सुप्रीम कोर्ट ने UGC के नए 'इक्विटी रेगुलेशंस 2026' पर रोक लगा दी है। जानें क्यों सामान्य वर्ग के छात्र इन नियमों को भेदभावपूर्ण बता रहे हैं और CJI ने ड्राफ्ट सुधारने के क्या निर्देश दिए।
By: Star News
Jan 29, 20263:11 PM
हाइलाइट्स
नई दिल्ली. स्टार समाचार वेब
सुप्रीम कोर्ट ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के 'प्रमोशन ऑफ इक्विटी इन हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशन रेगुलेशंस, 2026' पर अगले आदेश तक रोक लगा दी है। मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या की बेंच ने नियमों के प्रावधानों को अस्पष्ट बताते हुए कहा कि इनका गलत इस्तेमाल होने की संभावना है।
कोर्ट ने यह कदम उन याचिकाओं पर उठाया है जिनमें आरोप लगाया गया है कि ये नियम सामान्य वर्ग (General Category) के छात्रों के साथ भेदभाव करते हैं और उन्हें 'स्वाभाविक अपराधी' के रूप में पेश करते हैं। कोर्ट ने अब केंद्र सरकार और UGC से जवाब मांगा है और नियमों के ड्राफ्ट को फिर से तैयार करने का निर्देश दिया है, जिसकी अगली सुनवाई 19 मार्च को होगी।
UGC के इन नए नियमों का उद्देश्य कॉलेजों में SC, ST और OBC छात्रों के खिलाफ होने वाले जातीय भेदभाव को रोकना था। इसके लिए हेल्पलाइन, निगरानी टीमें और 'इक्विटी स्क्वाड' बनाने का प्रावधान किया गया था। हालांकि, विरोध कर रहे छात्रों और विशेषज्ञों का तर्क है कि भेदभाव की परिभाषा केवल आरक्षित वर्गों तक सीमित कर दी गई है, जिससे सवर्ण छात्र पीड़ित होने के बावजूद शिकायत नहीं कर सकेंगे।
कोर्ट ने जताई चिंता
इसके अलावा, ड्राफ्ट से 'झूठी शिकायत पर सजा' का प्रावधान हटाना और 'इक्विटी कमेटी' में सामान्य वर्ग का प्रतिनिधित्व न होना इसे और अधिक विवादित बनाता है। कोर्ट ने भी चिंता जताई है कि क्या ये नियम रैगिंग और अन्य समुदायों के बीच होने वाले आपसी विवादों को सुलझाने में सक्षम हैं।
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