सतना के पूर्व जिला शिक्षा अधिकारी और वर्तमान रीवा डाइट प्राचार्य टीपी सिंह पर शासन ने 11 लाख 44 हजार 477 रुपए की रिकवरी का आदेश जारी किया है। वर्ष 2010-11 में नियम विरुद्ध बहाली से शासन को आर्थिक नुकसान हुआ। वहीं रामपुर बघेलान क्षेत्र के शासकीय हाई स्कूल में मेंटेनेंस के नाम पर लाखों के गोलमाल के आरोप सामने आए हैं। कलेक्टर को जांच के लिए ज्ञापन सौंपा गया है।

हाइलाइट्स:
सतना, स्टार समाचार वेब
पूर्व जिला शिक्षा अधिकारी और वर्तमान में रीवा डाइट के प्राचार्य टीपी सिंह पर शासन ने 11 लाख 44 हजार 477 रुपए की वसूली का आदेश जारी किया है। यह कार्रवाई वर्ष 2010-11 के विवादित प्रकरण में की गई है। मामला वर्ष 2010 का है, जब टीपी सिंह सतना में प्रभारी डीईओ थे। उस दौरान सहायक शिक्षक राकेश कुमार मिश्रा का प्रकरण न्यायालय में विचाराधीन था। हाईकोर्ट के 4 जनवरी 2010 के आदेश के बाद 1 मई को मिश्रा की सेवाएं समाप्त कर दी थीं, लेकिन 29 अगस्त 2010 को टीपी सिंह ने बिना विभागीय जांच और वरिष्ठ अधिकारियों की अनुमति के उन्हें नियम विरुद्ध बहाल कर दिया। इस बहाली के कारण शासन को मिश्रा को करीब 20 महीने का वेतन देना पड़ा। उस समय लगभग 4 लाख 19 हजार रुपए का भुगतान किया गया, जो ब्याज सहित अब 11 लाख 44 हजार 477 रुपए हो चुका है।
विधानसभा तक गूंजा मामला
यह मामला वर्ष 2018 में विधानसभा तक पहुंचा। संचालनालय ने टीपी सिंह से स्पष्टीकरण मांगा, लेकिन उनका जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया। इसके बाद लोक शिक्षण आयुक्त शिल्पा गुप्ता ने वसूली का आदेश जारी किया। आयुक्त ने स्पष्ट किया कि सिंह ने हाईकोर्ट के आदेश का गलत अर्थ निकालते हुए नियम विरुद्ध बहाली की, जिससे शासन को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा।
उधर मेंटीनेंस के नाम पर लाखों के बेजा भुगतान का आरोप
रामपुर बघेलान क्षेत्र अंतर्गत ग्राम झंड स्थित शासकीय हाई स्कूल भवन के मेंटेनेंस के नाम पर लाखों के गोलमोल का आरोप लगाया गया है। यह आरोप कलेक्टर को दिए ज्ञापन में लगाए गए हैं। शिकायती पत्रमें बताया गया है कि तत्कालीन प्रभारी प्राचार्य सौखी लाल साकेत ने शाला विकास के लिए तीन लाख रुपए की राशि तो निकाल ली लेकिन इसे खर्च कहां किया गया । आरोप हैं कि कागजी खर्च दिखाकर शिद्धार्थ नगर स्थित मां शारदा इंटरप्राइजेज को कर दिया गया । मिली जानकारी के मुताबिक वाइटवॉश पुताई के नाम पर 1 लाख 22 हजार 758 रुपए 55 पैसे, पेंटिंग एवं दरवाजे और खिड़कियों के नाम पर मेंटेनेंस में 25 हजार 740 रुपए 75, कनेक्टिंग एवं फिनिशिंग के लिए 88 हजार 272 रुपए, नए दरवाजे एवं खिड़की लगवाने के नाम पर 20 हजार 400 रुपए, बाथरूम रिपेयरिंग के लिए 8251 रुपए 84 पैसे, प्लंबर के लिए 10 हजार 338 रुपए तथा लाइट रिपेयरिंग एवं मटेरियल के नाम पर 24000 रुपए की राशि निकाली गई है, लेकिन विद्यालय में इन्हें कहीं लगाया नहीं गया है। आम लोगों ने जिला कलेक्टर को शिकायत कर इस कागजी घोटाले की जांच उच्च स्तरीय समिति बनवाकर कराने की मांग की है। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2024 में जिले के 100 विद्यालयों के मेंटेनेंस के लिए प्रत्येक विद्यालय को 3 लाख रुपए की राशि दी गई थी जिसका भुगतान मां शारदा इंटरप्राइजेज सिद्धार्थ नगर को किया गया। उक्त सभी मटेरियल की कीमत बाजार मूल्य से अधिक दर्शार्ई गई है जबकि विद्यालय भवन की हालत पहले जैसे ही जर्जर है। ज्ञापन में तत्कालीन जिला शिक्षा अधिकारी नीरव दीक्षित और अन्य सभी विद्यालयों के प्राचार्य की भूमिका की जांच की मांग उठाई गई है। बताया गया कि उस दौरान 100 विद्यालयों के मेंटेनेंस का कार्य उनके द्वारा स्वयं कराया एवं स्वयं ही बिल का भुगतान किया गया था।


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