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जो बालासाहेब नहीं कर पाए, वो फडणवीस ने कर दिखाया, हमें एक कर दिया  

महाराष्ट्र में हिंदी को लेकर जारी विवाद के बीच उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे ने मराठी एकता पर शनिवार को मुंबई के वर्ली डोम में रैली की। इसे विजय रैली नाम दिया गया। इसमें कांग्रेस शामिल नहीं हुई है। यह रैली किसी भी झंडे या पार्टी के बैनर तले नहीं की गई।

By: Arvind Mishra

Jul 05, 20252:23 PM

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जो बालासाहेब नहीं कर पाए, वो फडणवीस ने कर दिखाया, हमें एक कर दिया  

  • विजय रैली: दो दशक बाद एक मंच पर आए राज और उद्धव ठाकरे, कहा

  • सरकारें आती-जाती रहेंगी...लेकिन मराठी भाषा से नहीं होगा कोई समझौता 

  • मुंबई। स्टार समाचार वेब 

    महाराष्ट्र में हिंदी को लेकर जारी विवाद के बीच उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे ने मराठी एकता पर शनिवार को मुंबई के वर्ली डोम में रैली की। इसे विजय रैली नाम दिया गया। इसमें कांग्रेस शामिल नहीं हुई है। यह रैली किसी भी झंडे या पार्टी के बैनर तले नहीं की गई। यह दो दशक बाद पहला अवसर है, जब दोनों बुंध एक मंच पर साथ नजर आए हैं। इस मौके पर राज ठाकरे ने कहा-मैंने कहा था कि झगड़े से बड़ा महाराष्ट्र है। 20 साल बाद हम एक मंच पर आए हैं, आपको दिख रहे हैं। हमारे लिए सिर्फ महाराष्ट्र और मराठी एजेंडा है, कोई राजनीतिक एजेंडा नहीं है। सरकारें आती-जाती रहेंगी। गठबंधन बनते-बिगड़ते रहेंगे, लेकिन मराठी भाषा और संस्कृति के मुद्दे पर कोई समझौता नहीं होगा। यही बालासाहेब का सपना था और यही हमारी प्रतिबद्धता है। राज ठाकरे ने कहा कि जो बाला साहेब ठाकरे नहीं कर पाए, जो और कोई नहीं कर पाया, वो देवेंद्र फडणवीस ने कर दिखाया, हमें एक कर दिया। आपके पास विधान भवन में ताकत है, लेकिन हमारे पास सड़कों पर ताकत है। राज ठाकरे ने बिना किसी का नाम लिए स्पष्ट रूप से कहा कि मुंबई को महाराष्ट्र से अलग करने की जो कोशिश की जा रही है, वह कभी कामयाब नहीं होगी। अगर किसी ने मुंबई पर हाथ डालने की हिम्मत की, तो मराठी मानुष का असली बल देखेगा। वहीं उद्धव ठाकरे ने कहा-हम साथ आए हैं, हम साथ रहेंगे। हम साथ रहने के लिए ही साथ आए हैं। हमारी ताकत हमारी एकता में है, जब भी कोई चुनौतीपूर्ण समय आता है, हम सभी एक साथ आते हैं, लेकिन हम सभी ने अनुभव किया है कि जब चुनौतीपूर्ण समय बीत जाता है, तो हम सभी अपने निजी हितों के लिए जाते हैं, जो इस बार नहीं होना चाहिए। 

दोगलापन नहीं चलेगा

राज ठाकरे ने केंद्र सरकार पर हमला करते हुए पूछा-अचानक हिंदी पर इतना जोर क्यों दिया जा रहा है। ये भाषा का प्रेम नहीं, बल्कि एजेंडा है। हम पर हिंदी थोपने की कोशिश की जा रही है। हम ये बर्दाश्त नहीं करेंगे। जब हमारे बच्चे इंग्लिश मीडियम में पढ़ते हैं तो हमारे मराठीपन पर सवाल उठते हैं, लेकिन जब भाजपा नेताओं ने मिशनरी स्कूलों में पढ़ाई की, तब उनके हिंदुत्व पर किसी ने उंगली नहीं उठाई। ये दोगलापन नहीं चलेगा।

बालासाहेब ने मराठी नहीं छोड़ी

राज ठाकरे ने कहा कि बालासाहेब ठाकरे और उनके पिता श्रीकांत ठाकरे भी इंग्लिश मीडियम से पढ़े थे, लेकिन मराठी को कभी नहीं छोड़ा। उन्होंने बालासाहेब से जुड़ा एक पुराना किस्सा सुनाया, जब 1999 में भाजपा शिवसेना सरकार बनने की संभावना थी और भाजपा नेता सुरेश जैन को मुख्यमंत्री बनाने की बात लेकर बालासाहेब से मिलने पहुंचे थे। बालासाहेब ने तब स्पष्ट कह दिया था कि महाराष्ट्र का मुख्यमंत्री सिर्फ मराठी मानुष ही होगा।

