अनासर काल और महाप्रभु के विश्राम का रहस्य

घर्म डेस्क। स्टार समाचार वेब

पुरी का जगन्नाथ मंदिर न केवल अपनी भव्यता के लिए, बल्कि अपनी अनूठी परंपराओं के लिए भी विश्व प्रसिद्ध है। रथयात्रा से ठीक पहले भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा 15 दिनों के लिए 'अनासर' (Anasara) काल में चले जाते हैं।

अनासर काल क्या है?

मान्यता है कि स्नान पूर्णिमा के दिन विशाल स्नान के बाद भगवान जगन्नाथ को अत्यधिक जल चढ़ाने के कारण उन्हें हल्का बुखार आ जाता है। इस अवधि में भगवान भक्तों को दर्शन नहीं देते और गर्भगृह में एकांत में विश्राम करते हैं।

15 दिनों का विशेष उपचार

अनासर काल के दौरान मंदिर के मुख्य कपाट बंद रहते हैं। इस समय भगवान का उपचार 'दइतापति' सेवकों द्वारा किया जाता है। उन्हें कोई साधारण भोग नहीं, बल्कि जड़ी-बूटियों से बना विशेष काढ़ा (औषधि) अर्पित किया जाता है। इसे 'अनासर सेवा' कहा जाता है।

भक्तों के लिए विकल्प: अलारनाथ दर्शन

इन 15 दिनों में जब पुरी के मंदिर में कपाट बंद होते हैं, तो भक्त पुरी के पास स्थित ब्रह्मगिरि के अलारनाथ मंदिर में जाकर भगवान के दर्शन करते हैं। मान्यता है कि जो भक्त अनासर काल में अलारनाथ के दर्शन करता है, उसे सीधे भगवान जगन्नाथ का ही आशीर्वाद प्राप्त होता है।

रथयात्रा का महत्व

15 दिन के उपचार के बाद, भगवान जगन्नाथ स्वस्थ होकर भक्तों को दर्शन देने बाहर निकलते हैं, जिसे 'नवयौवन दर्शन' कहा जाता है। इसके अगले ही दिन भगवान भव्य रथों पर सवार होकर अपनी मौसी के घर, गुंडिचा मंदिर की यात्रा पर निकलते हैं, जिसे 'रथयात्रा' के नाम से जाना जाता है।