जिला अस्पताल के एनआरसी में 2012-13 से पुरुष केयरटेकरों की तैनाती पर सवाल उठे हैं। महिला कर्मियों की नियुक्ति संबंधी गाइडलाइन और पुराने आदेशों के बावजूद व्यवस्था नहीं बदली, अब कार्रवाई की उम्मीद।

हाइलाइट्स:
सतना, स्टार समाचार वेब
जिला अस्पताल परिसर में संचालित पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) में पुरुष केयरटेकरों की वर्षों से तैनाती को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। आरोप है कि यह व्यवस्था राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) की गाइडलाइन के विपरीत है, जिसमें स्पष्ट रूप से एनआरसी में महिला केयरटेकरों की पदस्थापना का प्रावधान बताया गया है। इसके बावजूद अस्पताल प्रबंधन न केवल इस व्यवस्था को जारी रखे हुए है, बल्कि पूर्व में जारी प्रशासनिक आदेशों का भी पालन नहीं किया गया। सूत्रों के अनुसार एनआरसी में आउटसोर्स एजेंसी के माध्यम से धर्मदास तिवारी और रामभिलाश शुक्ला वर्ष 2012-13 से केयरटेकर के रूप में कार्यरत हैं। इस दौरान कई बार उन्हें अन्यत्र स्थानांतरित कर महिला कर्मियों की नियुक्ति करने की कोशिश हुई, लेकिन मामला हर बार ठंडे बस्ते में चला गया।
मझगवां में भी था ऐसा मामला, हुई थी कार्रवाई
जानकारी के मुताबिक तत्कालीन मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. एल.के. तिवारी ने जिले के सभी एनआरसी में केवल महिला कर्मियों की पदस्थापना सुनिश्चित करने के निर्देश जारी किए थे। इसके बावजूद जिला अस्पताल के एनआरसी में स्थिति जस की तस बनी हुई है। इससे यह सवाल उठ रहा है कि आखिर ऐसे आदेशों का पालन क्यों नहीं कराया गया और जिम्मेदार अधिकारी मौन क्यों हैं? यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि जिले के मझगवां एनआरसी में इसी तरह के विवाद के बाद पुरुष केयरटेकर को हटाकर महिला कर्मी की नियुक्ति की गई थी। बताया जाता है कि उस मामले की सुनवाई न्यायालय तक पहुंची थी और न्यायालय के निर्देशों के बाद महिला कर्मी की पदस्थापना की गई। ऐसे में जिला अस्पताल के एनआरसी में अलग व्यवस्था बने रहने पर सवाल और गहरे हो गए हैं।
आउटसोर्स कर्मियों पर मेहरबानी क्यों?
चर्चा इस बात की भी है कि आउटसोर्स एजेंसी के इन कर्मचारियों को वर्षों से उसी स्थान पर बनाए रखने के पीछे क्या कारण हैं। यदि एनएचएम की गाइडलाइन महिला कर्मियों की नियुक्ति का निर्देश देती है, तो फिर इन पुरुष कर्मियों को किसी अन्य इकाई में समायोजित कर महिला केयरटेकरों की नियुक्ति क्यों नहीं की जा रही? यह सवाल अस्पताल प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर भी उंगली उठाता है।
गाइडलाइन क्या कहती है?
एनएचएम की गाइडलाइन के अनुसार पोषण पुनर्वास केंद्रों में महिला केयरटेकरों की पदस्थापना की जानी चाहिए, ताकि कुपोषित बच्चों और उनके साथ रहने वाली माताओं की देखभाल संवेदनशील एवं सुरक्षित वातावरण में हो सके। यदि किसी केंद्र में पुरुष कर्मी कार्यरत हों, तो उन्हें अन्यत्र पदस्थ कर महिला कर्मियों की नियुक्ति किए जाने का प्रावधान बताया जाता है। अब देखना होगा कि वर्षों से लंबित इस मामले में स्वास्थ्य विभाग गाइडलाइन और पूर्व प्रशासनिक आदेशों का पालन सुनिश्चित करता है या यह मुद्दा भी फाइलों तक ही सीमित रह जाता है।
एनआरसी में पदस्थ दोनों पुरुष कर्मियों की पदस्थापना हमारे कार्यकाल के पहले से है, मामला संज्ञान में आया है, शासन के निर्देश पर कार्रवाई की जाएगी।
डॉ. अमर सिंह, सिविल सर्जन, जिला अस्पताल सतना


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