
आईसीयू में भर्ती मरीजों में संक्रमण का खतरा सबसे अधिक होता है।

नई दिल्ली। स्टार समाचार वेब
अस्पतालों में गंभीर मरीजों को जीवनरक्षक इलाज देने वाली आईसीयू (इंटेंसिव केयर यूनिट) अब संक्रमण के सबसे बड़े केंद्र के रूप में सामने आ रही है। यह दावा हम नहीं कर रहे, बल्कि अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), नई दिल्ली में किए गए एक शोध और अस्पताल आधारित निगरानी से पता चला है कि आईसीयू में भर्ती मरीजों में संक्रमण का खतरा सबसे अधिक होता है। विशेषज्ञों के अनुसार, कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता, लंबे समय तक भर्ती और अत्याधुनिक उपकरणों का लगातार इस्तेमाल इस खतरे को और बढ़ा देता है। यह अध्ययन भारत में अपनी तरह का सबसे बड़ा निगरानी नेटवर्क है। इसमें 34 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 190 से अधिक आईसीयू शामिल थे। यह देश में संक्रमण की रोकथाम के लिए गुणवत्ता में सुधार के लिए एक मूल्यवान अवसर प्रदान करता है।
आपरेशन के बाद संक्रमण खतरनाक
एम्स के माइक्रोबायोलाजी एवं इंफेक्शन कंट्रोल विभाग द्वारा आइसीयू मरीजों पर किए गए अध्ययन में पाया गया कि अस्पताल में होने वाले संक्रमणों का सबसे बड़ा हिस्सा आईसीयू से जुड़ा होता है। इस अध्ययन में फेफड़ों के संक्रमण (निमोनिया), मूत्र मार्ग संक्रमण, रक्त संक्रमण और आपरेशन के बाद होने वाले इंफेक्शन को सबसे ज्यादा गंभीर बताया गया है।
वेंटिलेटर-कैथेटर बढ़ाते हैं जोखिम
एम्स की माइक्रोबायोलाजी विभाग की प्रोफेसर और हास्पिटल इंफेक्शन कंट्रोल प्रमुख डॉ. पूर्वा माथुर के अनुसार आईसीयू में मरीज वेंटिलेटर, यूरिन कैथेटर और सेंट्रल लाइन जैसे उपकरणों पर निर्भर रहते हैं। यही उपकरण संक्रमण के प्रवेश का सबसे बड़ा रास्ता बनते हैं। खासकर तब जब मरीज लंबे समय तक आईसीयू में रहता है। वेंटिलेटर से जुड़ा निमोनिया आईसीयू में होने वाले संक्रमणों में सबसे आम और सबसे घातक है।
एंटीबायोटिक पर असर नहीं
शोध में यह भी दावा किया गया है कि आईसीयू में फैलने वाले कई बैक्टीरिया सामान्य एंटीबायोटिक दवाओं पर असर नहीं दिखाते। डॉ. पूर्वा माथुर बताती हैं, मल्टी-ड्रग रेजिस्टेंट बैक्टीरिया आइसीयू की सबसे बड़ी चुनौती हैं। ऐसे संक्रमणों में इलाज लंबा, महंगा और कई बार जानलेवा हो जाता है।
संक्रमण रोकने बनानी होगी सख्त व्यवस्था
शोध में यह भी कहा गया है कि हाथों की स्वच्छता, उपकरणों की नियमित स्टरलाइजेशन, एंटीबायोटिक के विवेकपूर्ण इस्तेमाल और मरीजों की लगातार निगरानी से संक्रमण को काफी हद तक रोका जा सकता है। एम्स के डाक्टरों ने सभी अस्पतालों में सख्त इंफेक्शन कंट्रोल प्रोटोकाल और नियमित आडिट लागू करने पर जोर दिया है, ताकि आईसीयू में भर्ती गंभीर मरीजों की जान सुरक्षित रखी जा सके।
संक्रमण की दर
द लैंसेट ग्लोबल हेल्थ में प्रकाशित अनुमानों के अनुसार, भारतीय आईसीयू में औसतन हर 1,000 केंद्रीय लाइन उपयोग-दिवसों में लगभग नौ रक्त प्रवाह संक्रमण के मामले होते हैं।

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