जस्टिस यशवंत वर्मा को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। कैश कांड मामले में लोकसभा अध्यक्ष द्वारा गठित जांच समिति के खिलाफ उनकी याचिका खारिज कर दी गई है। जानें क्या है पूरा मामला।
By: Ajay Tiwari
Jan 16, 202611:49 AM
नई दिल्ली: स्टार समाचार वेब
बहुचर्चित 'कैश कांड' मामले में घिरे जस्टिस यशवंत वर्मा की मुश्किलें बढ़ गई हैं। सुप्रीम कोर्ट ने लोकसभा अध्यक्ष (स्पीकर) द्वारा उनके खिलाफ गठित जांच समिति की वैधता को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया है। इस महत्वपूर्ण फैसले के बाद अब जस्टिस वर्मा को पद से हटाने की संवैधानिक कार्यवाही में कोई कानूनी बाधा नहीं बची है।
जस्टिस वर्मा ने अपनी याचिका में तर्क दिया था कि लोकसभा अध्यक्ष ने जांच समिति का गठन करते समय 'न्यायाधीश (जांच) अधिनियम, 1968' के नियमों का उल्लंघन किया है। उनका कहना था कि महाभियोग नोटिस दोनों सदनों में दिए जाने के बावजूद, लोकसभा अध्यक्ष ने राज्यसभा सभापति से सलाह मशविरा किए बिना ही समिति बना दी। हालांकि, शीर्ष अदालत ने फैसला सुनाते हुए कहा कि चूंकि राज्यसभा के उपसभापति ने प्रस्ताव को खारिज करने के निर्णय को चुनौती नहीं दी गई और दोनों सदनों ने संयुक्त रूप से कोई प्रस्ताव पास नहीं किया, इसलिए एक संयुक्त समिति (Joint Committee) का गठन संभव नहीं था।
पिछली सुनवाइयों के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने माना था कि समिति के गठन में कुछ तकनीकी खामियां हो सकती हैं, लेकिन अदालत ने यह भी सवाल उठाया था कि क्या ये कमियां इतनी गंभीर हैं कि न्यायपालिका को इसमें हस्तक्षेप करना पड़े। अंततः अदालत ने हस्तक्षेप से इनकार करते हुए जांच को जारी रखने का आदेश दिया। कोर्ट ने जस्टिस वर्मा को पहले ही समिति के समक्ष पेश होने के निर्देश दे दिए थे।
यह मामला 'कैश कांड' से जुड़ा है, जिसमें भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों के बाद लोकसभा में जस्टिस वर्मा के खिलाफ महाभियोग की कार्यवाही शुरू करने का नोटिस दिया गया था। लोकसभा अध्यक्ष ने आरोपों की जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति का गठन किया था। जस्टिस वर्मा इसी कमेटी के गठन की प्रक्रिया को असंवैधानिक बता रहे थे, जिसे अब सुप्रीम कोर्ट ने वैध मान लिया है।