महालक्ष्मी व्रत 2026 के अवसर पर हाथी पूजन का क्या महत्व है और पूजा कैसे की जाती है? जानिए शुभ मुहूर्त, विधि और इससे जुड़ी खास बातें।

धर्म डेस्क। स्टार समाचार वेब
श्राद्ध पक्ष की अष्टमी तिथि के दौरान महालक्ष्मी व्रत करने की परंपरा काफी पुरानी और महत्वपूर्ण मानी जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस विशेष दिन पर हाथी पर विराजमान देवी लक्ष्मी की पूजा की जाती है। चूंकि इस दिन मां लक्ष्मी के साथ-साथ हाथी (गजराज) की भी विशेष पूजा होती है, इसलिए इस व्रत को 'हाथी पूजन' के नाम से भी जाना जाता है। इस वर्ष महालक्ष्मी व्रत 3 अक्टूबर, शनिवार को रखा जाएगा। ऐसी गहरी मान्यता है कि इस व्रत को विधि-विधान से करने पर घर-परिवार में सुख-समृद्धि, स्थिरता और खुशहाली का हमेशा वास रहता है।
पहला मुहूर्त: सुबह 11:52 बजे से दोपहर 12:39 बजे तक
दूसरा मुहूर्त: दोपहर 12:15 बजे से दोपहर 1:44 बजे तक
तीसरा मुहूर्त: दोपहर 3:12 बजे से शाम 4:40 बजे तक
महालक्ष्मी व्रत के दौरान पूजा की एक निश्चित प्रक्रिया का पालन किया जाता है। सबसे पहले घर में विधि-विधान से देवी लक्ष्मी की पूजा संपन्न की जाती है, और इसके तुरंत बाद हाथी की पूजा का विधान पूरा किया जाता है। पूजा के लिए बाजार से मिट्टी से बनी हाथी की प्रतिमा लाई जाती है। हाथी को कुमकुम से तिलक लगाकर चावल और अबीर-गुलाल जैसी पूजन सामग्रियां एक-एक करके अर्पित की जाती हैं। इसके बाद फूलों की माला पहनाकर शुद्ध घी का दीपक प्रज्वलित किया जाता है।
इस विशेष व्रत में हाथी को हल्दी लगी हुई दूर्वा अर्पित करने का अत्यधिक महत्व माना गया है। इसके अलावा, हाथी पूजन के लिए घर पर ही बेसन से छोटे-छोटे हार, बाजूबंद और अन्य आभूषण तैयार किए जाते हैं, जिन्हें हाथी की प्रतिमा को अर्पित किया जाता है। अंत में 16 दीपक जलाकर मां लक्ष्मी और हाथी की आरती की जाती है। पूजा संपन्न होने के बाद हाथी की इस प्रतिमा को किसी पवित्र नदी में प्रवाहित कर दिया जाता है।
पौराणिक कथाओं और ग्रंथों के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान मां लक्ष्मी के साथ कई दिव्य वस्तुएं और जीव प्रकट हुए थे, जिनमें देवराज इंद्र के दिव्य हाथी 'ऐरावत' का नाम भी शामिल है। इसी कारण से हाथी को सीधे तौर पर देवी लक्ष्मी, वैभव और ऐश्वर्य से जुड़ा हुआ माना गया है। धार्मिक परंपराओं में गजराज को शक्ति, स्थिरता और अपार संपन्नता का प्रतीक माना जाता है। महालक्ष्मी व्रत के अवसर पर हाथी की पूजा करने से भक्तों को मां लक्ष्मी की विशेष कृपा प्राप्त होती है और घर-परिवार में धन-धान्य की कभी कोई कमी नहीं होती।
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