हादसों से अब सरकार ने सबक ले लिया है। पिछले छह महीनों में देशभर में स्लीपर कोच बसों के अलग-अलग हादसों में 145 लोगों की जान चली गई। स्लीपर कोच बसों में लगातार हो रही आग की घटनाओं के बाद केंद्र सरकार ने यात्री सुरक्षा को लेकर बड़ा और सख्त फैसला लिया है।
By: Arvind Mishra
Jan 09, 202610:13 AM

नई दिल्ली। स्टार समाचार वेब
हादसों से अब सरकार ने सबक ले लिया है। पिछले छह महीनों में देशभर में स्लीपर कोच बसों के अलग-अलग हादसों में 145 लोगों की जान चली गई। स्लीपर कोच बसों में लगातार हो रही आग की घटनाओं के बाद केंद्र सरकार ने यात्री सुरक्षा को लेकर बड़ा और सख्त फैसला लिया है। जिसके तहत अब स्लीपर बसों का निर्माण केवल मान्यता प्राप्त कंपनियां ही करेंगी। इसके अलावा मौजूदा बसों में भी सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए जरूरी गाइडलाइन जारी की गई है। पिछले छह महीनों में स्लीपर बसों में होने वाल भयानक हादसों में 145 लोगों की मौत के बाद सरकार ने सुरक्षा नियमों को और मजबूत कर दिया है। इसका मकसद लंबी दूरी की यात्रा करने वाले यात्रियों को सुरक्षित रखना है। केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने नए नियमों की घोषणा करते हुए कहा-अब स्लीपर बसों का निर्माण केवल वही आटोमोबाइल कंपनियां या निर्माता कर सकेंगे, जिन्हें केंद्र से मान्यता प्राप्त हो।
सुरक्षा का नहीं रखते ध्यान
नए नियम के तहत स्थानीय और मैनुअल बॉडी बिल्डर्स को स्लीपर बस बनाने की अनुमति नहीं होगी। सरकार का मानना है कि इससे मैन्युफैक्चरिंग क्वॉलिटी और सेफ्टी लेवल में बड़ा सुधार होगा। ऐसा देखा जाता है कि, ट्रैवेल एजेंसियां लोकल बॉडी मेकर्स से अपने मन माफिक बसों का निर्माण कराती हैं, जिसमें सेफ्टी स्टैंडर्ड पर उतना ध्यान नहीं दिया जाता है।
लगेंगे जरूरी सेफ्टी फीचर
केंद्र ने यह भी निर्देश दिया है कि देश में चल रही सभी मौजूदा स्लीपर बसों को अनिवार्य रूप से नए सेफ्टी डिवाइसेज से लैस किया जाए। इनमें फायर डिटेक्शन सिस्टम, इमरजेंसी लाइटिंग, ड्राइवर को नींद का अलर्ट देने वाला सिस्टम यानी एडीएएस, इमरजेंसी एग्जिट और सेफ्टी हैमर शामिल हैं। ये सेफ्टी फीचर और डिवाइसेज किसी भी आपात स्थिति में बड़े मददगार साबित होंगे।
बस बॉडी कोड का पालन जरूरी
नए नियमों के अनुसार सभी स्लीपर बसों को एआईएस-052 बस बॉडी कोड और मॉडिफाइड बस बॉडी कोड का पालन करना अनिवार्य होगा। यह मॉडिफाइड कोड 1 सितंबर 2025 से लागू हो चुका है। इसके बिना किसी भी स्लीपर बस को आपरेट नहीं किया जा सकेगा। यानी ऐसी बसें जो इस कोड का पालन नहीं करती हैं वो सड़कों पर नहीं दिखेंगी।
बसों में देना होगा ये फीचर
फायर डिटेक्शन सिस्टम, इमरजेंसी लाइटिंग सिस्टम, ड्राइवर की नींद का अलर्ट देने वाला सिस्टम, एडवांस ड्राइवर असिस्टें सिसटम, इमरजेंसी एग्जिट और सेफ्टी हैमर।
बड़े फैसलों पर एक नजर
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