सतना जंक्शन पर रेलवे को हर माह भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। पार्किंग ठेका सरेंडर होने से 5.5 लाख और कोच रेस्टोरेंट बंद होने से 2 लाख रुपए का राजस्व घटा है। ठेकेदारों की अरुचि, बार-बार फेल हो रहे टेंडर और यात्रियों की सुरक्षा व्यवस्था नदारद होने से स्टेशन की व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

हाइलाइट्स
सतना, स्टार समाचार वेब
अब इसे रेल अधिकारियों का कुप्रबंधन कहें या फिर रेलवे के कामों से ठेकेदारों की बढ़ती अरूचि कि एक ओर जहां मंडल के विभिन्न स्टेशनों में रेल परिसर की व्यवसायिक गतिविधियों को संचालित करने की होड़ लगी हुई है तो दूसरी ओर वर्ल्ड क्लास स्टेशन बनने की ओर अग्रसर सतना जंक्शन से व्यवसायिक गतिविधियों का संचालन करने वाले दूरी बढ़ा रहे हैं। नतीजतन रेलवे को राजस्व की भारी चपत लग रही है। पार्किं ग ठेका सरेंडर होने के बाद हर माह रेलवे को जहां साढ़े 5 लाख रुपये से अधिक की तो रेल कोच रेस्टारेंट बंद होने से हर माह 2 लाख रूपए का नुकसान उठाना पड़ रहा है। अब सवाल यह उठता है कि आखिर सतना जंक्शन में ऐसा क्या है कि ठेकेदार तय अवधि के पहले ही ठेका छोड़ देते हैं। रेलवे प्रशासन दोबार टेंडर करता है तो ठेकेदार ढूंढे नहीं मिलते और बार-बार टेंडर प्रक्रिया अपनानी पड़ती है।
जनवरी से बंद है कोच रेस्टोरेंट
आय बढ़ाने के अलावा यात्री व शहरवासियों को 24 घंटे व हफ्ते के सातों दिन स्वादिस्ट व लजीज व्यंजन उपलब्ध कराने की मंशा से सतना स्टेशन के बाहर कोरोना काल में अगस्त 2021 में खोला गया रेल कोच रेस्टोरेंट जनवरी माह से लाइसेंस फीस नहीं जमा करने के कारण बंद है। लेट फीस लाइसेंस के चलते रेलवे ने ठेका टर्मिनेट करते हुए सुरक्षा राशि जप्त करने की कार्रवाई की थी । उस दौरान कबाड़ कोच को रंग-रोगन कर के आकर्षक बनाया गया था, जो लगातार बंद होने के कारण फिर कबाड़ में तब्दील होकर शराबियों व असमाजिक तत्वों का अड्डा बन गया है। गार्डन गंदगी से पट गया है।
5 सालों का था अनुबंध
स्टेशन में रेल कोच रेस्टोरेंट को संचालित करने का ठेका संविदाकार निखिलेश त्रिपाठी ने लिया था। रेलवे ने गैर किराया राजस्व विचार योजना के तहत 5 सालों के लिए टेंडर दिया। जानकारों के अनुसार कोच रेस्टोरेंट से रेलवे को लगभग 16.80 लाख प्रतिवर्ष आय निर्धारित थी। रेलवे ने शर्तों के अनुसार लाइसेंस फीस भी बढ़ाई थी। पश्चिम मध्य रेलवे जोन के जबलपुर मंडल के पांच स्टेशनों में कोच रेस्टोरेंट खोले गए थे जिसमें जबलपुर, मदन महल, कटनी मुड़वारा, सतना एवं रीवा स्टेशन चयनित था। सबसे ज्यादा रेलवे को आय कटनी मुड़वारा के बाद सतना से हो रही थी क्योंकि यहां सबसे महंगा कोच रेस्टोरेंट का ठेका था, वहीं इसके तीसरे नम्बर पर जबलपुर स्टेशन था। रेलवे ने 1200 वर्गफिट का क्षेत्र कोच रेस्टोरेंट के लिए दिया था।
2 माह में 4 टेंडर फिर भी नहीं मिले ठेके दार
स्टेशन के पूर्वी दिशा की तरफ संचालित रेलवे की पार्किंग ठेका व्यवस्था 22 जून की रात से खत्म है। दो माह में रेलवे ने 4 बार कोटेशन व्यवस्था के तहत टेंडर निकाल चुका है लेकिन कोई भी ठेकेदार 45 दिनों की पार्किंग ठेका के लिए 8 लाख 22 हजार का आरक्षित मूल्य देने को तैयार नहीं हैं और निविदा बार-बार फेल हो जाती है।
वहीं रेलवे दूसरी बार ई-टेंडर प्रक्रि या अपनाने की तैयारी में है। मंडल रेल अधिकारियों ने बताया कि 29 अगस्त को दूसरी बार ई-टेंडर पार्किंग के लिए निकाले गए है। उल्लेखनीय है कि स्टेशन में ईस्ट साइड का पार्किंग ठेका 20 मई 2022 को सुशील कुमार पांडेय को दिया था। ठेका शर्तो के अनुसार टेंडर की अवधि 19 मई 2027 तक थी। रेलवे ने 10 प्रतिशत पार्किंग में बढ़ोत्तरी कर दी , जिसके कारण ठेकेदार ने पार्किंग ठेका सरेंडर कर दिया।
कई वाहन हो चुके पार, सुरक्षा बल नदारद
पार्किंग ठेका खत्म होने से स्टेशन के पूर्वी दिशा की तरफ यात्रियों को अपने वाहन भागवान भरोसे खड़े करने पड़Þ रहे हैं। बताया गया कि लगभग एक दर्जन वाहन चोरी हो चुके है तो वहीं दो पहिया वाहनों के आए दिन पेट्रोल चोरी के मामले सामने आ रहे है। पार्किंग स्थल में न तो सीसीटीवी कैमरा है और न ही आरपीएफ एवं जीआरपी के जवान तैनात रहते। सुरक्षा बल की ड्यूटी न होने से असमाजिक तत्वों के हौसले बढ़ रहे हैं। बताया गया कि इसी माह पार्किंग स्थल में एक बाइक को किसी ने आग के हवाले कर दिया था।


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