सतना शहर की जर्जर और गड्ढों से पटी सड़कों ने लोगों की जान जोखिम में डाल दी है। स्टेशन रोड पर प्रेम नर्सिंग होम के सामने गड्ढे में ऑटो पलटने की घटना ने नगर निगम की लापरवाही को फिर उजागर कर दिया। सर्किट हाउस, सिविल लाइन, धवारी-महदेवा रोड सहित कई इलाकों में सड़कें मौत के जाल में तब्दील हो चुकी हैं। ऑटो चालक और आम नागरिक जिम्मेदारों की चुप्पी पर सवाल उठा रहे हैं।

हाइलाइट्स
सतना, स्टार समाचार वेब
शहर की जर्जर सड़कों ने हाल ही में एक बार फिर अपनी जानलेवा हालत दिखाई। शुक्रवार को स्टेशन रोड से सर्किट हाउस की ओर जा रहा एक इलेक्ट्रिकल आटो प्रेम नर्सिंग होम के सामने बने गड्ढे में फंस गया और अनियंत्रित होकर पलट गया। घटना सर्किट हाउस के ठीक बीचे प्रेम नर्सिंग होम के सामने के उस गड्ढे में घटी जो बीते कई माह से शहर को सुविधायुक्त बनाने का ढोल पीटने वाले जिम्मेदारों का मुंह चिढ़ा रहा है। हादसा बड़ा होने से टल गया, लेकिन आटो में सवार तीन लोगों को हल्की चोटें आईं।
चलते-चलते औंधे मुंह गिरा आटो
स्टेशन रोड की ओर से आ रहा इलेक्ट्रिकल आटो जैसे ही प्रेम नर्सिंग होम के सामने पहुंचा वैसे ही गड्ढे में घुसकर अनियंत्रित हो गया और चारो खाने चित होकर पलट गया। एक तेज आवाज के साथ आटो के गिरते ही हड़कंप मच गया और राहगीरों ने रूककर आटो में फंसे लोगों को निकाला। हालंकि आटो की रफ्तार बेहद कम होने के कारण सवारियों को जनलेवा चोटें तो नहीं आर्इं लेकिन आटो में उस दौरान 3 लोग सवार थे जिनके आंशिक चोंटे आई हैं। खासकर प्रमिला एक महिला घायल हुई जिसे प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई है।
ये सड़कें दे रही हादसों को आमंत्रण
प्रेम नर्सिंग होम के सामने का गड्ढा तो आए दिन हादसों को आंमत्रित करता ही रहता है। साथ ही गड्ढों से पटा ओवरब्रिज, सिविल लाइन चौराहा, सर्किट हाउस-सेमरिया चौक रोड, पन्ना नाका से कृषि अभियांत्रिकी कार्यालय के बीच की सड़क, धवारी-महदेवा सड़क मार्ग, कृष्णनगर रोड , भरहुत नगर में बचपन स्कूल से लेकर अनुपमा स्कूल तक , पतेरी मोड़ से ख्रिस्तुकुला स्कूल मार्ग शहर की ऐसी सड़के गड्ढे और टूटी सड़कें आमजन और वाहनों के लिए जोखिम बढ़ा रही हैं।
सवारियों पर खतरे के बीच टूट रहे वाहन, आटो चालक परेशान
सड़कों की इस दुर्दशा ने उन आॅटो चालकों की जिंदगी भी मुश्किल कर दी है जो शहर के एक छोर से दूसरे छोर तक सवारियों को पहुंचाकर अपनी रोजी रोटी कमा रहे हैं। गड्ढे से पटी शहर की सड़कों में आटो झूले की तरह चलते हैं जिससे उनके पलटने का खतरा बना रहता है। पतेरी निवासी आटो चालक विनोद विश्वकर्मा ने व्यथित अंदाज में बताया कि सड़कों ने उनके काम को चौपट कर दिया है। हादसे होने या सड़क के गड्ढों से आटो के उछलने पर एक ओर जहां आटो में बैठी सवारी का उन्हें कोपभाजन बनना पड़ता है तो दूसरी ओर गड्ढों व जर्जर सड़क के कारण आटो के पार्ट्स भी टूट जाते हैं जिससे दिन भर की कमाई आटो की मरम्मत में ही निकल जाती है। खूंथी निवासी विकास गुप्ता ने कहा कि सतना की सड़कों के कारण आॅटो चलाना घाटे का सौदा बन गया है और वे अपना व्यवसाय बदलने का सोच रहे हैं।। कुल मिलाकर जर्जर सड़कें जहां शहरवासियों की जिंदगी से खिलवाड़ रही हैं वहीं परिवहन क्षेत्र से जुड़े धंधों को भी तबाह कर रही है।
कहते हैं आटो चालक
निश्चित तौर पर गड्ढे से पटी सड़कों ने हमारे काम काज को प्रभावित किया है। रोजाना कोई न कोई पार्ट टूट जाता है जिसकी मरम्मत में ही पूरी कमाई निकल जाती है। महीनों से खराब सड़कें नहीं बनाई जा रही हैं।
प्रीतम चौधरी, आटो चालक
सड़कों में जल्द सुधार नहीं हुआ तो शहर में बड़े और गंभीर हादसे होना तय हैं। गड्ढों और टूटी सड़कों ने न केवल यात्री सुरक्षा को खतरे में डाला है, बल्कि हम जैसे परिवहन व्यवसायों को भी बर्बाद कर दिया है।
सुनील चौधरी, आटो चालक
समझ में नहीं आता कि जिम्मेदार कब तक इस गंभीर समस्या पर आंखें मूंदे रहेंगे। जहां 5 मिनट में पहुंचते हैं वहां आधा घंटा लगता है। शहरवासियों की सुरक्षा और रोजमर्रा की यातायात की सुविधाओं को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
ललित सिंगरौल, आटो चालक
देखिए सड़कों का सुधार सिर्फ विकल्प नहीं, बल्कि अब जीवन और रोजमर्रा की सुरक्षा की आवश्यकता बन गया है। शाकअप टूट जाता है , क्लच टूटते हैं और पलटने का खतरा बना रहता है। जिम्मेदार ध्यान दें ताकि हम निर्विघ्न आटो चलाकर अपनी आजीविका चला सकें।
मुकेश वंशकार, आटो चालक


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