अब ये जाति की राजनीति शुरू करेंगे

राज ठाकरे ने दक्षिण भारत का उदाहरण देते हुए कहा-स्टालिन, कनीमोझी, जयललिता, एन लोकेश, एआर रहमान, सूर्या, सब इंग्लिश मीडियम से पढ़े हैं। क्या कोई उनका तमिल प्रेम कम समझता है। रहमान तो एक बार हिंदी में भाषण सुनकर मंच ही छोड़कर चले गए थे। कल को मैं हिब्रू भाषा सीख लूं, तो किसी को क्या दिक्कत है। दक्षिण भारत से सीखो, उन्होंने अपनी भाषा के लिए एकजुटता दिखाई। दक्षिण भारत में तमिल और तेलुगु भाषाओं को लेकर लोगों ने एकजुटता दिखाई, लेकिन महाराष्ट्र में लोगों को बांटने की कोशिश हो रही है। महाराष्ट्र एक हो गया है, अब ये लोग जाति की राजनीति शुरू करेंगे। ताकि मराठी भाषा के लिए बनी एकता टूट जाए। राज ठाकरे ने भारतीय सेना का उदाहरण देते हुए कहा-सेना में मराठा रेजिमेंट है, बिहार रेजिमेंट है, नागा रेजिमेंट है। सब अलग हैं, लेकिन जब युद्ध होता है, तो एकजुट होकर भारत के लिए लड़ते हैं। मराठी समाज को भी उसी तरह एकजुट रहना चाहिए।

मीरा रोड की घटना को तूल देना गलत

राज ठाकरे ने हाल ही की मीरा रोड की घटना का जिक्र करते हुए कहा-अगर झगड़े में किसी को थप्पड़ मारा गया और वो गुजराती निकला तो क्या करें। क्या माथे पर लिखा होता है कि वो कौन है। बिना वजह किसी पर हाथ मत उठाओ, लेकिन कोई ज्यादा करे, तो चुप भी मत बैठो। और हां, मारपीट के वीडियो बनाना बंद करो। बिना वजह किसी को मत मारो, लेकिन अगर कोई गलती करता है, तो उसे सबक भी सिखाओ। उन्होंने कहा कि मेरे कई गुजराती दोस्त हैं जो मराठी से प्रेम करते हैं। मैं एक गुजराती को गुज-राठी कहता हूं, क्योंकि वो दिल से मराठी से जुड़ा है। यहां मेरे भाषण सुनने वाले कई गुजराती मित्र भी हैं।

उद्धव ठाकरे ने कहा-तो हां, हम गुंडा हैं...

उद्धव ठाकरे ने कहा-जब से हमने इस कार्यक्रम की घोषणा की थी, तब से सभी को आज हमारे भाषण का बेसब्री से इंतजार था, लेकिन मेरे विचार से हम दोनों का एक साथ आना और यह मंच हमारे भाषणों से ज्यादा महत्वपूर्ण था। उद्धव ने कहा-शिवसेना पहले ही हमारा काफी इस्तेमाल कर चुकी है। अगर आपको बालासाहेब ठाकरे का समर्थन नहीं था, तो महाराष्ट्र में आपको कौन जानता था। आप हमें हिंदुत्व के बारे में सिखाने वाले कौन होते हैं। जब मुंबई में दंगे हो रहे थे, तब हम मराठी लोगों ने महाराष्ट्र के हर हिंदू को बचाया था, चाहे वह कोई भी हो। अगर आप मराठी लोगों को गुंडा कह रहे हैं जो अपना विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं, न्याय मांग रहे हैं। तो हां, हम गुंडा हैं। 

एक निशान तिरंगा है, न कि भाजपा का झंडा

उद्धव ठाकरे ने कहा-जब भाजपा कहती है कि उन्हें एक संविधान, एक निशान और एक प्रधानमंत्री चाहिए, तो उन्हें याद रखना चाहिए कि एक निशान तिरंगा है, न कि भाजपा का झंडा, जो बर्तन साफ करने के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला कपड़े का टुकड़ा है। वे हमेशा हमसे पूछते हैं कि हमने बीएमसी में अपने शासन के दौरान मुंबई में मराठी लोगों के लिए क्या किया। अब हम सवाल पूछ रहे हैं- आपके शासन के पिछले 11 वर्षों में आपने क्या किया है। आपने मुंबई के महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों को गुजरात में धकेल दिया है। कारोबार गुजरात में स्थानांतरित हो रहे हैं। बड़े कार्यालय गुजरात जा रहे हैं। हीरा व्यवसाय पहले ही गुजरात में स्थानांतरित हो चुका है, इसलिए आपने महाराष्ट्र की रीढ़ तोड़ने की पूरी कोशिश की है और ऐसा करना जारी रखा है, और आप हमसे सवाल पूछ रहे हैं। 

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