केंद्र की मोदी सरकार ने शिक्षा के क्षेत्र में मध्यप्रदेश को बड़ी सौगात दी है। देशभर में स्वीकृत 85 नए केंद्रीय विद्यालयों की सूची में मैहर का नाम भी शामिल किया गया है। गौरतलब है कि दिसंबर 2024 में केंद्र सरकार ने देशभर में 85 नए केंद्रीय विद्यालयों को स्वीकृति दी थी। इसमें मैहर का नाम भी शामिल था।
By: Arvind Mishra
Jan 30, 20261:10 PM
भोपाल। स्टार समाचार वेब
केंद्र की मोदी सरकार ने शिक्षा के क्षेत्र में मध्यप्रदेश को बड़ी सौगात दी है। देशभर में स्वीकृत 85 नए केंद्रीय विद्यालयों की सूची में मैहर का नाम भी शामिल किया गया है। गौरतलब है कि दिसंबर 2024 में केंद्र सरकार ने देशभर में 85 नए केंद्रीय विद्यालयों को स्वीकृति दी थी। इसमें मैहर का नाम भी शामिल था। दरअसल, मां शारदा की नगरी मैहर में केंद्रीय विद्यालय (केवी) की स्थापना के लिए सरकार ने दो साल बाद आधिकारिक मंजूरी दे दी है। दावा किया जा रहा है कि यह विद्यालय शैक्षणिक सत्र 2026-27 से प्रारंभ होगा। प्रारंभिक चरण में केंद्रीय विद्यालय का संचालन यात्री निवास भवन में अस्थायी रूप से किया जाएगा। इसके लिए जरूरी सुविधाएं और शैक्षणिक व्यवस्थाएं की जा रही हैं, ताकि विद्यार्थियों को किसी प्रकार की असुविधा न हो और उन्हें गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का माहौल मिल सके। प्रशासनिक स्तर पर विद्यालय संचालन से जुड़ी तैयारियों को तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है।
स्थायी भवन का होगा निर्माण
अस्थायी संचालन के साथ-साथ भविष्य में केंद्रीय विद्यालय के लिए स्थायी भवन निर्माण की प्रक्रिया भी नियमानुसार आगे बढ़ाई जाएगी। इसके लिए भूमि चयन और अन्य औपचारिकताओं को लेकर संबंधित विभागों के बीच समन्वय किया जा रहा है। स्थायी भवन बनने के बाद विद्यालय को आधुनिक सुविधाओं से लैस किया जाएगा।
शिक्षा का एक नया विकल्प खुलेगा
केंद्रीय विद्यालय की स्थापना से मैहर सहित आसपास के ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के छात्रों को केंद्रीय शिक्षा प्रणाली का लाभ मिलेगा। विशेष रूप से केंद्र सरकार के कर्मचारियों अर्धसैनिक बलों सुरक्षा बलों के बच्चों के लिए यह विद्यालय बड़ी राहत साबित होगा। साथ ही स्थानीय विद्यार्थियों के लिए भी गुणवत्ता-युक्त शिक्षा का एक नया विकल्प खुलेगा।

पहले चरण में कक्षा 1 से 5 तक पढ़ाई
शुरुआत में केंद्रीय विद्यालय मैहर में कक्षा 1 से कक्षा 5 तक की पढ़ाई कराई जाएगी। प्रत्येक कक्षा के लिए एक-एक सेक्शन संचालित होगा। इससे प्राथमिक स्तर के विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षक, अनुशासित माहौल और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सकेगी। आने वाले समय में संसाधनों और आवश्यकताओं के अनुसार उच्च कक्षाओं की शुरुआत भी की जा सकती है।