डोभाल ने युवाओं को राष्ट्र की इच्छाशक्ति और नेतृत्व की ताकत का महत्व समझाते हुए कहा- इतिहास ने हमें तब सबक सिखाया जब हम इन खतरों के प्रति उदासीन रहे। डोभाल ने युवाओं से सवाल करते हुए कहा- क्या हमने वह सबक सीखा। क्या हम उसे याद रखेंगे।

विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग 2.0 शनिवार से शुरू हो गया है।
नई दिल्ली। स्टार समाचार वेब
इच्छाशक्ति को बढ़ाया जा सकता है। वही इच्छाशक्ति आगे चलकर राष्ट्रीय शक्ति बनती है। युद्ध असल में किसी राष्ट्र की इच्छा शक्ति के लिए लड़े जाते हैं। युद्ध किसी को मारने या विनाश का आनंद लेने के लिए नहीं लड़े जाते, बल्कि किसी देश का मनोबल तोड़ने के लिए लड़े जाते हैं ताकि वह दूसरे की शर्तों पर झुक जाए। यह बात भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल ने आज शनिवार को विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग के उद्घाटन समारोह के दौरान कही। विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग 2.0 शनिवार से शुरू हो गया है और यह 12 जनवरी तक नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित किया जाएगा। डोभाल ने युवाओं को राष्ट्र की इच्छाशक्ति और नेतृत्व की ताकत का महत्व समझाते हुए कहा- इतिहास ने हमें तब सबक सिखाया जब हम इन खतरों के प्रति उदासीन रहे। डोभाल ने युवाओं से सवाल करते हुए कहा- क्या हमने वह सबक सीखा। क्या हम उसे याद रखेंगे। अगर आने वाली पीढ़ियां उस सबक को भूल गईं, तो यह इस देश के लिए सबसे बड़ी त्रासदी होगी।
इसलिए मजबूत नेतृत्व जरूरी
डोभाल ने कहा-आज दुनिया में जो भी युद्ध और संघर्ष हो रहे हैं, वे इसलिए हैं क्योंकि कुछ देश अपनी इच्छा दूसरों पर थोपना चाहते हैं। यदि कोई देश इतना शक्तिशाली हो कि उसका कोई विरोध न कर सके, तो वह हमेशा स्वतंत्र बना रहता है, लेकिन यदि किसी देश के पास संसाधन और हथियार तो हों, पर मनोबल न हो, तो सब कुछ बेकार हो जाता है। इसके लिए मजबूत नेतृत्व जरूरी है।
पीएम की मेहनत सबके लिए प्रेरणा
डोभाल ने पीएम मोदी की तारीफ करते हुए कहा-देश आज सौभाग्यशाली है कि उसके पास ऐसा नेतृत्व है, जिसने बीते 10 वर्षों में भारत को प्रगति के मार्ग पर तेजी से आगे बढ़ाया है। पीएम के नेतृत्व की प्रतिबद्धता, मेहनत और समर्पण हम सभी के लिए प्रेरणा है। भारत की आजादी बहुत बड़ी कीमत चुकाकर हासिल हुई है, जिसमें पीढ़ियों तक भारतीयों को अपमान, विनाश और भारी नुकसान झेलना पड़ा।
मंदिरों को लूटा, हम मूक दर्शक बने रहे
एनएसए ने युवाओं से आह्वान करते हुए कहा- इतिहास से प्रेरणा लें, उससे शक्ति प्राप्त करें और अपने मूल्यों, अधिकारों और विश्वासों पर आधारित एक सशक्त और महान भारत के निर्माण के लिए काम करें। आज का स्वतंत्र भारत हमेशा इतना स्वतंत्र नहीं था जितना आज दिखाई देता है। हमारे पूर्वजों ने इसके लिए असाधारण बलिदान दिए। उन्होंने गहरे अपमान और बेबसी के दौर झेले। कई लोगों को फांसी पर चढ़ना पड़ा। हमारे गांव जला दिए गए, हमारी सभ्यता को नष्ट किया गया और हमारे मंदिरों को लूटा गया, जबकि हम मूक दर्शक बने रहे।
हर युवा के भीतर भारत के लिए होनी चाहिए आग
राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार ने कहा-यह इतिहास आज के हर भारतीय युवा के सामने एक चुनौती रखता है, जिसके भीतर इस देश के लिए आग होनी चाहिए। बदला शब्द भले आदर्श न लगे, लेकिन बदला अपने आप में एक शक्तिशाली ताकत है। हमें अपने इतिहास का बदला लेना है और इस देश को वहां तक वापस ले जाना है, जहां हम अपने अधिकारों, अपने विचारों और अपने विश्वासों के आधार पर एक महान भारत का निर्माण कर सकें।


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