भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) का ऑफर फॉर सेल शानदार प्रतिक्रिया के साथ बंद हुआ। सरकार ने 31,552 करोड़ रुपये जुटाए, जिससे सार्वजनिक शेयरधारिता 10% पहुंच गई।

भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) का बहुप्रतीक्षित ऑफर फॉर सेल (OFS) निवेशकों की जबरदस्त और भारी प्रतिक्रिया के बीच निर्धारित समय से दो दिन पहले ही सफलतापूर्वक बंद हो गया। इस बड़े विनिवेश अभियान के तहत सरकार ने ग्रीन शू विकल्प (Green Shoe Option) का भी पूरा इस्तेमाल किया।
इस रणनीतिक कदम के साथ ही भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) की निर्धारित समय सीमा से काफी पहले ही एलआईसी में सार्वजनिक स्वामित्व (Public Ownership) बढ़कर 10 फीसदी के स्तर पर पहुंच गया है। इस ओएफएस के जरिए कुल 31,552 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि के लिए 82 करोड़ से अधिक शेयरों का निवेशकों के बीच आवंटन किया गया।
ऑफर फॉर सेल (OFS) एक ऐसा पारदर्शी वित्तीय तंत्र है जो किसी शेयर बाजार में सूचीबद्ध (Listed) कंपनी के मौजूदा प्रमोटरों या शेयरधारकों को स्टॉक एक्सचेंज प्लेटफॉर्म के माध्यम से अपने शेयर बेचने की अनुमति देता है।
सरकार की हिस्सेदारी घटी:
एलआईसी के इस मामले में, भारत सरकार ने अपनी विशाल मौजूदा हिस्सेदारी का एक हिस्सा खुले बाजार में बेचा है।
नए शेयरों का सृजन नहीं:
एलआईसी की ओर से बाजार में कोई भी नए शेयर जारी नहीं किए गए हैं और न ही इस पूरी प्रक्रिया से कंपनी को प्रत्यक्ष रूप से कोई वित्तीय लाभ मिलेगा। ओएफएस से प्राप्त होने वाली पूरी राशि सीधे तौर पर केंद्र सरकार के खजाने में जाएगी।
शेयर संख्या अपरिवर्तित:
इसका मतलब यह है कि एलआईसी के कुल शेयरों की कुल संख्या में कोई भी बदलाव नहीं आया है। सरकारी हिस्सेदारी में कमी आई है, जबकि इसके विपरीत खुदरा और आम निवेशकों की कुल शेयरहोल्डिंग में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
इस विनिवेश प्रक्रिया से पहले, केंद्र सरकार के पास एलआईसी में लगभग 96.5 फीसदी की भारी-भरकम हिस्सेदारी थी, जबकि आम जनता और सार्वजनिक निवेशकों के पास मात्र 3.5 फीसदी हिस्सेदारी का स्वामित्व था। यह हालिया हिस्सेदारी बिक्री एलआईसी को तय समय-सीमा से बहुत पहले न्यूनतम सार्वजनिक शेयरहोल्डिंग (MPS) के विनियामक नियमों का पालन करने में अत्यधिक मददगार साबित हुई है।
सेबी की समय-सीमा:
बाजार नियामक सेबी ने एलआईसी को कम से कम 10 फीसदी सार्वजनिक शेयरहोल्डिंग के आंकड़े तक पहुंचने के लिए 16 मई, 2027 तक का पर्याप्त समय दिया था।
राजकोषीय लाभ:
सरकार द्वारा तय किए गए 382 रुपये के फ्लोर प्राइस पर 82.22 करोड़ शेयरों की संपूर्ण बिक्री से सरकार के विनिवेश खजाने में 31,000 करोड़ रुपये से अधिक की भारी राशि सफलतापूर्वक आ गई है।
सरकार की ओर से इस ओएफएस के लिए 382 रुपये प्रति शेयर का फ्लोर प्राइस तय किया गया था, जो कि इस विनिवेश की घोषणा से ठीक पहले के कंपनी के बाजार बंद भाव (428.50 रुपये) से लगभग 10.9 फीसदी कम था।
जैसे ही निवेशकों को यह जानकारी मिली कि एलआईसी के शेयर इस ओएफएस प्रक्रिया के तहत खुले बाजार की तुलना में काफी सस्ते दामों पर मिल रहे हैं, निवेशकों ने खुले बाजार से महंगे शेयर खरीदना बंद कर दिया। नतीजतन, इसका सीधा प्रभाव यह हुआ कि शेयर का बाजार भाव गिरकर ओएफएस के तय मूल्य के करीब आ गया।
इसके अलावा, इस बड़ी शेयर बिक्री की वजह से बाजार में एलआईसी के शेयरों की कुल उपलब्ध आपूर्ति (Supply) लगभग तीन गुना तक बढ़ गई है। अर्थशास्त्र के बुनियादी नियमों के अनुसार, जब अचानक किसी एसेट की सप्लाई बहुत अधिक बढ़ जाती है, तो उसकी कीमतें कुछ समय के लिए बिकवाली और आपूर्ति के दबाव में आ जाती हैं।
