सतना जिला अस्पताल में अव्यवस्थाओं का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा। पीकू वार्ड में हंगामे के बीच बच्चे की मौत हो गई, वार्ड नंबर 8 में नवजात की मां से पोंछा लगवाया गया और हाईरिस्क प्रसूता को स्ट्रेचर तक नसीब नहीं हुआ।

हाइलाइट्स
सतना, स्टार समाचार वेब
बीते एक माह में जिला अस्पताल के विभिन्न वार्डों में चिकित्सकों के साथ होने वाली अभद्रता व झूमाझटकी ने जिला अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था पर सवालिया निशान खड़े कर दिये हैं। पिछली घटनाओं से सबक लेकर अस्पताल प्रबंधन मेडिकल स्टॉफ की सुरक्षा की रूपरेखा तैयार ही कर रहा था कि बीती रात जिला अस्पताल के पीकू वार्ड में एक बार फिर हंगामे की स्थिति निर्मित हो गई। चिकित्सकों को वार्ड से निकल कर भागना पड़ा, आनन- फानन में बच्चे को भर्ती तो किया गया लेकिन अंत में बच्चे ने दम तोड़ दिया।
इंट्रेफलाइटिस बीमारी से पीड़ित था बच्चा
बताया गया कि शनिवार की दोपहर मझगवां निवासी अंश वर्मा उम्र साढ़े 3 साल झटके आने की शिकायत पर बच्चा वार्ड में भर्ती किया गया था। देर रात्रि इंट्रेफलाइटिस की बीमारी से पीड़ित बच्चे को वार्ड स्टाफ द्वारा पीकू वार्ड के डाक्टरों से सलाह लेने के लिए कहा गया।
परिजन जब पीकू वार्ड में डाक्टरों से सलाह लेने के लिए पहुंचे तो डा. सुरेश प्रजापति ने बताया कि बच्चा इंट्रेफलाइटिस बीमारी से पीड़ित है, जिसके कारण बच्चे के ब्रेन में इनफेक्शन बढ़ गया है, स्थितियां और भी गंभीर होती जा रही हैं। बच्चे को और तेजी से झटके आना चालू हो जाएंगे, ऐसी स्थिति में बच्चे को वेंटीलेटर में रख कर इलाज करना जरूरी है। चिकित्सकों के मुताबिक बच्चे को भर्ती कराने केवल महिलाएं पहुंची थी जिनके समझ में नहीं आ रहा था। चिकित्सकों द्वारा जब पुरुष परिजनों को बुलाने के लिए कहा गया तब स्थिति और गंभीर हो गई। बताया गया कि इलाज कराने पहुंची महिलाओं ने पुरुष परिजनों को कहा कि चिकित्सक इलाज कराने के लिए तैयार ही नहीं है। वे यह कह रहे हैं कि बच्चा गंभीर होते जा रहा है, बच्चे को वेंटीलेटर में लेना अति जरूरी है। स्थितियां समझ न आने के चलते वार्ड में हंगामे की स्थिति निर्मित हो गई। पुरुष परिजनों द्वारा चिकित्सकों से अभद्रता की गई। मौके पर इलाजरत चिकित्सक वार्ड से निकल कर बाहर भाग गए। यह सब देखकर परिजनों ने जिला अस्पताल में डाक्टरों के खिलाफ चिल्लाना चालू कर दिया। परिजनों द्वारा कहा गया कि चिकित्सक इलाज करने में गंभीर नहीं हैं। चिकित्सकों ने हंगामे के बाद सीनियर अधिकारी से बात की जिस पर सीनियर ने उन्हें धैर्य रख इलाज करने के लिए कहा। इसके बाद जूनियर डाक्टरों द्वारा बच्चे को इलाज के लिए वार्ड में भर्ती कराया, लेकिन तब तक बहुत देर हो गई थी। बताया गया कि बच्चे को वेंटीलेटर लगाते हुए बच्चे की मौत हो गई।
पोंछा लगाने मजबूर हुई नवजात की मां
जिला अस्पताल के सफाई कर्मी भी अपने आप को किसी विशेषज्ञ से कम नहीं मानते। साफ-सफाई के नाम पर ये मरीजों से चंदा तो वसूलते है हैं साथ ही इनकी साफ-सफाई में जरा सी किसी ने उंगली उठाई या गंदगी की तो ये धौंस दिखाकर उससे साफ भी करवाते हैं। रविवार को ऐसा ही मामला जिला अस्पताल के वार्ड नंबर 8 में देखने को मिला जब सफाईकर्मी द्वारा नवजात की मां से फर्श की सफाई करने को कहा गया और नवजात को गोद में लिए मां ने फर्श की सफाई की। बताया गया कि ग्राम घडेरुआ रेहुटा निवासी जिज्ञाशा यादव पति ओमप्रकाश यादव बीमार बच्चे को लिए वार्ड क्रमांक 8 यानि शिशु वार्ड के बाहर बैठी थी। उसी समय सफाईकर्मी महिला द्वारा वार्ड की साफ-सफाई की जा रही थी। बताया गया कि महिला का बच्चा बुखार से पीड़ित था और अचानक से उसने फर्श पर ही यूरिन कर दी। यह देखते ही महिला सफाईकर्मी जोर-जोर से पीड़ित बच्चे की मां को चिल्लाने लगी और मौके पर ही यूरिन साफ करने को कहा। महिला ने कहा की गलती से बच्चे ने ये गन्दगी कर दी तो महिला सफाईकर्मी ने धौंस दिखाना भी शुरू कर दिया। अंत में मासूम को गोद में लेकर ही पीड़ित महिला द्वारा फर्श की सफाई की गई।
इधर प्रसूता को नहीं मिली स्ट्रेचर
जिला अस्पताल में रविवार को इलाज के लिए मैहर से रेफर होकर आई प्रसूता को स्ट्रेचर या व्हील चेयर न मिलने का मामला भी देखने को मिला। बताया गया कि दोपहर में मैहर सिविल अस्पताल से हाई रिस्क प्रसूता को डिलेवरी के लिए जिला अस्पताल रेफर किया गया था। जननी से रेफर होकर आई हाईरिस्क प्रसूता मैहर निवासी पूजा को स्ट्रेचर एवं व्हील चेयर मौके पर उपलब्ध नहीं हुई, गंभीर प्रसूता परिजनो के सहारे पैदल चलकर गायनी वार्ड तक पहुंची।


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