भोपाल NGT ने मध्य प्रदेश के शहरों में दूषित पानी की सप्लाई पर ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। IIT इंदौर और CPCB की टीम जांच करेगी। जानें एनजीटी के 14 नए नियम

भोपाल: स्टार समाचार वेब
राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT), सेंट्रल ज़ोन बेंच, भोपाल ने मध्य प्रदेश के शहरों में सीवेज मिश्रित और दूषित पेयजल की आपूर्ति को जनस्वास्थ्य के लिए "गंभीर खतरा" घोषित किया है। न्यायमूर्ति शिव कुमार सिंह और विशेषज्ञ सदस्य ईश्वर सिंह की पीठ ने इस मामले में राज्य सरकार, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और सभी नगर निगमों की जवाबदेही तय करते हुए कड़े निर्देश जारी किए हैं।
एनजीटी ने जमीनी हकीकत की जांच के लिए एक 6-सदस्यीय संयुक्त समिति का गठन किया है। इस समिति में IIT इंदौर के विशेषज्ञ, CPCB, पर्यावरण विभाग के प्रमुख सचिव, नगरीय प्रशासन विभाग, जल संसाधन विभाग और MPPCB के प्रतिनिधि शामिल होंगे। यह समिति अगले 6 सप्ताह में पूरे प्रदेश में पेयजल की गुणवत्ता पर अपनी विस्तृत रिपोर्ट ट्रिब्यूनल को सौंपेगी।
ट्रिब्यूनल ने राज्य के सभी कलेक्टरों और निगमायुक्तों को निम्नलिखित व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने का आदेश दिया है...
टेक्नोलॉजी का उपयोग: पानी की गुणवत्ता और शिकायतों के लिए '24x7 वाटर ऐप' और MIS सिस्टम अनिवार्य होगा।
GIS मैपिंग: पेयजल और सीवेज लाइनों की GIS मैपिंग की जाएगी ताकि लीकेज और क्रॉस-कंटामिनेशन (पानी में सीवेज मिलना) को रोका जा सके।
शुद्धिकरण प्रक्रिया: जल शोधन के लिए एरेशन (Aeration) और क्लोरीनेशन की प्रक्रियाओं को सख्ती से लागू करना होगा।
डेयरियों का विस्थापन: शहर की सीमा के भीतर चल रही डेयरियों (2 से अधिक पशु) को 4 महीने के भीतर शहर से बाहर शिफ्ट करना होगा।
अतिक्रमण और विसर्जन: जल स्रोतों से अतिक्रमण हटाए जाएंगे और पेयजल स्रोतों (डैम, तालाब) में मूर्ति विसर्जन पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा।
वाटर हार्वेस्टिंग और मीटरिंग: सभी सरकारी व निजी भवनों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग अनिवार्य होगी। साथ ही, पानी की बर्बादी रोकने के लिए घरेलू और व्यावसायिक कनेक्शनों पर मीटर लगाए जाएंगे।
आगामी गर्मी (मार्च से जुलाई) को देखते हुए एनजीटी ने स्पष्ट किया है कि पानी की कमी होने पर निर्माण कार्यों पर रोक लगाई जाए और जरूरत पड़ने पर वार्ड-वार राशनिंग की जाए। साथ ही, पुराने कुओं और बावड़ियों को पुनर्जीवित करने के लिए विशेष कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिए गए हैं।

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