इंदौर में MPPSC अभ्यर्थियों ने न्याय यात्रा 2.0 के तहत धरना शुरू किया है। हाईकोर्ट की अनुमति से 4 दिन चलने वाले इस प्रदर्शन में इंटरव्यू अंक कम करने और पद बढ़ाने की मांग प्रमुख है। पढ़ें पूरी खबर।
By: Star News
Jan 25, 20265:39 PM
इंदौर: स्टार समाचार वेब
मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (MPPSC) के बाहर एक बार फिर प्रदेश के युवाओं ने हुंकार भरी है। शनिवार देर रात से नेशनल एजुकेटेड यूथ यूनियन (NEYU) के बैनर तले सैकड़ों अभ्यर्थी आयोग के मुख्य द्वार पर डटे हुए हैं। कड़ाके की ठंड के बावजूद छात्र-छात्राओं ने अलाव और बिस्तरों के साथ आयोग के बाहर ही रात बिताई। यह आंदोलन 'न्याय यात्रा 2.0' के तहत अपनी 10 सूत्री मांगों को लेकर किया जा रहा है।
इस आंदोलन की खास बात यह है कि अभ्यर्थियों ने इस बार कानूनी सुरक्षा के साथ सड़क पर उतरने का फैसला किया है। NEYU संयोजक राधे जाट ने बताया कि हाईकोर्ट की इंदौर पीठ (WP-3025-2026) ने संविधान के अनुच्छेद 19 के तहत उन्हें शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अनुमति दी है। कोर्ट के आदेश के बाद ही प्रदेश भर के छात्र और कोचिंग संस्थानों से जुड़े युवा इंदौर पहुंचे हैं।
छात्रों का आरोप है कि दिसंबर 2024 में हुए आंदोलन के दौरान प्रशासन ने झूठे आश्वासन दिए थे। 13 महीने बीत जाने के बाद भी केवल दो मांगें (निगेटिव मार्किंग और इंटरव्यू से सरनेम हटाना) ही मानी गई हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उनकी 90% मांगें अभी भी लंबित हैं, जिसके कारण उन्हें दोबारा सड़कों पर रात बिताने को मजबूर होना पड़ रहा है।
अभ्यर्थियों की सबसे प्रमुख मांग राज्य सेवा परीक्षा के इंटरव्यू अंकों को 185 से घटाकर 100 करने की है। छात्रों का तर्क है कि साक्षात्कार के अधिक अंक होने से चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता प्रभावित होती है और पक्षपात की गुंजाइश बनी रहती है।
आंदोलनकारियों ने पदों की संख्या पर भी सवाल उठाए हैं। छात्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री के वादों के विपरीत केवल 156 पदों पर भर्ती निकाली गई है। वहीं, पिछली बार शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने पर छात्रों पर दर्ज की गई FIR को भी वापस लेने की मांग की जा रही है। रविवार सुबह तक आयोग का कोई भी अधिकारी छात्रों से संवाद करने नहीं पहुँचा था।