जोधपुर में दिल्ली के बाद देश के तीसरे बड़े अक्षरधाम मंदिर में मूर्तियों की प्राण-प्रतिष्ठा की गई। यह पहला ऐसा मंदिर है, जिसमें केवल जोधपुरी पत्थर ही उपयोग में लिया गया है। मंदिर में कहीं भी लोहे या स्टेनलेस स्टील का उपयोग नहीं किया गया है। सभी पत्थर इंटरलॉक सिस्टम से जुड़े हैं। मंदिर आज से श्रद्धालुओं के लिए खुल गया है।

यह पहला ऐसा मंदिर है, जिसमें केवल जोधपुरी पत्थर ही उपयोग में लिया गया है।

नई दिल्ली। स्टार समाचार वेब
जोधपुर में दिल्ली के बाद देश के तीसरे बड़े अक्षरधाम मंदिर में मूर्तियों की प्राण-प्रतिष्ठा की गई। यह पहला ऐसा मंदिर है, जिसमें केवल जोधपुरी पत्थर ही उपयोग में लिया गया है। मंदिर में कहीं भी लोहे या स्टेनलेस स्टील का उपयोग नहीं किया गया है। सभी पत्थर इंटरलॉक सिस्टम से जुड़े हैं। मंदिर आज से श्रद्धालुओं के लिए खुल गया है। यहां आने वाले श्रद्धालुओं को नशामुक्ति, बच्चों को अच्छे संस्कार देने जैसे अभियान चलाए जाएंगे। दरअसल, राजस्थान के जोधपुर में बीएपीएस स्वामीनारायण मंदिर का उद्घाटन कल हो गया है। राजस्थान के दूसरे सबसे बड़े शहर में बने इस मंदिर को भक्ति, शांति और सांस्कृतिक गौरव का केंद्र माना जाता है। यह मंदिर स्वामीनारायण संप्रदाय के संस्थापक भगवान स्वामीनारायण को समर्पित होता है। उन्होंने नैतिक जीवन और सामाजिक उत्थान उपदेश दिया था। जोधपुर का स्वामीनारायण अक्षरधाम मंदिर देश का तीसरा ऐसा मंदिर है।
राजस्थान के जोधपुर में इस मंदिर का निर्माण स्वामी महाराज से प्रेरित है। बताया जा रहा है कि इस पवित्र मंदिर की परिकल्पना और निर्माण, प्रमुख स्वामी महाराज के वर्तमान आध्यात्मिक उत्तराधिकारी और बीएपीएस के वर्तमान गुरु, महंत स्वामी महाराज के मार्गदर्शन में किया गया।
मंदिर के अंदर आंतरिक शांति और दिव्य दर्शन का स्थान बनाया गया है। जोधपुर में बनाय यह मंदिर देश का तीसरा ऐसा अक्षरधाम मंदिर है। जोधपुर में बना यह मंदिर दुनिया का 5वां मंदिर है। पहला दिल्ली और दूसरा अक्षरधाम मंदिर गांधीनगर में है। मंदिर में नीलकंठ अभिषेक मंडपम बनाया गया है, जिसमें भगवान स्वामीनारायण की नीलकंठ वर्णी के रूप में पंचधातु की मूर्ति स्थापित है।
राजस्थान के दूसरे सबसे बड़े शहर में बना यह मंदिर शहर के सूरसागर स्थित कालीबेरी क्षेत्र में स्थापित है। इस मंदिर को पूरी तरीके से जोधपुर बलुआ पत्थर से बनाया गया है। इतना ही नहीं, इस मंदिर में लोहे का उपयोग नहीं किया गया है। साथ ही किसी भी प्रकार के सीमेंट का प्रयोग इसमें नहीं किया गया है।
जोधपुर में बना यह अक्षरधाम मंदिर परिसर 42 बीघा में फैला है। इसमें 10 बीघा में उद्यान जिसमें 500 पेड़ और 5500 पौधे लगे हैं। मंदिर की ऊंचाई 191 फीट है, 181 फीट और 111 फीट है। इसमें पांच शिखर, एक भव्य गुंबद और 14 छोटे गुंबद हैं। इस मंदिर को बनाने में सात सालों से अधिक का वक्त लगा है।


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