दिल्ली की विशेष एनआईए अदालत ने म्यांमार ट्रेनिंग कैंप मामले में अमेरिकी और यूक्रेनी नागरिकों को डिफॉल्ट जमानत पर रिहा कर दिया है। जानें क्या है पूरा मामला और क्यों नहीं लगा UAPA

नई दिल्ली। स्टार समाचार वेब
नई दिल्ली की विशेष एनआईए (NIA) अदालत ने म्यांमार ट्रेनिंग कैंप से जुड़े एक चर्चित मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए अमेरिकी और यूक्रेनी नागरिकों को डिफॉल्ट जमानत पर रिहा कर दिया है। कानूनी प्रक्रियाओं और बांड की औपचारिकताएं पूरी होने के बाद आज इन्हें तिहाड़ जेल से रिहा कर दिया गया। अदालत के निर्देशानुसार, ये सभी विदेशी नागरिक अपने परिवारों से मिलने के लिए एक महीने की अनुमति पर अपने स्वदेश (अमेरिका और यूक्रेन) लौटेंगे।
राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने इन विदेशी नागरिकों को उस समय गिरफ्तार किया था जब वे बिना किसी वैध परमिट या अनुमति के मिजोरम के रास्ते म्यांमार जा रहे थे। ये सभी आरोपी वैध टूरिस्ट वीजा पर भारत आए थे, लेकिन नियमों का उल्लंघन करते हुए मिजोरम के प्रतिबंधित सीमाई इलाकों में पहुंचे और वहां से अवैध तरीके से म्यांमार की सीमा पार की। जांच के दौरान यह बात सामने आई थी कि ये लोग कथित तौर पर म्यांमार में सशस्त्र समूहों को ड्रोन संचालन और हथियारों का प्रशिक्षण देने की गतिविधियों से जुड़े थे। भारत में प्रवेश और वीजा प्रावधानों से जुड़े इमिग्रेशन एक्ट का उल्लंघन करने के चलते विदेशी क्षेत्रीय पंजीकरण कार्यालय (FRRO) द्वारा इन पर जुर्माना भी लगाया गया था।
कानून के जानकारों के अनुसार, इस मामले में आरोपियों को कानूनी समयसीमा के आधार पर राहत मिली है...
यूएपीए (UAPA) के तहत चार्जशीट नहीं:
जांच एजेंसी एनआईए अपनी तय 180 दिनों की कानूनी अवधि के भीतर यूएपीए (गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम) के तहत मुख्य आरोप पत्र दाखिल नहीं कर सकी।
ठोस सबूतों का अभाव:
एनआईए को अपनी जांच के दौरान ऐसा कोई पुख्ता या ठोस सबूत नहीं मिला, जिससे यह साबित हो सके कि इन विदेशी नागरिकों की गतिविधियों से भारत के राष्ट्रीय हितों या देश के नागरिकों को कोई सीधा नुकसान पहुंचा है। इसी वजह से एजेंसी ने चार्जशीट में यूएपीए जैसे गंभीर आतंकवाद-रोधी प्रावधानों को नहीं जोड़ा।
विशेष अदालत ने भले ही इन नागरिकों को एक महीने के लिए अपने देश जाने की अनुमति दे दी है, लेकिन इसके साथ ही कुछ सख्त कानूनी शर्तें भी तय की गई हैं। तय समय सीमा समाप्त होने के बाद इन्हें वापस भारत लौटकर अदालत की अगली प्रक्रियाओं में शामिल होना होगा।

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