राजस्व अधिकारियों के न्यायिक और गैर-न्यायिक विभाजन के विरोध में भोपाल के तहसीलदार और नायब तहसीलदारों ने अपनी गाड़ियां जमा करा दीं। जानें क्यों हो रहा है यह विरोध और इससे आम जनता पर क्या असर पड़ रहा है।

भोपाल: स्टार समाचार वेब
राजस्व अधिकारियों के न्यायिक और गैर-न्यायिक कार्यों के विभाजन के विरोध में गुरुवार को भी आंदोलन जारी रहा। विरोध जताने के लिए भोपाल के सभी तहसीलदार और नायब तहसीलदार कलेक्टोरेट पहुँचे और अपनी सरकारी गाड़ियों की चाबियां जमा करा दीं। इस आंदोलन से आम जनता के काम भी प्रभावित हो रहे हैं, क्योंकि कोर्ट में सुनवाई और अन्य प्रशासनिक कार्य ठप हो गए हैं।
भोपाल की बैरागढ़, कोलार, एमपी नगर, शहर वृत्त, बैरसिया और टीटी नगर तहसीलों में तहसीलदार और नायब तहसीलदारों के कामों को दो हिस्सों में बाँट दिया गया है। कुछ अधिकारियों को सिर्फ न्यायिक कार्य दिए गए हैं, जबकि कुछ केवल फील्ड का काम देख रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि वे इस व्यवस्था से सहमत नहीं हैं। विरोध के चलते बुधवार को भी उन्होंने काम नहीं किया था, और गुरुवार को भी यही स्थिति बनी रही।
मध्य प्रदेश राजस्व अधिकारी (कनिष्ठ प्रशासनिक सेवा) संघ के वरिष्ठ उपाध्यक्ष नवीनचंद कुंभकार ने बताया कि यह व्यवस्था पहले 12 जिलों में एक पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू की गई थी, लेकिन बाद में इसे 9 और जिलों में लागू कर दिया गया। इसी के विरोध में भोपाल, इंदौर और उज्जैन सहित कई जिलों में राजस्व अधिकारी विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।
विरोध को देखते हुए राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा ने बुधवार को कहा था कि यह कैबिनेट का फैसला है। उन्होंने बताया था कि पहले न्यायिक प्रक्रियाओं में काफी दिक्कतें आ रही थीं, इसीलिए यह व्यवस्था लागू की गई है।
फिलहाल, राजस्व अधिकारियों ने हड़ताल पर जाने का फैसला नहीं लिया है। उन्होंने निर्णय लिया है कि वे आपदा प्रबंधन कार्यों को छोड़कर अन्य सभी कार्यों से दूर रहेंगे। सभी राजस्व अधिकारी अपने जिला मुख्यालयों पर उपस्थित रहेंगे, लेकिन कोई भी काम नहीं करेंगे, जिससे आम लोगों को परेशानी हो रही है।्

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