संसद में आज पेश किया गया आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए उम्मीद और सावधानी का मिला-जुला संदेश लेकर आया है।
By: Ajay Tiwari
Jan 29, 20267:40 PM
नई दिल्ली स्टार समाचार
संसद में आज पेश किया गया आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए उम्मीद और सावधानी का मिला-जुला संदेश लेकर आया है। एक तरफ जहां भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बना हुआ है, वहीं दूसरी तरफ वैश्विक बाजार की अस्थिरता और घरेलू बाजार के समीकरणों ने सरकार के सामने कुछ चुनौतियां पेश की हैं। वित्त वर्ष 2025-26 के लिए विकास दर का अनुमान 6.8% से 7.2% के बीच रखा गया है, जो यह दर्शाता है कि भारत की बुनियादी आर्थिक स्थिति काफी मजबूत है।
सर्वेक्षण में महंगाई को लेकर दोतरफा तस्वीर दिखाई गई है। अच्छी खबर यह है कि अच्छी मानसूनी बारिश और बंपर पैदावार के चलते खाद्य वस्तुओं की कीमतें नियंत्रण में रहने की उम्मीद है। साथ ही, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट भारत के लिए राहत का बड़ा कारण बनेगी। हालांकि, रुपया कमजोर होने की वजह से ‘इम्पोर्टेड इन्फ्लेशन’ (आयातित मुद्रास्फीति) का खतरा बना हुआ है। सोना, चांदी और तांबे जैसी धातुओं की बढ़ती कीमतें ‘कोर इन्फ्लेशन’ पर दबाव डाल सकती हैं। इसके बावजूद, यह अनुमान लगाया गया है कि औसत महंगाई दर आरबीआई के निर्धारित दायरे के भीतर ही बनी रहेगी।
भारतीय व्यापार जगत के लिए भारत-यूरोपीय संघ के बीच हुआ मुक्त व्यापार समझौता एक बड़ा मोड़ साबित होने वाला है। इस समझौते के तहत यूरोपीय कारों पर आयात शुल्क को 110% से घटाकर महज 10% करने का प्रस्ताव है। इसका सीधा असर ऑटो सेक्टर पर पड़ेगा, जहां टाटा मोटर्स और महिंद्रा जैसी दिग्गज कंपनियों को अब लक्जरी सेगमेंट में यूरोपीय ब्रांड्स से कड़ी प्रतिस्पर्धा मिलेगी। सिर्फ ऑटो ही नहीं, बल्कि वाइन इंडस्ट्री पर भी इसका असर दिखेगा। सस्ती यूरोपीय वाइन के बाजार में आने से ‘सुला विनयार्ड्स’ जैसी घरेलू कंपनियों को अपनी रणनीतियों में बदलाव करना पड़ सकता है।
बढ़ती विकास दर और नियंत्रित महंगाई को देखते हुए बैंकिंग सेक्टर से सकारात्मक खबरें मिल रही हैं। आर्थिक जानकारों का मानना है कि आरबीआई अगली मौद्रिक नीति समीक्षा में रेपो रेट में 0.25% की कटौती कर सकता है। यदि ऐसा होता है, तो यह होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन की ईएमआई (EMI) कम करने में मददगार साबित होगा। यह कटौती इस मौजूदा चक्र की आखिरी कटौती हो सकती है, जिसका मुख्य उद्देश्य मध्यम वर्ग को राहत देना और खपत को बढ़ावा देना है।