पश्चिमी विक्षोभ से बदले मौसम का असर स्वास्थ्य पर दिखा। सतना जिला अस्पताल की ओपीडी में मरीजों की संख्या अचानक बढ़ी, वायरल और श्वसन रोग प्रमुख रहे।

हाइलाइट्स
सतना, स्टार समाचार वेब
पश्चिमी विक्षोभ के चलते इन दिनों मौसम के दो रंग देखने को मिल रहे हैं। दोपहर में कड़ी धुप के चलते लोगों को गर्मी महसूस हो रही है वहीं रात में खासी ठण्ड भी देखने को मिल रही है। इस प्रकार के मौसम परिवर्तन से बीमारियों का ग्राफ फिर बढ़ रहा है। सोमवार को जिला अस्पताल में मरीजों की संख्या में एकाएक इजाफा देखने को मिला। नए साल में पहली बार ठण्ड के सीजन में मरीजों की ऐसी भीड़ देखने को मिली। ठण्ड के चलते ओपीडी एक हजार से 1200 के बीच रहती थी। लेकिन सोमवार को सुबह से ही अपना ओपीडी पर्चा बनवाने मरीज परिजन लाइन में खड़े नजर आए। आलम यह रहा कि ओपीडी में पैर रखने तक की जगह नहीं थी। लाइन में खड़े मरीज और मरीज के परिजन अपने नंबर का इंतजार करते नजर आये। छुट्टी के बाद सोमवार को जिला अस्पताल में 1726 मरीजों ने अपना पंजीयन कराकर ओपीडी में इलाज करवाया जिसमे से 191 अति गंभीर मरीजों को भर्ती किया गया। चिकित्सकों के मुताबिक इस समय मरीज में फिर से वायरल अटैक देखने को मिल रहा है। मरीजों में बुखार, खांसी,उल्टी-दस्त, पेट दर्द और श्वसन संबंधी समस्याएं देखने को मिल रही हैं। चिकित्सकों का अनुमान है कि गर्मी बढ़ते ही मरीजों की भीड़ और बढ़ेगी।
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ईसीजी और एक्स-रे में भी भीड़
ओपीडी में आने वाले 20 फीसदी मरीजों का बीपी बढ़ा हुआ था और चेस्ट पेन की शिकियत बनी हुई थी। चिकित्सकों द्वारा इन मरीजों का बीपी जांच कर ईसीजी के लिए भेजा गया। चेस्ट पेन के मरीजों के चलते ईसीजी कक्ष में भी मरीजों की भीड़ रही। वहीं खांसी और निमोनिया से पीड़ित मरीज एक्स रे में जांच कराने पहुंचे।
मेडिसिन की ओपीडी में लम्बी कतार
जिला अस्पताल की नवीन ओपीडी में संचालित दोनों मेडिसिन ओपीडी कक्ष में मरीजों की लम्बी कतार देखने को मिली सोमवार को 350 से अधिक मरीजों ने अपना इलाज करवाया जहां 70 से अधिक अति गंभीर मरीजों को भर्ती होने की सलाह दी गई। बताया गया कि 70 फीसदी मरीज वायरल बुखार एवं 20 फीसदी मरीज शुगर-बीपी के थे। इसके अलावा कई मरीजों में खांसी के बाद चेस्ट पेन की शिकायत भी थी। चेस्ट पेन के मरीजों को एक्सरे और ईसीजी जांच कराने की सलाह भी दी गई। मौसम परिवर्तन से अस्थमा और श्वसन से संबंधित मरीजों में बृद्धि देखने को मिली है।
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वर्तमान में चेस्ट पेन और सर्दी-जुकाम, खांसी, निमोनिया के मरीजों की संख्या सर्वाधिक आ रही है। मरीजों में अगर कफ 7 दिन से कम का है तो वायरल से सम्बंधित ट्रीटमेंट किया जाता है। अगर मरीज 7 दिन से ज्यादा कफ या बुखार से पीड़ित है तो चेस्ट एक्स रे कराकर निमोनिया आदि का इलाज किया जाता है।
डॉ. विक्रम सिंह एमडी, मेडिसिन, जिला अस्पताल
बदलते मौसम में बच्चो में इस समय तेज बुखार,खांसी,निमोनिया, श्वांस की बीमारी, इंफेक्शन और कमजोरी जैसे लक्षण देखने को मिल रहे हैं। वायरल बुखार के बाद कई बच्चों को चक्कर जैसे लक्षण भी नजर आ रहे हैं जिन्हे भर्ती कर सिटी स्कैन जांच कराई जा रही है। बच्चों में बुखार आते ही चिकित्सक से संपर्क करें ताकि दिमागी बुखार न चढ़े।
डॉ. संजीव प्रजापति, शिशु रोग विशेषज्ञ

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