी मिथेन गैस के । प्रभाव से बेहोश हुए हैं। गौरतलब है कि जिले के अलग-अलग हिस्सों में मिथेन के रिसाव के मामले सामने आते रहे हैं। | पाल्यूशन कंट्रोल बोर्ड के वैज्ञानिक गणेश बैगा बताते हैं कि जहां आर्गेनिक कचरा लंबे अरसे से जमा रहता है तो वहां मिथेन गैस बनने लगती है। जानकारों का मानना है कि पानी व मलबे के कारण ही बंद सीवर लाइन में मिथेन गैस रिसी होगी। विगत दिवस जैतवारा व धवारी में भी मिथेन गैस के रिसाव के मामले प्रकाश में आ चुके हैं।


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