याचिकाकर्ता दर्पण अवस्थी ने इससे पहले मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में भी याचिका दायर करते हुए वीआपी दर्शन पर रोक लगाने की मांग की थी। मगर, हाईकोर्ट ने भी याचिका खारिज कर दी थी, जिसे अब सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी।
By: Arvind Mishra
Jan 27, 20261:43 PM

भोपाल/नई दिल्ली। स्टार समाचार वेब
उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में वीआईपी दर्शन पर रोक लगाने की लंबे समय से मांग हो रही है। इसे लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई थी, लेकिन कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी है। सुप्रीम कोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए दो टूक शब्दों में कहा- किसी भी मंदिर में वीआईपी दर्शन होंगे या नहीं, इसका फैसला करने का अधिकार अदालत को नहीं है। इस तरह की याचिका को बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट में सीजेआई सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन जजों की बेंच ने ये फैसला सुनाया है। जस्टिस महादेवन और जस्टिस जॉयमाला बागची भी इस बेंच का हिस्सा थे। याचिकाकर्ता दर्पण अवस्थी ने इससे पहले मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में भी याचिका दायर करते हुए वीआपी दर्शन पर रोक लगाने की मांग की थी। मगर, हाईकोर्ट ने भी याचिका खारिज कर दी थी, जिसे अब सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी।
वीआईपी दर्शन पर उठाए सवाल
याचिकाकर्ता का कहना था कि उज्जैन के महाकल मंदिर के गर्भगृह में वीआईपी लोगों को आसानी से एंट्री मिल जाती है। वो महाकाल शिवलिंग पर जल चढ़ाकर पूजा-पाठ भी करते हैं, लेकिन आम जनता को इसका अधिकार नहीं है। उन्हें दूर से ही दर्शन करके वापस लौटना पड़ता है, जो पूरी तरह से गलत है। कोर्ट में याचिकाकर्ता का पक्ष रखते हुए वकील विष्णु शंकर जैन ने कहा कि गर्भगृह में सभी के लिए नियम समान होने चाहिए। ये अनुच्छेद 14 का उल्लंघन है।
सीजेआई ने कहा-जिम्मेदार लोग ही लेंगे फैसला
सीजेआई सूर्यकांत ने वकील के तर्कों पर टिप्पणी करते हुए कहा-गर्भगृह में किसे जाना चाहिए और किसे नहीं, इसका फैसला अदालत नहीं कर सकती है। हम न्याय की बात कर रहे हैं। हो सकता है ये न्याय का मामला हो, लेकिन इस पर जिम्मेदार लोग ही फैसला ले सकते हैं, न कि अदालत। अगर अदालत ये तय करने लगे कि मंदिर में कौन जाएगा और कौन नहीं, तो कोर्ट का भार बहुत बढ़ जाएगा।
आज 14 तो कल अनुच्छेद 19 की भी मांग होगी
सीजेआई सूर्यकांत ने कहा- अगर अनुच्छे 14 की बात हो रही है, तो कल अनुच्छेद 19 की भी मांग होगी। अभी आप गर्भगृह में जाने का अधिकार मांग रहे हैं, कल कहेंगे कि मुझे मंत्र पढ़ना है, क्योंकि अनुच्छेद 19 के तहत हमारे पास बोलने का अधिकार है। इस पर वकील विष्णु शंकर जैन ने कहा-उनकी याचिका भेदभाव पर आधारित है। गर्भगृह में या तो सबकी एंट्री बंद कर देनी चाहिए, या सभी को गर्भगृह में जाने की इजाजत होनी चाहिए। कुछ चुनिंदा लोगों को खास तवज्जो देना गलत है।