भारत आधिकारिक तौर पर अमेरिका के 'पैक्स सिलिका' गठबंधन का हिस्सा बन गया है। जानें क्या है यह 10 देशों का रणनीतिक समूह और कैसे यह AI, सेमीकंडक्टर और खनिज सप्लाई चेन को बदलेगा

भारत आधिकारिक तौर पर अमेरिका के 'पैक्स सिलिका' गठबंधन का हिस्सा बन गया है
नई दिल्ली/वाशिंगटन। स्टार समाचार वेब
भारत ने तकनीक और सुरक्षा के क्षेत्र में एक और मील का पत्थर गाड़ते हुए अमेरिका के नेतृत्व वाले 'पैक्स सिलिका' (Pax Silica) गठबंधन में शामिल होने का निर्णय लिया है। एआई इम्पैक्ट समिट के दौरान केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव और अमेरिकी दूत सर्जियो गोर की उपस्थिति में इस ऐतिहासिक समझौते पर हस्ताक्षर किए गए। भारत अब उन 10 चुनिंदा देशों में शामिल हो गया है जो भविष्य की आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और वैश्विक खनिज सप्लाई चेन की दिशा तय करेंगे।
"पैक्स" शब्द शांति और स्थिरता का प्रतीक है, जबकि "सिलिका" आधुनिक कंप्यूटर चिप्स के आधार को दर्शाता है। यह गठबंधन 21वीं सदी की 'आर्थिक सुरक्षा सहमति' (Economic Security Consensus) है। इसका मुख्य उद्देश्य चीन जैसे देशों पर निर्भरता कम करके भरोसेमंद देशों के बीच एक सुरक्षित टेक-इकोसिस्टम बनाना है।
क्रिटिकल मिनरल्स: लिथियम और कोबाल्ट जैसे खनिजों की सप्लाई सुरक्षित करना, जो बैटरी और चिप्स के लिए अनिवार्य हैं।
AI और सॉफ्टवेयर: सुरक्षित और नैतिक एआई मॉडल विकसित करना।
सेमीकंडक्टर: हाई-टेक फैक्ट्रियों और चिप मैन्युफैक्चरिंग में सदस्य देशों का सहयोग।
इंफ्रास्ट्रक्चर: भरोसेमंद फाइबर ऑप्टिक केबल, डेटा सेंटर और ICT नेटवर्क का निर्माण।
आर्थिक सुरक्षा: संवेदनशील तकनीक को चोरी होने से बचाना और बाजार की गलत प्रथाओं (Market Practices) को रोकना।
जैकब हेल्बर्ग (अमेरिकी अवर सचिव) के अनुसार, यदि 20वीं सदी तेल और स्टील की थी, तो 21वीं सदी कंप्यूटर और एआई की है। भारत इस गठबंधन में शामिल होकर न केवल अपनी तकनीकी क्षमता बढ़ाएगा, बल्कि वैश्विक सप्लाई चेन में एक 'भरोसेमंद पार्टनर' के रूप में अपनी स्थिति मजबूत करेगा। इससे भारत में निवेश बढ़ेगा और चिप निर्माण व एआई रिसर्च में तेजी आएगी। पैक्स सिलिका में भारत का शामिल होना यह दर्शाता है कि अब वैश्विक तकनीक की मेज पर भारत की कुर्सी सुरक्षित है। यह गठबंधन केवल व्यापार नहीं, बल्कि 'तकनीकी संप्रभुता' (Tech Sovereignty) की लड़ाई में एक बड़ी ढाल है।
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