रीवा में स्कूल मरम्मत के नाम पर 28 लाख के फर्जीवाड़े की जांच पूरी, डीईओ सहित अधिकारी व प्राचार्य दोषी पाए गए।

हाइलाइट्स
रीवा, स्टार समाचार वेब
स्कूल शिक्षा विभाग में रंगाई-पुताई और मरम्मत के नाम पर हुए 28 लाख के फर्जीवाड़ा की जांच पूरी हो गई। जांच में डीईओ, लेखाधिकारी, तत्कालीन रमसा प्रभारी, भवन शाखा प्रभारी सहित तीन प्राचार्य दोषी पाए गए हैं। इनके खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई का प्रस्ताव जेडी लोक शिक्षण ने कमिश्नर रीवा संभाग रीवा के पास भेज दिया है।
आपको बता दें कि स्कूल शिक्षा विभाग ने सभी जिलों को अनुरक्षण मद में लाखों रुपए की राशि स्कूलों के मेंटीनेंस और पुताई के लिए दी थी। जून महीने में यह राशि दी गई थी। रीवा जिला को भी 55 लाख रुपए दिए गए थे। इस राशि से एक्सीलेंस स्कूल सहित हाई और हायर सेकेण्डरी स्कूलों में बारिश के पहले रंगाई, पुताई और मरम्मत का काम कराना था। इस राशि का डीईओ सहित तत्कालीन रमसा प्रभारी, तत्कालीन एपीसी, लेखाअधिकारी और स्कूल प्राचार्यों ने मिलकर बंदरबांट कर लिया। फर्जी बिल बाउचर लगाकर ठेकेदार को भुगतान कर दिया गया। मामले का खुलासा हुआ तो कमिश्नर के पास शिकायत पहुंच गई। जांच बैठा दी गई। जेडी ने जांच कराई तो सारा फर्जीवाड़ा सामने आ गया। जेडी ने जांच के बाद कार्रवाई का प्रतिवेदन कमिश्नर को भेज दिया है। इसमें अधिकारी और प्राचार्यों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की अनुशंसा की गई है।
सभी 6 स्कूलों में एक जैसे बिल, सिर्फ नाम अलग थे
जेडी की टीम ने जब दस्तावेजों की जांच की तो वह हैरान रह गए। डीईओ के पास ठेकेदार ने जो बिल लगाए थे। सभी में एक जैसा काम दिखाया गया था। बिल भी एक जैसे थे। सिर्फ स्कूलों के ऊपर नाम अलग थे, बाकी फोंट साइज और सारी लिखावट एक जैसी थी। कुछ भी अलग नहीं मिला। यहां तक कि तीन प्राचार्यों के हस्ताक्षर भी फर्जी मिले हैं। वहीं तीन प्राचार्यों ने अधूरा काम होने पर भी पूर्णता प्रमाण पत्र जारी कर दिया। इसमें सिर्फ एक की ही मिलीभगत सामने नहीं आई है। इसमें लेखा अधिकारी, तत्कालीन रमसा प्रभारी, निर्माण कार्य देखने वाले एपीसी और बिल राशि पास करने वाले डीईओ भी लपेटे में आए हैं। दस्तावेज पूरी तरह से फर्जी थे। देखने में ही यह फर्जी लग रहे थे फिर भी जांच के बाद भुगतान की स्वीकृति दे दी गई। डीईओ ने भी स्कूलों में कार्यों की जांच नहीं कराई और राशि स्वीकृत कर दी।
6 और स्कूलों में नहीं मिला काम
सिर्फ 6 स्कूलों का जेडी की टीम ने निरीक्षण नहंी किया। 6 और स्कूलों का परीक्षण किया गया। इन स्कूलों को भी लाखों रुपए का फंड जारी किया गया है। इसमें मार्तण्ड स्कूल क्रमांक 1, गवर्नमेंट स्कूल क्रमांक 1, बरा हाई स्कूल, कन्या दुआरी, हर्दी शंकर स्कूल, हाई स्कूल तिवरिगवां शामिल हैं। इनमें से सिर्फ हर्दी शंकर स्कूल में ही पर्याप्त काम मिला है। अन्य स्कूलों में कहीं भी काम राशि भुगतान के हिसाब से नहीं मिला है।
एक्सीलेंस स्कूल को एक रुपए नहीं मिले
लोक शिक्षण संचालनालय से 5 लाख रुपए एक्सीलेंस स्कूल क्रमांक 1 को भी रंगाई, पुताई और मेंटीनेंस के लिए जारी किया गया था। एक्सीलेंस के लिए आई राशि भी खर्च कर दी गई। स्कूल को एक रुपए नहीं मिले। यहां भी निरीक्षण कराया गया। स्कूल में कोई काम होना नहीं पाया गया।
इन पर गिरेगी गाज
इस पूरे फर्जीवाड़ा में डीईओ रामराज मिश्रा, तत्कालीन रमसा प्रभारी नवीन श्रीवास्तव, एपीसी सुधाकर तिवारी, लेखाअधिकारी और वर्तमान में सहायक संचालक कोष एवं लेखा पुष्पा पुसाम की भूमिका संदिग्ध रही। इनके खिलाफ कार्रवाई का प्रस्ताव कमिश्नर के पास भेजा गया है। इसके अलावा गुढ़ पीएमश्री स्कूल, खैरा स्कूल और दुआरी स्कूल प्राचार्य के खिलाफ भी प्रस्ताव कार्रवाई के लिए भेजा गया है। प्राचार्यों ने अधूरे काम पर भी पूर्णता प्रमाण पत्र जारी कर दिया।
सतना में हो चुकी है एफआईआर
रीवा की तरह ही सतना में भी ठेकेदार ने फर्जीवाड़ा की कोशिश की थी। डीईओ ने फर्जीवाड़ा पकड़ लिया था। इसकी शिकायत सिटी कोतवाली थाना में की गई। लिपिक ने पहुंच कर एफआईआर दर्ज कराई थी। ठेकेदार सत्यव्रत तिवारी के खिलाफ पुलिस ने प्रकरण दर्ज कर उसे 24 घंटे के अंदर ही गिरफ्तार कर लिया था। अब सबकी नजर रीवा कमिश्नर की कार्रवाई पर टिकी हुई है।


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