मध्यप्रदेश के उज्जैन में अब राजा महाराजाओं के समय की परंपराएं लौटने जा रही है, जो भक्त बाबा महाकाल के दर्शन के लिए आएंगे, वो भव्य द्वारों से होकर मंदिर परिसर में पहुंचेंगे। सीएम डॉ. मोहन यादव की पहल के बाद ये फैसला लिया गया ह। महाकाल मंदिर पहुंचने वाले रास्तों पर प्रवेश द्वार बनेंगे।
By: Arvind Mishra
Feb 11, 202611:03 AM

उज्जैन। स्टार समाचार वेब
मध्यप्रदेश के उज्जैन में अब राजा महाराजाओं के समय की परंपराएं लौटने जा रही है, जो भक्त बाबा महाकाल के दर्शन के लिए आएंगे, वो भव्य द्वारों से होकर मंदिर परिसर में पहुंचेंगे। सीएम डॉ. मोहन यादव की पहल के बाद ये फैसला लिया गया ह। महाकाल मंदिर पहुंचने वाले रास्तों पर प्रवेश द्वार बनेंगे। मंदिर के आसपास प्रवेश द्वार बनाने की परंपरा 26 सौ साल पुरानी है। यानी प्राचीन भारत का वैभव महाकाल की नगरी में लौटने जा रहा है। पुराने समय में बाबा महाकाल की नगरी में प्रवेश द्वार की परंपरा थी। दरअसल, उज्जैन विकास प्राधिकरण शहर के नए प्रमुख मार्गों पर 92.25 करोड़ लाख से नौ प्रवेश द्वार बनाने जा रहा है। यह परियोजना केवल शहरी सौंदर्यीकरण तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य उज्जैन की हजारों वर्षों पुरानी सनातन परंपरा, खगोल-कालगणना, सिंहस्थ संस्कृति और राजकीय वैभव को मूर्त रूप देना है। जब कोई श्रद्धालु, पर्यटक या आगंतुक उज्जैन की सीमा में प्रवेश करेगा, तो ये द्वार उसे यह एहसास कराएंगे कि वह किसी साधारण नगर में नहीं, बल्कि काल, धर्म और मोक्ष की राजधानी में कदम रख रहा है।
सांस्कृतिक चिन्ह उकेरे जाएंगे
नौ प्रवेश द्वारों का डिजाइन पारंपरिक भारतीय स्थापत्य और आधुनिक इंजीनियरिंग तकनीक का संतुलित समन्वय होगा। निर्माण में बंसी पहाड़पुर के गुलाबी-सफेद पत्थर और जैसलमेर के पीले पत्थर का उपयोग किया जाएगा। द्वारों पर 10 से 50 मिमी तक की गहरी 3-डी नक्काशी की जाएगी, जिसमें पौराणिक प्रसंग, धार्मिक प्रतीक, शेर, हाथी, मानव आकृतियां और सांस्कृतिक चिन्ह उकेरे जाएंगे।
सोलर सिस्टम भी लगाए जाएंगे
ऊर्जा संरक्षण को ध्यान में रखते हुए सभी द्वारों पर सोलर सिस्टम भी लगाए जाएंगे, जिससे ये द्वार रात में भी उज्जैन की भव्य पहचान बनेंगे। यूडीए के अनुसार सभी स्वीकृतियों के बाद 18 महीनों में नौों प्रवेश द्वारों के निर्माण का लक्ष्य रखा गया है। निर्माण पूर्ण होने के बाद संबंधित एजेंसी को पांच वर्षों तक संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी भी दी जाएगी।