यूजीसी के समता युग के विरोध में और स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के समर्थन में इस्तीफा देने वाले बरेली के नगर मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री को शासन ने निलंबित कर दिया है। हालांकि, अब तक इस्तीफा मंजूर नहीं हुआ है। माना जा रहा है कि जांच पूरी होने के बाद ही सरकार इस्तीफा स्वीकार करेगी।
By: Arvind Mishra
Jan 27, 202612:50 PM
बरेली। स्टार समाचार वेब
यूजीसी के समता युग के विरोध में और स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के समर्थन में इस्तीफा देने वाले बरेली के नगर मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री को शासन ने निलंबित कर दिया है। हालांकि, अब तक इस्तीफा मंजूर नहीं हुआ है। माना जा रहा है कि जांच पूरी होने के बाद ही सरकार इस्तीफा स्वीकार करेगी। मामले की जांच मंडलायुक्त बरेली भूपेंद्र एस चौधरी को दी गई है। इससे पहले देर रात शंकराचार्य ने सिटी मजिस्ट्रेट से फोन पर बात करते हुए कहा- पूरा सनातनी समाज आपसे प्रसन्न है। जो पद आपको सरकार ने दिया था, हम उससे बड़ा पद धर्म के क्षेत्र में आपको देंगे। दरअसल, पीसीएस अधिकारी अलंकार अग्निहोत्री की परेशानियां बढ़ गई हैं। वे मंगलवार को बरेली कलेक्टर आफिस के बाहर धरने पर बैठ गए और आरोप लगाया कि उन्हें सुनियोजित साजिश के तहत सस्पेंड किया गया है।
कलेक्टर आएं या प्रधानमंत्री...
अग्निहोत्री ने यह भी मांग की है कि उन्हें डीएम स्वयं आकर ये बताएं कि कल शाम किसका फोन आया था, जो पंडितों के लिए अपशब्द बोल रहा था। डीएम के नहीं आने पर उन्होंने पीएम या गृहमंत्री के आने को कहा है।
शामली डीएम कार्यालय से संबद्ध
विशेष सचिव अन्नपूर्णा गर्ग की ओर से जारी आदेश में सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री को उत्तर प्रदेश सरकारी सेवा (अनुशासन एवं अपील) नियमावली-1999 के नियम चार के तहत प्रथम दृष्टया दोषी मानते हुए तत्काल निलंबित किया गया है। अलंकार के विरुद्ध विभागीय अनुशासनिक कार्यवाही संस्थित करते हुए आरोपों की जांच को मंडलायुक्त बरेली को जांच अधिकारी नामित किया है। निलंबन की अवधि में अलंकार अग्निहोत्री शामली डीएम कार्यालय से संबद्ध रहेंगे।
सबके साथ काफी पी और चले गए...
इधर, अग्निहोत्री ने डीएम अविनाश सिंह द्वारा अपने कैंप कार्यालय में 45 मिनट बंधन बनाने का जो आरोप लगाया था, एडीएम न्यायिक देश दीपक सिंह ने उसका खंडन किया है। उन्होंने कहना है कि वहां बंधन बनाने जैसी कोई स्थिति नहीं थी। अग्निहोत्री खुद ही वहां सबसे मिलने गए थे। वहां एडीएम सिटी और एडीएम प्रशासन भी थे। सबके साथ काफी पी। उन्हें बंधन बनाने जैसी कोई बात नहीं थी। बातचीत होने से वह चले गए। सभी आरोप बेबुनियाद हैं।
मंत्री बोले- यूजीसी में खामियां होंगी तो विचार होगा
अग्निहोत्री के इस्तीफे पर यूपी के मंत्री संजय निषाद ने कहा- देश में लोकतंत्र है। संसद से पारित कानून जनता के हितों के लिए होते हैं। लागू होने के बाद कुछ खामियां होती है उस पर विचार किया जा सकता है। संविधान सभा में बड़े लोगों ने भी निर्णय लिया था। कुछ भेदभाव होते थे जो बढ़ गए थे ये उसी के आधार पर कानून है। बाद में कुछ होगा तो बदलाव होगा। हम चाहते हैं कि एक्ट लागू हो।
शंकराचार्य बोले- अग्निहोत्री सनातन धर्म के अलंकार
इधर, शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा- सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री का मानना है कि ऐसी अत्याचारी सरकार का अंग बने रहना, उन्हें भी पाप में डालेगा, इसलिए उन्होंने त्यागपत्र दे दिया। हमने उनसे टेलीफोन पर बात की। मैंने कहा कि आपने त्यागपत्र क्यों दे दिया, जबकि ऐसे पद पर आने के लिए लोग लालायित रहते हैं, तो उन्होंने कहा-मेरे लिए अब संभव नहीं था कि ऐसी अत्याचारी सरकार का अंग बनकर काम करूं। मैंने कहा-कोई बात नहीं, अगर आपका फैसला है तो इस निर्णय से सनातन धर्मियों को यह पता चलता है कि अपने सनातन धर्म के प्रतीकों के प्रति लोगों के मन में कितनी गहरी भावना है। आप धर्म का काम करिए, आप हमारे सनातन धर्म के अलंकार हैं।
यूजीसी नियमों पर सरकार जारी करेगी फैक्ट
इधर, यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन के नए नियमों को लेकर तनाव बढ़ता जा रहा है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार इन नियमों पर विपक्ष द्वारा फैलाई जा रही गलत जानकारी का मुकाबला करने के लिए तथ्य पेश करेगी। यूजीसी के नए नियम हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशंस में इक्विटी रेगुलेशन, जिसका मकसद कैंपस में जाति-आधारित भेदभाव को रोकना है, इसे लेकर बनाए गए हैं। यूजीसी के नए नियम 13 जनवरी 2026 को लागू किए गए थे। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इन नए नियमों से ऊंची जाति के लोग नाराज हैं। अब सरकार इन नियमों पर जल्द ही अपना रुख साफ करेगी।