रीवा में अमृत पेयजल योजना के तहत निजी भूमि पर पानी की टंकी बना दी गई। जांच में जमीन प्राइवेट निकली, राजस्व विभाग ने स्टे लगाया।

हाइलाइट्स:
रीवा, स्टार समाचार वेब
नगर निगम के अधिकारियों का गजब कारनामा सामने आया है। अमृत पेयजल योजना की टंकी प्राइवेट जमीन पर बनवानी शुरू करा दी। जब भूमि स्वामी मौके पर पहुंचा तो दंग रह गया। उसने कलेक्ट्रेट और नगर निगम में गुहार लगाई। प्राइवेट जमीन पर टंकी बनने की जानकारी जब अधिकारियों को लगी तो उनके होश उड़ गए। राजस्व टीम भेजकर जांच कराई गई। जांच में भूमि निजी निकली। फिलहाल राजस्व विभाग ने स्टे लगा दिया है। भूमि स्वामी को मनाने की कोशिश जारी है।
आपको बता दें कि रीवा नगर को अमृत पेयजल योजना के तहत करोड़ों रुपए का बजट आवंटित हुआ है। इससे पेयजल योजना के तहत नई पानी की टंकियां बनाई जानी है। पाइप लाइन बिछानी है। इंटकवेल का निर्माण भी किया जाना है। इसी योजना के तहत चोरहटा वार्ड क्रमांक 2 में भी 1 करोड़ की लागत से 20 लाख लीटर की टंकी का निर्माण किया जाना था। टंकी का निर्माण करने के पहले जमीन की जांच नहीं कराई गई। निर्माण एजेंसी को जगह दिखा दी गई और काम शुरू हो गया। आधा काम होने के बाद पता चला कि जिस जगह पर टंकी बनाई जा रही है। वह निजी भूमि है। भूस्वामी ने मौके पर पहुंच कर आपत्ति दर्ज कर दी। अब मामले में नायब तहसीलदार कोठी ने स्टे दे दिया है।
राजस्व विभाग ने झाड़ा पल्ला
चोरहटा वार्ड क्रमांक 4 में पानी की टंकी का निर्माण किया जा रहा है। यह पानी की टंकी खसरा नंबर 343/2 में किया जा रहा है। यह निजी भूमि है। किसी मिश्रा जी की जमीन पर टंकी बनाई जा रही है। जबकि पास ही सरकारी जमीन खाली पड़ी है। उसे छोड़कर प्राइवेट लैंड में काम शुरू करा दिया गया। सूत्रों की मानें तो इस लापरवाही में तत्कालीन पटवारी की तरफ भी उंगलियां उठाई जा रही है लेकिन उन्होंने इसमें शामिल होने से इंकार किया है। किसी तरह की नगर निगम टीम को जानकारी देने से खुद को किनारे कर लिया है। अब पूरा मामला फंस गया है।
भूमि स्वामी को मैनेज करने में लगे रहे
निजी भूमि पर टंकी के निर्माण की जानकारी होते ही भूस्वामी के होश उड़ गए। उसने शिकायत लेकर दौड़ना शुरू किया। पहले नगर निगम कमिश्नर के पास पहुंचा। धोबिया टंकी पीएचई कार्यालय भी पहुंचा। सभी जगह आवेदन दिया गया। इसके बाद मामले को डैमेज कंट्रोल करने की कोशिश की गई। भूमि स्वामी को मनाने में अधिकारी लगे रहे। हालांकि वह नहीं माना। इसके बाद भूमि स्वामी ने शिकायत राजस्व विभाग यानि कलेक्ट्रेट में की।
जांच में हुआ खुलासा, निजी भूमि निकली
भूमि स्वामी ने इसकी शिकायत राजस्व विभाग में की। नायब तहसीलदार कोठी ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच कराई। जांच के लिए राजस्व टीम को भेजा गया। मौके पर पटवारी और आरआई पहुंचे। जब जांच की गई तो सच में जमीन निजी निकली। रिपोर्ट टीम ने नायब तहसीलदार को सौंपी। नायब तहसीलदार कोठी ने निर्माण कार्य पर फिलहाल रोक लगा दी है लेकिन टंकी का निर्माण कार्य रुका नहीं है। इसकी जानकारी अभी निर्माण करने वाली कंपनी को नहीं दी गई है।
किससे होगी इस नुकसान की भरपाई
इतनी बड़ी लापरवाही अधिकारियों ने दबा कर रखी। इसे उजागर नहीं होने दिया गया। फिलहाल सीएमआर कंपनी ने काम भी नहीं रोका है। स्टे तक की जानकारी कंपनी को नहीं है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब टेंडर हुआ, डीपीआर बना और लोकेशन दिखाई गई तो राजस्व टीम को साथ में क्यों नहीं लिया गया। राजस्व विभाग से सीमांकन क्यों नहीं कराया गया। इस लापरवाही के कारण लाखों रुपए लग चुके हैं। आधा काम हो गया है। इस घाटे और नुकसान की भरपाई कौन सहेगा, इसका निर्धारण अभी बांकी है। लापरवाही तय होना भी शेष है।
नगर निगम ने जहां जमीन दी। वहां निर्माण शुरू कर दिया गया। जमीन उपलब्ध कराना नगर निगम का काम है। संबंधित व्यक्ति ने आवेदन दिया था। कमिश्नर ननि को भी आवेदन किया था। स्टे के बारे में जानकारी नहीं है। निर्माण अभी चल रहा है।
योगेन्द्र चौकसे, मैनेजर, सीएमआर कंपनी रीवा
आवेदन आया था। जमीन की जांच कराई गई। जांच में प्राइवेट लैंड होना पाया गया है। खरीदी गई जमीन पर टंकी का निर्माण कर दिया गया है। फिलहाल निर्माण कार्य पर स्टे दे दिया गया है। अब आगे देखते हैं।
तेज प्रताप सिंह, नायब तहसीलदार, कोठी, हुजूर रीवा

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