रीवा शहर में शाम ढलते ही सड़कें मयखाने में तब्दील हो जाती हैं। खुलेआम शराबखोरी, चखना ठेले और नियमों की अनदेखी से महिलाएं व यात्री परेशान हैं।

हाइलाइट्स:
रीवा, स्टार समाचार वेब
बॉलीवुड की एक मशहूर फिल्म के गीत के अनुसार नशा शराब में होता तो नाचती बोतल, लेकिन संभागीय मुख्यालय की वो सड़कें जो कभी संकरी हुआ करती थीं आज इस कदर चौड़ी हो गई हैं कि यहां शाम ढलते ही मयखाने खुल जाते हैं और जाम के छलकने का दौर देर शाम तक चलता रहता है। ऐसा दृश्य किसी एक जगह नहीं बल्कि कई स्थानों पर दिखता है। मयखाना और छलकते जाम के साथ शब्दों की अश्लीलता की पार होती हदों ने उन लोगों के कदमों में मुश्किल की बेड़ियां लगा दी हैं जो लोक लाज पर यकीन रखते हैं।
शहर में आबकारी विभाग द्वारा ठेके पर दी गई शराब की दुकानें शासन के नियमों को ठेंगा दिखा रही हैं। आलम यह है कि किसी भी दुकान में न तो रेट लिस्ट ही चस्पा है और न ही टाइमिंग फिक्स की गई है। देखा यह गया है कि जब दुकानों के बंद होने का समय होता है उस दौरान भी शटर के नीचे से शराब का आदान-प्रदान होते देखा गया है। यहां पर यह बता दें कि आबकारी विभाग के अधिकारी शराब ठेकेदारों के इशारों पर काम करते हैं। अगर ऐसा नहीं होता तो शहर की तकरीबन 15 आबकारी की दुकानें बगैर रेट लिस्ट चस्पा के चल रही हैं।
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सड़क के किनारे सजी चखना की दुकानें
शहर के मुख्य मार्ग की शराब दुकान जिसमें पीटीएस, समान नाका, सिरमौर चौराहा, पुराना बस स्टैण्ड, ट्रांसपोर्ट नगर एवं झिरिया में शराब दुकान के सामने चखना के ठेले शाम 5 बजे से ही शुरू हो जाते हैं। इतना ही नहीं ठेले में विधिवत बैठाकर शराब पिलाई जाती है। यहां पर यह बता दें कि शराब दुकानों की नियमित मॉनीटरिंग पुलिस एवं आबकारी विभाग द्वारा की जानी चाहिए जो नहीं की जाती है। कभी कभार अगर पुलिस की गश्त हो गई तो न तो दुकानदारों पर चालानी कार्रवाई की जाती और न ही खुले में पी रहे शराबियों की गिरफ्तारी की जाती।
पीटीएस से नया बस स्टैण्ड जाना मुश्किल
पीटीएस चौराहा से नया बस स्टैण्ड की तरफ जाने वाले यात्री शराबियों की अश्लीलता का शिकार होते हैं। खासकर शाम ढलते ही महिलाएं सड़कों से निकलने में परहेज करने लगी हैं। पीटीएस चौराहे से बाणसागर तक सड़क के किनारे लगी दुकानें पुलिस एवं प्रशासन का मुंह चिढ़ा रही हैं। खुलेआम शराब के छलकते जाम सभ्य समाज के लोगों के लिए अब अभिशाप बन गए हैं। पीटीएस चौराहा में खोली गई शराब की दुकान के सामने शाम से ही जाम लगना शुरू हो जाता है, उसका सबसे बड़ा कारण शराबियों की जमघट एवं सड़कों के किनारे लगाए गए ठेले बताए जा रहे हैं।
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सूची के अभाव में सेल्समैनों की मनमानी
जिले में हर साल आबकारी विभाग 10 से 15 प्रतिशत अधिक दाम में देशी एवं विदेशी शराब की दुकानें नीलाम करता है। जिसका मतलब साफ है कि हर साल आबकारी को इन्हीं दुकानों से पर्याप्त राजस्व मिल रहा है। बड़ी बात यह है कि जिन दुकानों को अधिक दाम में ठेकेदारों द्वारा ली जाती है वे अपना घाटा पूरा करने के लिए मदिरा के शौकीनों को बलि का बकरा इस तरह बनाते हैं कि रेट सूची से इतर मनमाने दाम पर सेल्समैनों के माध्यम से देशी और विदेशी शराब बेची जाती है। यदि कभी किसी व्यक्ति या संस्था द्वारा आवाज उठाई जाती है तो आबकारी विभाग जांच का कोरम पूरा करने मैदान में उतर जाता है और इक्का-दुक्का जगहों पर लाहन जब्त कर अपने दायित्व की इतिश्री कर लेता है।
ठेकेदारों के नाक के नीचे पैकारी का चलन
आंकड़ों पर नजर डाली जाए तो हर साल सुरा प्रेमियों की संख्या बढ़ रही है। जो इस बात की ओर साफ इशारा करती है कि शराब कारोबार फिलहाल फायदे का सौदा है। वहीं एक दु:खद पहलू यह भी है कि ठेकेदारों की नाक के नीचे जिले में पैकारी का चलन भी जोरों पर है। आरोप तो यहां तक लगते हैं कि दुकान संचालकों की शह पर लोगों को उनके घर तक शराब पहुंचाई जाती है और उसका दाम भी सहूलियत भरा रहता है। पैकारी में ठेकेदार को भी काफी फायदा होता है, ऐसी स्थिति में वह खुद दुकान से शराब की बड़ी खेप पैकारी के रूप में निकालते हैं। इस संबंध में जानकारी के लिए सहायक आबकारी आयुक्त अनिल जैन को फोन कर जानकारी चाही गई परंतु उन्होंने फोन ही नहीं उठाया।
मैं अभी भोपाल से लौट रहा हूं। रीवा आते ही मैं इसमें अभियान चलाऊंगा। पुलिस पूरी तरह से मुख्य सड़कों का गश्त करने के बाद जो भी शराबी सड़क के बाहर या खुले में मदिरा पान करते पाए जाएंगे उन पर कार्रवाई की जाएगी। साथ ही संबंधित दुकानों पर भी कार्रवाई की जाएगी।
शैलेन्द्र सिंह चौहान, पुलिस अधीक्षक रीवा

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