मध्यप्रदेश में 13 दिसंबर को सरकार के दो साल पूरे हो गए। इसके बाद आज मोहन सरकार के तीसरे कार्यकाल की पहली कैबिनेट बैठक आयोजित की गई। बैठक में लिए गए फैसलों ने साफ कर दिया कि सीएम इस कार्यकाल को सिर्फ घोषणाओं नहीं बल्कि स्ट्रक्चरल रिफॉर्म और लॉन्ग टर्म फैसलों का कार्यकाल बनाना चाहते हैं।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंत्रालय में मंत्रि-परिषद की बैठक की हुई।
भोपाल। स्टार समाचार वेब
मध्यप्रदेश में 13 दिसंबर को सरकार के दो साल पूरे हो गए। इसके बाद आज मोहन सरकार के तीसरे कार्यकाल की पहली कैबिनेट बैठक आयोजित की गई। बैठक में लिए गए फैसलों ने साफ कर दिया कि सीएम इस कार्यकाल को सिर्फ घोषणाओं नहीं बल्कि स्ट्रक्चरल रिफॉर्म और लॉन्ग टर्म फैसलों का कार्यकाल बनाना चाहते हैं। कैबिनेट बैठक सरकार की प्राथमिकताओं की स्पष्ट तस्वीर पेश करती है। इसमें कर्मचारी सुरक्षा, इंफ्रास्ट्रक्चर की निरंतरता और जल ऊर्जा विकास पर फोकस रहा। दरअसल, सीएम डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट में राज्य सरकार में कार्यरत कर्मचारियों के पदों से संबंधित स्थायी और अस्थायी पदों का अंतर खत्म कर दिया है। कर्मचारी 10 प्रकार के वर्गीकरण होते हैं, जिसमें नियमित, संविदा, आउटसोर्स, अंशकालीन समेत अन्य पद होते हैं। कर्मचारियों को रिटायरमेंट के बाद कई परेशानियां आती थीं, अब उसे 10 की जगह 5 वर्ग में कर दिया है। इससे लाखों कर्मचारियों को राहत मिलेगी। सरकारी विभागों में नियमित, संविदा, आउटसोर्स, अंशकालीन समेत पांच जरूरी पद रहेंगे। बाकी अन्य पदों को खत्म कर दिया है।
भोपाल-इंदौर मेट्रो परियोजना
भोपाल-इंदौर मेट्रो रेल परियोजना के संचालन और रख-रखाव के लिए राजस्व मद में बजट का प्रस्ताव रखा गया। इसमें वर्ष 2025—26 के लिए 90ण्67 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ला ने बताया कि आमदनी और खर्च में जो अंतर होता, उसे राज्य सरकार को खर्च करना पड़ता है। स्टेट बजट पर कम भार आए, इसलिए ये बजट का अनुमान लगाया है।
अपर नर्मदा परियोजना
बसानिया और राघौपुर में बहुउद्देशीय अपर नर्मदा परियोजना के डूब प्रभावितों के लिए 1782 करोड़ का विशेष पैकेज मंजूर किया है। 5512 करोड़ रुपए की लागत से निर्मित अनूपपुर, मंडला, डिडोरी की सिंचाई योजना का काम तेजी से शुरू हो सकेगा। तीनों जिलों में 71 हजार 967 हेक्टेयर जमीन सिंचाई होगी। 125 मेगा वॉट बिजली का उत्पादन होगा।
मुख्यमंत्री उद्यम क्रांति योजना
मुख्यमंत्री उद्यम क्रांति योजना में 905.25 करोड़ के खर्च का बजट पास किया है। जिसे वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक खर्च किया जाएगा। इस योजना में प्रदेश के 18 से 45 वर्ष तक के युवाओं को स्वरोजगार के लिए 50 हजार से 50 लाख तक दिया जाएगा। स्वरोजगार के लिए हर साल 3 प्रतिशत ब्याज में अनुदान और सात साल तक लोन गारंटी तथा फीस अनुदान दिया जाता है। आने वाले पांच साल के लिए मंजूर किया है।
छह वन विज्ञान केंद्र की स्थापना
मध्यप्रदेश में पांच वन विज्ञान केंद्रों की स्थापना की जाएगी। कृषि विज्ञान केंद्रों की तरह यह वन विज्ञान केंद्र 2025-26 से 2029-30 तक छह वन विज्ञान केंद्रों की स्थापना की जाएगी। सेटअप के लिए 48 करोड़ रुपए मंजूर किए हैं। प्रदेश में वन क्षेत्र के बाहर वानिकी विस्तार गतिविधियों को बढ़ाने, वन भूमि की उत्पादकता, कास्ट के विदोहन, अतिरिक्त आय के साधन की जागरूकता पर काम किया जाएगा। सरकार का मानना है कि पुनर्वास पैकेज के बिना यह परियोजना आगे बढ़ना मुश्किल थी। अब इसके रास्ते साफ हो गए हैं। मुख्यमंत्री ग्राम सड़क एवं अधोसंरचना योजना के सूचकांक को 2 से 3 किया गया है। जिसमें 693.76 करोड़ रुपए की लागत के 3 हजार 810 काम शुरू किए जाएंगे।
कैबिनेट में इन मुद्दों को भी दी गई मंजूरी
जल संसाधन विभाग में रिटायर्ड एसडीओ वीके रावत से देय पेंशन राशि की वसूली से संबंधित प्रस्ताव मंजूर। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के अंतर्गत पूर्व सीईओ जनपद पंचायत राजनगर जिला छतरपुर बीके सिंह के रिटायरमेंट के बाद पेंशन वापस लेने को मंजूरी। लोक निर्माण विभाग के प्रस्ताव पर रोहिणी प्रसाद गुप्ता और अन्य विरुद्ध एमपी सरकार के मामले में न्यायालयीन आदेशों के अनुपालन में कार्यभारित स्थापना में नियुक्तियों से संबंधित विषय को मंजूरी। किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग के अंतर्गत सेवानिवृत्त उप संचालक जीएस चौहान को संविदा नियुक्ति दिए जाने और कुटीर एवं ग्रामोद्योग विभाग के प्रस्ताव पर सलामुद्दीन अंसारी सेवानिवृत्त सहायक संचालक से पेंशन वापसी के संबंध में निर्णय लिया गया।


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