चित्रकूट के जंगलों में कोयल की बदली आवाज ने जिज्ञासा बढ़ाई है। विशेषज्ञों के अनुसार टिस-टिस की ध्वनि फीमेल कोयल की है, जबकि सुरीली आवाज मेल कोयल की होती है।

हाइलाइट्स
सतना, स्टार समाचार वेब
चित्रकूट के जंगलों की विविधता में एक नई बात सामने आई है। यहां जो कोयल इस समय चहक रहीं हैं उनकी आवाज बदली-बदली है। जानकार इसे अलग प्रजाति का मान रहे हैं तो कुछ वातावरणीय परिवर्तन को वजह मानते हैं।
जानकारी के मुताबिक चित्रकूट के जंगलों और कस्बे में इन दिनों कोयल की आवाज में बदलाव सुनाई पड़ रहा है या फिर कोयल ही बदली हुई है इस बात को लेकर जानकारों में चर्चा का विषय है। ग्रामोदय विश्वविद्यालय के डॉ. रवि चौरे ने बताया कि कोयल की आवाज सामान्य तौर पर टूंहू...टूंहू...टूंहू.. की होती है लेकिन इस समय जो कोयल देखने में आ रही है वह टिस..टिस..टिस की आवाज निकाल रही है। वह बताते हैं कि जो कोयल टिस..टिस की आवाज निकाल रही है वह असल में फीमेल कोयल बर्ड है। इस पर पक्षी विज्ञान विशेषज्ञ डॉ अर्चना शुक्ला बताती हैं कि कोयल बर्ड्स के लिए यह समझना जरुरी है कि उनके भी मेल-फीमेल हैं जिसमें से फीमेल कोयल बर्ड की आवाज कर्कश होती है। यही वजह है कि उसकी आवाज बदली होगी।
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गाना गाता है मेल
कोयल की आवाज को लेकर मचे कौतूहल को लेकर यह भी स्पष्ट है कि मेल और फीमेल आवाज बदली होती है। सुरीली आवाज मेल कोयल होती है जबकि कर्कश ध्वनि फीमेल की होती है। डॉ. शुक्ला बताती है कि कोयल का आवाज को लेकर हर कोई कन्फ्यूज होता है लेकिन यह साफ होना चाहिए कि फीमेल की आवाज अच्छी नहीं लेकिन मेल बर्ड की ध्वनि कर्ण प्रिय होती है इसलिए यह भ्रम दूर करें कि कोयल गाती है यह कहिए कोयल गाता है।
चातक-पपीहा मान लेते हैं
कोयल के मेल और फीमेल बर्ड्स को लेकर कन्फ्यूजन इस कदर है कि लोग कोयल की फीमेल को देख कर लोग पपीहा और चातक मान बैठते हैं। यही कारण है कि चित्रकूट में इन दिनों कोयल की टिस टिस की आवाज को लेकर कौतूहल बना हुआ है।
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क्या क्या ठीक
1. किंगफिशर और कठफोड़वा का बेहतर रहवास बना
2. रंगीन चोंच वाले तोतों का बसेरा
3. नाइट एंगल नामक पक्षी के झुंड
यहां सोचने की जरूरत
1. जोड़ें की जगह सिंगल नजर आ रहा नीलकंठ
2. टिटिहरी भी कम आने लगी नजर
3. कौआ की संख्या में भी आई कमी


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