सतना नगर निगम ने 66 जर्जर भवन चिन्हित तो किए, पर कार्रवाई भूल गया। पूर्व में हो चुकी मौतों से भी सबक नहीं लिया गया, बरसात में बना है हादसे का खतरा।

पूर्व में हो चुकी मौतों से भी अफसर सबक लेने तैयार नहीं
सतना, स्टार समाचार वेब
प्यास लगने के बाद कुंआ खोदने के आदी हो चुके नगर निगम को शायद किसी हादसे का इंतजार है। तभी तो जर्जर भवन चिन्हित कर उन पर कार्रवाई करना ननि के अधिकारी भूल गए हैं। निगम ने शायद पूर्व में जर्जर भवनों की वजह से हुए हादसे और उन हादसों में लोगों की मौत से कोई सबक नहीं लिया है। शहर में कई ऐसे जर्जर भवन हैं जो मानव जीवन के लिए बरसात में खतरा बन सकते हैं। मानव जीवन के लिए खतरा बन चुके इन जर्जर भवनों को निगम हर वर्ष चिन्हित करता है पर बाद में वह कार्रवाई करना भूल जाता है। नगर निगम के साथ भी वही हो रहा है। पिछले वर्ष शहर में नगर निगम ने 66 जर्जर भवन चिन्हित किए थे और उन भवनों में जो कमियां थीं उन्हें दूर करने से संबंधित एक नोटिस भी जारी की गई थी।
कई निजी तो कुछ व्यवसायिक संस्थान
नगर निगम ने पिछले वर्ष जिन 66 जर्जर भवनों को चिन्हित किया था, उनमें से कुछ भवन निजी आवास थे तो कुछ व्यवसायिक संस्थान चल रहे हैं। वैसे देखा जाए तो शहर में नगर निगम ने जितने भी जर्जर भवन चिन्हित किए हैं उससे कई ज्यादा जर्जर भवन शहर में हैं और वे काफी जर्जर हैं जो कभी भी गिर सकते हैं।
कई बार हो चुके हैं हादसे
बरसात के मौके पर जर्जर भवनों के गिरने के मामले हर वर्ष सामने आते हैं। जर्जर भवनों के गिरने से शहर में कई मौतें हो चुकी हैं। हर बार हादसे के बाद जर्जर भवन चिन्हित करने और जर्जर भवनों के खिलाफ कार्रवाई की बात आती है। लेकिन यह सब कागजों तक में ही सिमट कर रह जाता है।
एक साल पहले नोटिस
नगर निगम वैसे तो बरसात के समय हर वर्ष जर्जर भवन चिन्हित करता है लेकिन इन भवनों को गिराने व उनमें सुधार की पहल नहीं होती है। पिछले वर्ष भी नगर निगम ने जर्जर भवनों को चिन्हित किया जिसमें से ज्यादातर जस के तस खड़े हुए हैं। कार्रवाई के नाम पर इन भवन स्वामियों को निगम ने एक कागज का टुकड़ा (नोटिस) थमाया था जिसे देकर निगम भूल गया और पाने वाले ने उस कागज के टुकड़े को रद्दी की टोकरी में फेंक दिया। यहां उल्लेखनीय है कि निगम ने शहर में चिन्हित किए गए जर्जर भवनों व्यवसायिक संस्थानों को 22 मई 2024 को नोटिस जारी की थी और चेतावनी दी थी कि सभी जर्जर भवनों को तीस दिनों के अंदर गिरा लें अथवा उसमें सुधार कर लें।
28 साल पुराने भवन
नगर निगम ने पिछले वर्ष शहर में जिन 66 जर्जर भवनों को सूचीबद्ध किया था उसमें से सभी भवन 1997 के पहले के थे। इन भवनों में कमियों की टीप के साथ भवन स्वामियों को नोटिस जारी कर उसमें सुधार करने व उसे गिराने के लिए कहा गया लेकिन ज्यादातर भवन व संस्थान जस के तस खड़े हैं।

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