भले ही अल्पकालिक रूप से शेयरों पर दबाव देखा गया हो, लेकिन दूसरी ओर एलआईसी का आंतरिक व्यावसायिक प्रदर्शन बेहद मजबूत बना हुआ है। कंपनी ने वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान अपनी नई पॉलिसियों की लाभप्रदता (Profitability) में व्यापक और मजबूत सुधार दर्ज किया है:
नए व्यवसाय का मूल्य (VNB): नए व्यवसाय का कुल मूल्य 41.6 फीसदी की जोरदार तेजी के साथ बढ़कर 14,179 करोड़ रुपये पर पहुंच गया है।
मार्जिन में सुधार: कंपनी का प्रॉफिट मार्जिन पिछले साल के 17.6 फीसदी से सुधरकर अब प्रभावशाली रूप से 21.2 फीसदी हो गया है। इससे स्पष्ट है कि नए प्रीमियम के प्रत्येक रुपये पर कंपनी को अब पहले से अधिक फायदा मिल रहा है।
कुल शुद्ध लाभ: मजबूत परिचालन प्रदर्शन के दम पर कंपनी का कुल शुद्ध लाभ (Net Profit) 19.3 फीसदी की वृद्धि के साथ बढ़कर 57,419 करोड़ रुपये के आंकड़े को पार कर गया है।
भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) का ऑफर फॉर सेल शानदार प्रतिक्रिया के साथ बंद हुआ। सरकार ने 31,552 करोड़ रुपये जुटाए, जिससे सार्वजनिक शेयरधारिता 10% पहुंच गई।
भारतीय घरेलू शेयर बाजार ने आज सकारात्मक शुरुआत की। कच्चे तेल की कीमतों में हल्की गिरावट और रिलायंस इंडस्ट्रीज समेत कुछ बड़ी कंपनियों के शेयरों में खरीदारी के चलते सेंसेक्स और निफ्टी शुरुआती कारोबार में बढ़त के साथ खुले। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 201.43 अंक चढ़कर 78,782.43 पर पहुंच गया।
RBI ने रेपो रेट 5.25% पर बरकरार रखा है। वैश्विक महंगाई और अनिश्चितताओं के चलते लोन और ईएमआई में फिलहाल कोई कटौती नहीं होगी।
वित्त मंत्रालय ने ईपीएफ और ईपीएस के तहत अनिवार्य कवरेज की वेतन सीमा 15,000 से बढ़ाकर 25,000 रुपये करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। जानिए इसके नियम, कंपनियों और सरकार पर पड़ने वाले असर की पूरी जानकारी।
सरकार ने LIC में ऑफर फॉर सेल (OFS) के जरिए 6.5% हिस्सेदारी बेचने का फैसला किया है। इसके लिए फ्लोर प्राइस 382 रुपये प्रति शेयर तय किया गया है। जानिए इससे जुड़ी सभी खास बातें, शेयर बाजार पर असर और पूरी डिटेल।
पश्चिम एशिया में अमेरिका-ईरान के बीच तनाव कम होने का असर शेयर बाजार पर भी दिखा। महीने के दूसरे कारोबारी दिन यानी आज 30 शेयरों वाला बीएसई सेसेंक्स बढ़त के साथ कारोबार करते हुए हरे निशान पर खुला। वहीं, 50 शेयरों वाला एनएसई निफ्टी गिरावट के साथ लाल निशान पर खुला।
3 अगस्त को सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई है। दिल्ली, मुंबई, चेन्नई और भोपाल समेत देश के प्रमुख शहरों में 22 और 24 कैरेट गोल्ड तथा चांदी के ताजा रेट्स की पूरी जानकारी यहाँ देखें।
कारोबारी सप्ताह के पहले दिन आज भारतीय शेयर बाजार मजबूत बढ़त के साथ खुला। वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट और अमेरिका-ईरान तनाव कम होने के संकेतों से निवेशकों का भरोसा बढ़ा।
Gold Silver Price Today 2 August 2026: 2 अगस्त को सर्राफा बाजार में सोना और चांदी स्थिर बने हुए हैं। जानिए 24K, 22K और 18K सोने के साथ 1 किलो चांदी की ताजा कीमतें।
केंद्र सरकार ने राज्यों की वित्तीय स्थिति मजबूत करने और विकास कार्यों को गति देने के लिए 1,09,019 करोड़ रुपए की अतिरिक्त कर हस्तांतरण राशि जारी की है। इसके साथ ही, पीएम-वीबीआरवाई योजना के तहत पहले वर्ष में 72 लाख से अधिक युवाओं को औपचारिक रोजगार मिला है। जानिए पूरी विस्तार से जानकारी।

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