प्रधानमंत्री मोदी की इस्राइल यात्रा में 'भगवा' रंग ने सुर्खियां बटोरीं। जानें नेतन्याहू के साथ हुई इस मुलाकात के मायने और रक्षा सौदों से लेकर हेक्सागॉन अलायंस तक का पूरा ब्योरा।
By: Star News
Feb 25, 20267:19 PM
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी दो दिवसीय यात्रा पर इस्राइल पहुंचे हैं, जहाँ उनका गर्मजोशी से स्वागत किया गया। बेन गुरियन हवाई अड्डे पर प्रोटोकॉल तोड़ते हुए खुद इस्राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और उनकी पत्नी सारा नेतन्याहू उनके स्वागत के लिए मौजूद रहे। इस मुलाकात के दौरान एक बेहद दिलचस्प और हल्का-फुल्का पल भी कैमरे में कैद हुआ, जो अब सोशल मीडिया पर वायरल है।
हवाई अड्डे पर जब पीएम मोदी विमान से उतरे, तो नेतन्याहू ने गले लगकर उनका स्वागत किया। इसी दौरान सारा नेतन्याहू ने भी पीएम मोदी का अभिवादन किया। बेंजामिन नेतन्याहू ने मजाकिया अंदाज में पीएम मोदी के 'पॉकेट स्क्वायर' (जेब में रखे रूमाल) के रंग और अपनी पत्नी सारा की ड्रेस के रंग की समानता की ओर इशारा किया। इस पर प्रधानमंत्री मोदी ने मुस्कुराते हुए कहा, "यस, यस... सेफ्रॉन" (हाँ, हाँ... भगवा)। इस टिप्पणी के बाद तीनों नेता ठहाके लगाकर हंस पड़े, जो दोनों देशों के बीच के सहज और घनिष्ठ संबंधों को दर्शाता है।
प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर इस यात्रा की महत्ता को साझा करते हुए लिखा..
"मेरी पत्नी सारा और मैंने अपने प्रिय मित्र नरेंद्र मोदी का स्वागत किया। साल 2017 की उनकी पहली यात्रा और मेरी भारत यात्रा ने हमारे बीच एक गहरी निजी दोस्ती की नींव रखी है। हम अक्सर संवाद करते हैं, और यह दोस्ती हमारे देशों के मजबूत रिश्तों का आधार है।"
यात्रा का एजेंडा और महत्वपूर्ण समझौते
इस दौरे के दौरान भारत और इस्राइल के बीच कई उच्च-स्तरीय कार्यक्रम और रणनीतिक बैठकें होनी हैं:। दोनों नेता यरूशलम में एक इनोवेशन इवेंट में भाग लेंगे। आर्थिक, सुरक्षा और रणनीतिक क्षेत्रों में कई महत्वपूर्ण एमओयू (MoU) पर हस्ताक्षर होंगे। पीएम मोदी इस्राइल के होलोकॉस्ट स्मारक 'याद वाशेम' जाकर श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे। चर्चा है कि भारत इस्राइल से 'आयरन बीम' जैसी आधुनिक तकनीक और ब्रह्मोस से भी तेज मिसाइलों के क्षेत्र में सहयोग पर बात कर सकता है।
इस्राइल, भारत को 'हेक्सागॉन अलायंस' का हिस्सा बनाने का इच्छुक है। यह गठबंधन पश्चिम एशिया (मिडल ईस्ट) में स्थिरता, आर्थिक विकास और सुरक्षा के लिए एक नया रणनीतिक ढांचा है। भारत की इसमें मौजूदगी न केवल पाकिस्तान के लिए चिंता का विषय है, बल्कि यह हिंद महासागर से लेकर भूमध्य सागर तक भारत के प्रभाव को भी बढ़ाता है।