सफेद बाल या ग्रे हेयर उम्र बढ़ने, तनाव और लाइफस्टाइल की वजह से जल्दी दिखने लगे हैं। बालों को कलर करने के लिए बाजार में तमाम तरह के हेयर कलर मिलते हैं। केमिकल हेयर कलर से बाल जल्दी काले तो लगते हैं, लेकिन इनके इस्तेमाल से बाल कमजोर और रूखे हो जाते हैं।
हमारे देश में एक बड़ी आबादी को चाय पीना बहुत पसंद है। चाय एक ऐसी पेय है जिसे अधिकतर लोग गर्मा-गर्म ही पीना चाहते हैं। अक्सर कुछ लोग बचे हुए चाय को गर्म करके पीते हैं। समय बचाने के लिए या चाय बर्बाद न हो, इस सोच के साथ सुबह की बची हुई चाय को दोपहर या शाम को फिर से गर्म कर लेते हैं।
जीवन में 40 की उम्र क्रॉस करना हमारे स्वास्थ्य के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण मोड़ होता है। इस उम्र के बाद शरीर का मेटाबॉलिज्म धीमा होने लगता है, मांसपेशियों का नुकसान शुरू होता है और पुरानी बीमारियों के उभरने का जोखिम भी तेजी से बढ़ जाता है।
दांतों में झनझनाहट होना एक आम समस्या है, जिससे लगभग सभी लोग कभी न कभी जरूर दो चार होते हैं। अक्सर ऐसा होता है कि जब लोग ठंडा पानी, गर्म चाय, या यहां तक कि मीठी चीजें खाते ही दांतों में तेज और अचानक दर्द महसूस होती है
सर्दियों में अक्सर लोग डिहाइड्रेशन की समस्या को नजरअंदाज कर देते हैं। अधिकांश लोगों को लगता है कि चूंकि ठंड में पसीना नहीं आता, इसलिए उन्हें कम पानी पीने की जरूरत है। यह एक बड़ी गलती है!
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में मानसिक तनाव एक बड़ी चुनौती है, और अक्सर लोग इसे कम करने के लिए तुरंत समाधान खोजते हैं।
सर्दियों के दिनों में कड़ाके की ठंड से बचने के लिए अक्सर कुछ लोग गर्म पानी से नहाना पसंद करते हैं। हालांकि यह आदत उस समय तो राहत देती है, लेकिन यह आपके स्वास्थ्य, खासकर त्वचा और हृदय को गंभीर नुकसान पहुंचा सकती है।
बेहद कम उम्र में आजकल लोग बालों के सफेद होने और स्किन की समस्याओं से जूझ रहे हैं। बालों के सफेद होने के बाद उन्हें रंगने के लिए तमाम प्रोडक्ट बहद कम दामों में बाजार में मिल जाते हैं, लेकिन अगर एक बार चेहरे पर झुर्रियां आ जाएं तो उनसे निपटना काफी मुश्किल हो जाता है।
दिल्ली एनसीआई में इन दिनों वायु प्रदूषण अपने चरम पर है। कुछ जगहों पर तो एक्यूआई कई दिनों से 300 से 400 के बीच ही बना हुआ है। जाहिर है इस प्रदूषण का खराब असर हमारे स्वास्थ्य पर पड़ता है।
सर्वाइकल कैंसर महिलाओं में होने वाला एक गंभीर रोग है, जो गर्भाशय ग्रीवा में शुरू होता है। इस कैंसर का मुख्य कारण ह्यूमन पैपिलोमावायरस (एचपीवी) नामक यौन संचारित संक्रमण है।






















