रीवा के विद्युत विभाग में ब्लैक लिस्टेड आउटसोर्स कर्मचारियों ने अपनी पहचान बदलकर रिश्तेदारों की आईडी से दोबारा नौकरी पकड़ ली है। जबलपुर तक इस मामले की जानकारी पहुंची है और मुख्य महाप्रबंधक ने आदेश जारी कर कहा है कि किसी भी ब्लैक लिस्टेड कर्मचारी को काम करते पाए जाने पर वेतन से राशि वसूली जाएगी।

हाइलाइट्स
रीवा, स्टार समाचार वेब
विद्युत विभाग में एक नया खेल चल रहा है। विभाग ने ब्लैक लिस्टेड आउटसोर्स कर्मचारियों को दोबारा नौकरी में रखने पर रोक लगा दी है। ऐसे में ब्लैक लिस्टेड कर्मचारी रिश्तेदारों के नाम की आईडी लगाकर दोबारा से जम गए हैं। इसकी भनक जबलपुर तक पहुंच गई है। जबलपुर से आदेश जारी हो गया है। यदि जांच में कोई भी ब्लैक लिस्टेड कर्मचारी काम करते मिला तो इसकी वसूली अधीक्षण अभियंता से की जाएगी।
आपको बता दें कि विद्युत विभाग में मीटर रीडिंग से लेकर मेंटीनेंस तक का काम आउटसोर्स से कराया जा रहा है। हजारों की संख्या में रीवा जिला में आउटसोर्स कर्मचारी काम कर रहे हैं। इन कर्मचारियों को काम में लापरवाही मिलने पर बाहर का रास्ता भी दिखाया जा रहा है। जबलपुर से कई कर्मचारियों को ब्लैक लिस्टेड कर दिया गया है। उन्हें बाहर किए जाने का आदेश भी जबलपुर से जारी किया गया है। इन कर्मचारियों को विभाग ने कागजों में तो बाहर कर दिया लेकिन मैदान में अब भी डटे हुए हैं। कर्मचारियों ने अधिकारियों के साथ मिलकर कंपनी को ही धोखा देना शुरू कर दिया है। खुद की आईडी की जगह दूसरो की आईडी से नौकरी पा ली और अब भी विभाग में भर्रेशाही में लगे हैं। इसकी जानकारी मप्र पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी जबलपुर तक पहुंची तो हड़कंप मच गया है। जबलपुर से अधीक्षण अभियंता को अल्टीमेटम जारी किया गया है। साथ ही यह भी कहा गया है कि यदि ब्लैक लिस्टेड कर्मचारी विभाग में कहीं भी काम करते हुए मिले तो उनको भुगतान किये गए राशि की वसूली अधीक्षण अभियंता के वेतन से की जाएगी।
रीवा शहर संभाग में सबसे अधिक कर रहे काम
ब्लैक लिस्टेड कर्मचारियों को अधिकारियों का संरक्षण मिला हुआ है। दूसरों का डाक्यूमेंट लगाकर दोबारा से नौकरी पर जमें हुए हैं। कोई पत्नी के नाम से नौकरी कर रहा है तो कोई भाई और बहन के नाम से जमा हुआ है। रीवा जिला के सभी डिवीजन में ब्लैक लिस्टेड किए गए कर्मचारी काम कर रहे हैं। पश्चिम संभाग में चोरहटा डीसी में एक आउटसोर्स कर्मचारी अपने बेटे के नाम से काम कर रहा है। वहीं इंजीनियरिंग कॉलेज में एक आउटसोर्स कर्मचारी पत्नी की जगह सेवाएं दे रहा है। पश्चिम डिवीजन में ही एक डाटा आपरेटर ने अपनी भतीजी के डाक्यूमेंट का इस्तेमाल कर नौकरी हथियाई है। शहर संभाग में ब्लैक लिस्टेड मीटर रीडर जो बाहर करने के बाद भी जमें हैं। उनकी संख्या 40 फीसदी से अधिक है। सूत्रों की मानें तो इसी तरह मऊगंज और त्योंथर डिवीजन में भी ब्लैक लिस्टेड कर्मचारियों को दोबारा रख लिया गया है।
आदेश में स्पष्ट निर्देश जारी किए गए हैं
मप्र पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी जबलपुर से मुख्य महाप्रबंधक ने आदेश जारी किया है। इस आदेश में कहा गया है कि वाह्य स्रोत के माध्यम से कार्यरत वाह्य स्रोत कर्मियों को गंभीर कदाचरण कार्य के प्रति घोर लापरवाही एवं गंभीर अनियमितता के कारण कार्य से पृथक करते हुए ब्लैक लिस्टेड किया गया है। ब्लैक लिस्टेड किए गए कर्मचारियों को बिना अनुमति और अनुमोदन के उसी वृत्त या फिर अन्य जगहों पर वापस कार्य में रख लिया गया है। आदेश में कहा गया है कि यदि आउटसोर्स कर्मचारी जिन्हें ब्लैक लिस्टेड किया गया है। यदि वह काम करते हुए कार्यस्थल पर मिलते हैं तो कार्यरत होने के दिनांक से वर्तमान समय तक जो भी राशि का भुगतान किया गया होगा। उसकी वसूली अधीक्षण अभियंता के वेतन से की जाएगी। इसके अलावा कंपनी के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।
जीरो बिलिंग मामले में हटाए गए एई कोर्ट से स्टे लेकर पहुंचे
शहर संभाग में जीरो बिलिंग के मामले में एई रविन्द्र कौशल का स्थानांतरण सीई रीवा ने अमरपाटन कर दिया था। स्थानांरण आदेश जारी होने के बाद उन्होंने स्थानांतरित जगह पर आमद दर्ज नहीं कराई। आदेश के विरुद्ध वह कोर्ट पहुंच गए थे। कोर्ट से उन्हें स्थगन मिल गया है। स्थगन मिलने बाद शुक्रवार को उन्होंने सीई के पास पहुंच कर उपस्थिति दर्ज कराई। शहर संभाग कार्यालय भी पहुंचे थे। वहीं दूसरी तरफ उनके स्थानांतरण के बाद एई कौशल की जगह पर अमरपाटन से एई जितेश त्रिपाठी ने पहुंच कर आमद दर्ज करा दी। कार्यभार भी सम्हाल लिया है। अब जोन को लेकर खींचतान मचनी तय मानी जा रही है।


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