सतना स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में भ्रष्टाचार के आरोप लोकसभा तक पहुंचे। सांसद गणेश सिंह ने 943 करोड़ के कार्यों में अनियमितताओं का आरोप लगाकर थर्ड पार्टी ऑडिट की मांग की।

हाइलाइट्स:
सतना, स्टार समाचार वेब
शहर में स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत चल रहे निर्माण व विकास कार्यों में भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप अभी तक स्थानीय स्तर पर ही लगाए जा रहे थे लेकिन यहां निर्माण कार्यों में हुए भ्रष्टाचार का मामला अब देश की सबसे बड़े सदन में पहुंच गया है। इस मामले को सतना सांसद गणेश सिंह ने लोकसभा में उठाते हुए गंभीर अनियमितताओं के आरोप लगाए हैं। सांसद ने तमाम कार्यों की एक स्वतंत्र पार्टी से आॅडिट कराने की मांग की है।
पैसे के दुरुपयोग की आशंकाएं
सांसद गणेश सिंह ने स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत हुए निर्माण कार्यों में गंभीर भ्रष्टाचार की आशंका जताते हुए कहा कि इस परियोजना के अन्तर्गत हुए कार्यों में अब तक कई अनियमितताएं देखने में आर्इं हैं। सांसद ने लोकसभा में स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में पैसे के दुरुपयोग की गंभीर आशंकाएं जताई।
गुणवत्ताविहीन कार्य
लोकसभा में सांसद गणेश सिंह ने कहा कि स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत शहर में हुए ज्यादातर कार्य गुणवत्ताविहीन हुए हैं। इन कार्यों की खामियों का सीधा असर सतना की जनता पर पड़ा है। लोगों को निरन्तर परेशानियों का सामना करना पड़ा है और आज भी लोगों को अपेक्षित राहत नहीं मिल पा रही है।
तय की जाए जवाबदेही
स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में बरती गई लापरवाही के प्रति सदन में आक्रोशित नजर आए सांसद गणेश सिंह ने लोकसभा अध्यक्ष से मांग की कि सतना स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत किए गए सभी निर्माण कार्यों की विस्तृत समीक्षा बैठक आयोजित की जाए तथा एक स्वतंत्र थर्ड पार्टी से पूरे प्रोजेक्ट की आॅडिट कराई जाए ताकि जिम्मेदारों की जवाबदेही तय हो सके और जनता को वास्तविक लाभ मिल सके।
अक्सर लगते रहे भ्रष्टाचार के आरोप
लगभग साढ़े नौ सौ करोड़ की स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के निर्माण कार्यों में अनियमितता को लेकर अक्सर सवाल उठते रहे हैं। यह अलग बात है कि अभी तक किस मामले में आरोप विपक्ष की तरफ से लग रहे थे लेकिन ऐसा पहली बार कि खुलेतौर पर सत्तारूढ़ दल के सांसद ने ही स्मार्ट सिटी के कार्यों को गुणवत्ताविहीन बताया हो और आशंका जाहिर की हो कि यहां चल रहे निर्माण कार्यों में जमकर पैसे का दुरुपयोग हुआ है।
धारा 377 के तहत उठाया मामला
सांसद गणेश सिंह ने लोकसभा के नियम 377 के तहत यह मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत देश के 100 शहरों को स्मार्ट सिटी के रूप में विकसित करने का लक्ष्य रखा गया था। जिसमें मप्र के सात शहरों को शामिल किया गया था इन्हीं सात शहरों में मेरे लोकसभा क्षेत्र सतना को भी स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में शामिल किया गया था।
क्या है धारा 377
इस धारा के तहत जब कोई सांसद प्रश्नकाल व स्थगन प्रस्ताव के तहत अपना मुददा नहीं उठा पाता तो वह अध्यक्ष की अनुमति से किसी सार्वजनिक महत्व के मामले को उठा सकता है। इस मामले में सुबह 10 बजे से पहले सांसद को नोटिस देना होता है और अध्यक्ष की अनुमति मिलने पर प्रश्नकाल के बाद सदन में इस मुद्दे को संक्षेप में (लगभग 150-250 शब्दों में) रख सकता है।
सांसद के निशाने पर कौन?
लगभग साढ़े नौ सौ करोड़ के कार्य पूर्ण होने के बाद इन कार्यों की गुणवत्ता को लेकर सदन में सांसद गणेश सिंह द्वारा उठाए गए सवाल के बाद चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है। सांसद द्वारा अपनी ही शहर सरकार के आधीन कराए गए इन कार्याे का देश के सबसे बड़े सदन के माध्यम से जांच कराए जाने और जवाबदेही तय किए जाने की मांग के बाद यह सवाल उठ खड़ा हुआ है कि आखिर सांसद के निशाने पर कौन है?
गर्म रहा चर्चाओं का बाजार
लोकसभा में सांसद द्वारा स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में भ्रष्टाचार का मुद्दा उठाए जाने की खबर जैसे ही सोशल मीडिया में सामने आई वैसे ही नगर निगम समेत राजनीतिक गलियारोें में चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया।
943.27 करोड़ के 74 कार्य
बताया जाता है कि स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत सतना में 943.27 करोड़ के 74 कार्य चल रहे हैं। जिनमें से 542.25 करोड़ के 60 कार्य पूर्ण हो चुके हैं। 401.02 करोड़ के 14 कार्य अब भी प्रगतिशील हैं। ये आकंड़े स्मार्ट सिटी की पिछली बैठक के हैं जिसमें से कुछ कार्य पूर्ण हो गए हैं लेकिन उन कार्यों को अभी तक जनता को समर्पित नहीं किया गया है।


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