मध्यप्रदेश में समर्थन मूल्य पर मूंग खरीदी किसानों के लिए मुसीबत बन गई है। सतना और मैहर जिलों में लक्ष्य से अधिक खरीदी गई 2505 क्विंटल मूंग का 56 लाख रुपए भुगतान अटका हुआ है। प्रदेशभर में 1.38 लाख किसानों के 3398 करोड़ रु. रुके हैं। भुगतान न मिलने से किसान कर्ज में डूबकर खाद तक उधारी पर लेने को मजबूर हैं।

हाइलाइट्स
सतना, स्टार समाचार वेब
प्रदेश सरकार द्वारा समर्थन मूल्य पर मूंग की खरीदी भले ही किसानों को राहत देने के उद्देश्य से शुरू की गई हो, लेकिन निर्धारित लक्ष्य से अधिक उपज लेने के बाद अब यह राहत किसानों के लिए परेशानी का सबब बन गई है। सतना और मैहर जिलों में पहली बार ग्रीष्मकालीन मूंग की खरीदी हुई, परंतु अब आधा सैकड़ा से अधिक किसानों का उपज मूल्य अटक गया है। वजह सरकार तय नहीं कर पा रही कि लक्ष्य से अधिक खरीदी गई उपज का भुगतान किसके खाते से किया जाए। इधर जब पहले से ही खरीदी का लक्ष्य तय था, तो अधिक खरीदी क्यों की गई? और यदि कर ली गई, तो अब किसानों को समय पर भुगतान देने में देरी क्यों? किसानों की आय और सम्मान की बात करने वाली सरकार को इस मसले पर तुरंत निर्णय लेना होगा। वरना समर्थन मूल्य की यह योजना खुद किसानों के लिए असमर्थन योजना बनकर रह जाएगी।
पहली बार सतना में मूंग तथा मैहर जिले में मूंग व उड़द की सरकारी खरीदी गई है। मूंग को 8682 रूपए व उड़द को 7400 रूपए के समर्थन मूल्य पर बेचने के लिए कृषि विभाग ने मैहर जिले में मूंग व उड़द के लिए 113 किसानों के जबकि सतना जिले में मूंग की उपज बेचने के लिए 248 किसानों का पंजीयन किया था । सतना जिले में मूंग खरीदी के लिए दो केंद्र रामानुजम विपणन सहकारी समिति रामपुर व सहकारी विपणन समिति उचेहरा में जबकि मैहर में मूंग व उड़द के लिए शारदा विपणन सहकारी मर्यादित समिति को खरीदी केंद्र बनाया गया था । जानकारी के अनुसार सतना व मैहर जिले को मार्कफेड के माध्यम से मूंग खरीदी का कुल 1500 क्विंटल का लक्ष्य दिया गया था। लेकिन वास्तविकता में सतना जिले से 1000 की जगह 1794 क्विंटल और मैहर से 500 की जगह 711 क्विंटल मूंग खरीदी गई। इस तरह दोनों जिलों से कुल 2505 क्विंटल मूंग की खरीदी हो गई। निर्धारित लक्ष्य से अधिक उपज खरीदे जाने पर सरकार ने खरीदी रोकते हुए भुगतान पर रोक लगा दी।
किसानों की रकम फंसी, गुहार सीएम हेल्पलाइन से
सतना जिले के 165 व मैहर के 37 किसानों से खरीदी गई मूंग का कुल मूल्य लगभग 1 करोड़ 56 लाख रुपए बनता है। लेकिन इसमें से करीब 56 लाख रुपए का भुगतान रोक दिया गया है, क्योंकि यह राशि लक्ष्य से अधिक खरीदी गई उपज से संबंधित है। भुगतान नहीं मिलने के कारण कई किसान अब सीएम हेल्पलाइन के माध्यम से सरकार से गुहार लगा रहे हैं।
प्रदेशभर में 1.38 लाख किसानों के 3398 करोड़ फंसे
यह समस्या केवल सतना और मैहर तक सीमित नहीं है। प्रदेशभर में 1.38 लाख से अधिक किसानों का कुल 3398 करोड़ रुपए का भुगतान अटका हुआ है। अकेले नर्मदापुरम जिले में 31 हजार किसानों के 907 करोड़ और नरसिंहपुर में 27 हजार किसानों के 598 करोड़ रुपए अटके हुए हैं। इंदौर को छोड़ दें तो शायद ही कोई जिला ऐसा हो, जहां किसानों का भुगतान नहीं रुका हो।
समस्या की जड़ खाते का निर्धारण नहीं
विभागीय अधिकारियों के अनुसार खरीदी अब तक एनसीसीएफ (राष्ट्रीय सहकारी उपभोक्ता संघ) के खाते से की जा रही थी, इसीलिए पूरा भुगतान भी उसी के माध्यम से होता था। लेकिन अब समस्या यह है कि लक्ष्य से अधिक खरीदी गई उपज का भुगतान किस खाते से किया जाए, इस पर अब तक निर्णय नहीं लिया जा सका है।
भुगतान न होने से खाद भी कर्ज से
किसानों का कहना है कि मूंग की खेती में लागत अधिक लगती है और वे अक्सर कर्ज लेकर खेती करते हैं। उम्मीद होती है कि फसल बेचकर समय पर कर्ज चुकता करेंगे। लेकिन इस बार न केवल खरीदी देरी से शुरू हुई, बल्कि भुगतान भी लटक गया। मजबूरी में किसानों ने उधारी लेकर रक्षाबंधन तो जैसे तैसे मना लिया लेकिन अब खरीफ की खेती कैसे करें। इन दिनों उन्हें खाद की जरूरत है लेकिन भुगतान न होने से हाथ तंग हैं और उन्हें खाद के लिए भी कर्ज लेना पड़ रहा है।


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