रीवा शहर का नया मास्टर प्लान अब वर्ष 2047 तक की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया जा रहा है। इसमें आसपास के 88 गांव और दो तहसीलें शामिल की जाएंगी। पुराने प्लान में अधूरे रह गए कार्यों को भी इस बार जोड़ा जा रहा है। तालाबों और ग्रीन बेल्ट की अनदेखी के कारण पिछला प्लान लटक गया था। अब सैटेलाइट मैपिंग के जरिए लैंड यूज में बदलाव की उम्मीद के साथ व्यापारी और निवेशक 3 साल से कर रहे हैं इंतजार।

हाइलाइट्स
रीवा, स्टार समाचार वेब
रीवा का नया मास्टर प्लान फिर से तैयार हो रहा है। इस नए मास्टर प्लान में शहर का दायरा कई गांव, कस्बे और तहसीलों तक पहुंच जाएगा। चारों तरफ विकास तेजी से हो रहा है। इसके कारण मास्टर प्लान का दायरा भी बढ़ाया जा रहा है। पिछले मास्टर प्लान में जो काम नहीं हुए। उसे फिर से नए प्लान में जोड़ा जा रहा है। आसपास के करीब 88 गांव जुड़ रहे हैं। वहीं दो तहसीलें भी शामिल हो रही हैं।
आपको बता दें कि रीवा का मास्टर प्लान 2021 तक के लिए बना था। इसके बाद वर्ष 2031 तक के लिए मास्टर प्लान तैयार किया जाना था। इसमें देरी हो गई। वर्ष 2022-23 में मास्टर प्लान तैयार किया गया। फिर शासन के पास स्वीकृति के लिए भेजा गया लेकिन इसमें इतनी आपत्तियां लग गई कि पास ही नहीं हो पाया। विधानसभा तक में रीवा के मास्टर प्लान का मुद्दा उठा था। अब पुराने मास्टर प्लान को आपत्तियां उठने के बाद डंप कर दिया गया था। अब नए सिरे से फिर इसमें प्लानिंग शुरू हुई है। अब नया मास्टर प्लान 10 साल का नहीं होगा। इसे 22 साल की अवधि के लिए तैयार किया जा रहा है। अब यह मास्टर प्लान 2047 तक वैलिड रहेगा। उसी हिसाब से और जनसंख्या को देखते हुए ही जरूरत और होने वाले कार्यों को इसमें शामिल किया जाएगा।
यह सारे गांव मास्टर प्लान में आ जाएंगे
वर्ष 2047 तक के लिए बनाए जा रहे शहर के मास्टर प्लान का दायरा अब रायपुर कर्चुलियान से मनगवां तक पहुंच जाएगा। 22 साल के हिसाब से रीवा के विकास, जनसंख्या और जरूरतों को देखते हुए तैयार किया जा रहा है। जिस तरफ तेजी से विकास हो रहा है। उस तरफ के सारे गांव को मास्टर प्लान में शामिल किया जा रहा है। नए मास्टर प्लान में रतहरा के आगे कोष्ठा, महसांव, बनकुइयां, रौसर, निपनिया, गड्डी रोड में खौर कोठी, सिलपरी भी नए मास्टर प्लान में जुड़ जाएगा। इसके अलावा इसका दायरा रायपुर कर्चुलियान तक बढ़ाया जा रहा है। उसी हिसाब से इसे तैयार किया जा रहा है।
सारे ग्रीन बेल्ट खत्म कर दिए, तालाब के कारण फंसा मामला
रीवा का मास्टर प्लान ग्रीन बेल्ट और तालाबों के गायब होने के कारण भी लटक गया। रीवा जिले में जितने भी तालाब हैं, उन पर किसी तरह का निर्माण कार्य नहीं किया जाना था लेकिन धीरे धीरे सारे तालाब ही गायब कर दिए गए। रीवा के अंदर ही एक तालाब को पाट कर प्लाटिंग की जा रही है। इसी तरह मनगवां और रायपुर कर्चुलियान का तालाब भी गायब हो गया। लगातार गायब होते तालाब प्रशासन और शासन की मुश्किलें खड़ी कर रहा है। पुराने मास्टर प्लान के लटकने और नए मास्टर प्लान के बनने में भी यही तालाब और ग्रीन बेल्ट बाधक बन रहे हैं।
जो काम नहीं हुए पूरे, उसे नए में जोड़ा जाएगा
वर्ष 2021 तक के लिए बनाए गए मास्टर प्लान में कई चीजें शामिल की गई हैं। इसमें सड़कों का चौड़ीकरण, तालाबों का सौंदर्यीकरण सहित अन्य कार्य शामिल किए गए थे। इसमें से कई काम पूरे नहीं हुए। अब जो काम अधूरे रह गए और जो काम नहीं हुए। उन्हें नए मास्टर प्लान में शामिल किया जाएगा। ग्रीन बेल्ट में जो निर्माण कार्य हो गए हंै। वह समस्या बन रहा है। लैंड यूज की इस समस्या को मास्टर प्लान का प्रस्ताव पास होने के बाद सुलझाया जाएगा।
चाकघाट का भी बढ़ रहा दायरा
रीवा के अलावा चाकघाट का मास्टर प्लान बना था। इसे भी नए सिरे से तैयार किया जा रहा है। चाकघाट का मास्टर प्लान भी 2047 के हिसाब से बनाया जाएगा। दो साल पहले जो मास्टर प्लान बना था। उसमें विस्तार किया जा रहा है। मास्टर प्लान तैयार होने के बाद लोगों के सुझाव लिए जाएंगे। आपत्तियां दर्ज होने पर उनका निराकरण किया जाएगा। इसके बाद ही सरकार से नया मास्टर प्लान पास होगा।
तीन साल से हो रहा है इंतजार
नया मास्टर प्लान बन कर तैयार नहीं हुआ। रीवा शहर के कई व्यवसायी, उद्यमियों ने जमीन ले ली है। उनका उपयोग नहीं कर पा रहे हैं। लैंड यूज में बदलाव का इंतजार कर रहे हैं। कई ऐसे क्षेत्र हंै जिन्हें ग्रीन बेल्ड घोषित किया गया है। इस बार मास्टर प्लान सेटेलाइट मैप से तैयार किया गया था। नए प्लान में लैंड यूज के बदलने की आस में लोग तीन साल से इंतजार कर रहे हैं। लैंड यूज का निर्धारण होने के बाद ही इंवेस्टर जमीनों पर निर्माण कार्य कर सकेंगे।

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