भारत के साथ-साथ मध्यप्रदेश में भी घुसपैठिये बांग्लादेदिशों की सुरक्षित शरण स्थली बन गया है। यह हम नहीं, बल्कि एमपी पुलिस के आंकड़े बयां कर रहे हैं। यहां चौंकाने वाली बात यह है कि प्रदेश के 26 जिलों में घुसपैठिये बांग्लादेशी पाए गए हैं।
By: Arvind Mishra
Jan 24, 202611:54 AM

भोपाल। स्टार समाचार वेब
भारत के साथ-साथ मध्यप्रदेश में भी घुसपैठिये बांग्लादेदिशों की सुरक्षित शरण स्थली बन गया है। यह हम नहीं, बल्कि एमपी पुलिस के आंकड़े बयां कर रहे हैं। यहां चौंकाने वाली बात यह है कि प्रदेश के 26 जिलों में घुसपैठिये बांग्लादेशी पाए गए हैं। गौरतलब है कि मध्य प्रदेश की शिवराज सिंह चौहान सरकार के समय पांच हजार बांग्लादेशी शरणार्थियों को शरण देने की बात सामने आई थी। हालांकि राज्य सरकार ने यह नहीं बताया कि उसने जिन लोगों को शरण दी है, वे किस धर्म विशेष के हैं। दरअसल, भारत में घुसपैठियों को चिह्नित कर बाहर करने के केंद्र सरकार के निर्देश पर मध्य प्रदेश में चलाए जा रहे विशेष अभियान में अब तक 26 जिलों में 3,278 बांग्लादेशी मिले हैं। अब इनकी वैध नागरिकता की पुष्टि की जा रही है। इसके बाद उनके विरुद्ध वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
भोपाल में मिला एक बांग्लादेशी
18 जून, 2025 से शुरू इस अभियान में बांग्लादेशियों की पहचान के लिए दस्तावेजी प्रमाण और खुफिया सूचनाओं का सहारा लिया गया। इसी प्रक्रिया में 73 बांग्लादेशी नागरिक अवैध रूप से यहां रहते पाए गए हैं, इनमें से 31 को वापस भी भेजा जा चुका है। जिलों से अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशियों को किया बाहर सबसे ज्यादा 13 बांग्लादेशी धार जिले से वापस भेजे गए हैं। ग्वालियर से 10, जबलपुर में तीन, कटनी, विदिशा, सीधी, भोपाल और इंदौर से एक-एक बांग्लादेशी नागरिक को वापस भेजा गया।
बैतूल में 5,669 बांग्लादेशी परिवार
केंद्र ने अलग-अलग राज्यों में रह रहे बांग्लादेशी शरणार्थियों की जानकारी भी मांगी थी। मध्य प्रदेश सरकार द्वारा मई 2025 में प्रेषित जानकारी के अनुसार प्रदेश के पांच जिलों में 6,840 शरणार्थी बांग्लादेशी परिवार रह रहे हैं। बैतूल में सबसे ज्यादा 5,669 परिवार हैं। हालांकि इनके सदस्यों की संख्या स्पष्ट नहीं की गई है।
पन्ना में मिले 2,086 सदस्य
वहीं मध्यप्रदेश के पन्ना जिले में 386 परिवारों के 2,086 सदस्य, मंदसौर में 451 परिवारों के 1700 सदस्य, इंदौर में 189 परिवारों के 1270 सदस्य और देवास में 145 परिवारों के 929 सदस्य प्रदेश में शरणार्थी के रूप में रह रहे हैं।