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29 लाख के फर्जी बिल घोटाले में ठेकेदार पर एफआईआर, छह स्कूलों के हस्ताक्षर जालसाजी

सतना में छह शासकीय स्कूलों के प्राचार्यों के फर्जी हस्ताक्षर कर 29 लाख रुपये के बिल लगाने वाले संविदाकार पर सिटी कोतवाली में धोखाधड़ी और जालसाजी का केस दर्ज हुआ है।

By: Yogesh Patel

Jan 24, 20261:39 PM

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29 लाख के फर्जी बिल घोटाले में ठेकेदार पर एफआईआर, छह स्कूलों के हस्ताक्षर जालसाजी

हाइलाइट्स

  • छह स्कूलों के नाम पर 28.98 लाख रुपये के फर्जी मरम्मत बिल लगाए गए
  • प्राचार्यों ने हस्ताक्षर और कार्य दोनों से किया साफ इनकार
  • सीएम हेल्पलाइन जांच के बाद शिक्षा विभाग में बड़े घोटाले के संकेत

सतना, स्टार समाचार वेब

लगभग 29 लाख रुपए के फर्जी बिल के लिए जिले की 6 स्कूलों के प्राचार्यों के फर्जी हस्ताक्षर करना एक संविदाकार को उस वक्त भारी पड़ गया जब सिटी कोतवाली पुलिस ने ठेकेदार के खिलाफ जालसाजी व धोखाधड़ी की धाराओं में प्रकरण पंजीबद्ध कर लिया। दरअसल, मऊगंज के खटखरी निवासी सत्यव्रत तिवारी द्वारा जिले के 6 स्कूलों में भवन मरम्मत, रंगाई एवं पुताई के नाम पर 28 लाख 98 हजार रुपए का बिल लगाया गया था। सत्यव्रत कंसट्रक्शन के संचालक पर आरोप है कि इन विद्यालयों में काम करने का जो बिल संविदाकार द्वारा लगाया गया है उसमें प्राचार्यों के फर्जी हस्ताक्षर किए गए हैं। 

डीईओ ने लिखा था सिटी कोतवाली को पत्र 

संविदाकार द्वारा फर्जी भुगतान के बिल लगाए जाने का मामला सामने आने पर जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा संविदाकार के खिलाफ एफआईआर दर्ज किए जाने को लेकर सिटी कोतवाली को पत्र लिखा गया था। शिक्षा विभाग की तरफ से विभाग के लिपिक पवन कुमार श्रीवास्तव पिता स्व. संतोष कुमार श्रीवास्तव उम्र 45 वर्ष निवासी चांदमारी रोड धवारी गली नं. 1 द्वारा 12 जनवरी को संविदाकार सत्यव्रत तिवारी के खिलाफ एक आवेदन दिया गया था जिसमें उन पर 6 शालाओं के मरम्मत कार्य का फर्जी देयकों का भुगतान प्राप्त करने के लिए देयक प्रस्तुत करने का आरोप लगाया गया था। विभागीय लिपिक के आवेदन पर सिटी कोतवाली पुलिस ने धारा 316(5), 62 318(4), 336(3) बीएनएस के तहत प्रकरण दर्ज कर मामले की विवेचना शुरू कर दी है। 


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प्राचार्यों से कराया गया था फाइलों का सत्यापन 

सिटी कोतवाली में जिला शिक्षा अधिकारी की तरफ से लिपिक द्वारा दिए गए शिकायती आवेदन में बताया गया था कि संविदाकार सत्यव्रत तिवारी द्वारा जिन 6 शालाओं में मरम्मत, रंगाई व पुताई के कार्य के भुगतान के लिए बिल लगाया था, उसकी फाइल जब जिला शिक्षा कार्यालय को प्राप्त हुई तो उसमें प्रथम दृष्टया प्राचार्यों के हस्ताक्षर को संदिग्ध पाते हुए सभी स्कूलों की फाइलों का सत्यापन उन स्कूलों में पदस्थ प्राचार्यों से कराया गया। जिस पर विद्यालयों के प्राचार्य ने बताया कि जो फाइल भुगतान के  लिए जिला शिक्षा अधिकारी के कार्यालय में पेश की गई है उसमें उनके हस्ताक्षर नहीं हैं, न ही उनमें अंकित जावक क्रमांक उनकी संस्था के हैं। इतना ही नहीं प्राचार्यों ने अपने जवाब में यहां तक कहा कि संस्था में कोई भी मरम्मत व सुदृढ़ीकरण का कार्य नहीं कराया गया है। 

रामनगर के एक दर्जन विद्यालय जल्द ही जांच के घेरे में

सतना-मैहर जिले के शासकीय स्कूलों में मरम्मत कार्य के नाम पर खुलेआम किए गए भ्रष्टाचार की परतें सामने आने लगी हैं।  विभाग और ठेकेदारों की मिलीभगत से सरकारी राशि की खुली लूट की जा रही है, जबकि स्कूलों की हालत बद से बदतर बनी हुई है। कागजों में लाखों रुपये की मरम्मत दिखाकर भुगतान उठा लिया गया, लेकिन जमीनी हकीकत पोल खोलने वाली है।  कई विद्यालयों में छतों से पानी टपकता रहता है, दीवारों में गहरी दरारें हैं और फर्श उखड़ा हुआ है। शौचालय बदहाल पड़े हैं। मैहर जिले के रामनगर विकासखंड की दर्जन भर स्कूलों में हुए मरम्मत के कार्य जांच के घेरे में आ रहे हैं। जानकारी के अनुसार डीपीआई से वित्ती स्वीकृति जारी कर दी थी लेकर जेडी एवं डीईओ को इस संबंध में सूचना ही नहीं पहुंची। ऐसे में कई सवाल उठ रहे हैं कि क्या डीपीआई में बैठे कुछ लोगों की सह से घोटाले हो रहे हैं?


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सीएम हेल्पलाइन ने खोल दी घोटाले की पोल 

सीएम हेल्पलाइन की जांच के बाद घोटाले की परतें सामने आ रही है। घटिया निर्माण कार्य की शिकायत सीएम हेल्पलाइन क्रमांक 35349465 के माध्यम से 14 नवंबर 2025 को दर्ज कराई गई थी। जांच प्रतिवेदन में यह सनसनीखेज तथ्य सामने आया कि शासकीय हाईस्कूल सुलखमा के तत्कालीन प्राचार्य द्वारा निर्धारित शासकीय प्रक्रिया को पूरी तरह दरकिनार करते हुए वाणी इन्फ्रास्ट्रक्चर, विदिशा रोड भोपाल को 23 लाख 81 हजार 222 रुपये के भुगतान की स्वीकृति सितंबर 2025 में ही जारी कर दी गई। इसके आधार पर विकासखंड शिक्षा अधिकारी रामनगर के आदेश क्रमांक /लोशिसं/बजट/लघु निर्माण कार्य/2025-26/27/1488 दिनांक 29 सितंबर 2025 द्वारा कोषालय से देयक का भुगतान भी कर दिया गया।

निलंबित हो चुका प्रभारी प्राचार्य

जांच में जो सबसे गंभीर और चौंकाने वाला तथ्य सामने आया, वह यह है कि संबंधित निर्माण कार्य का वर्क आॅर्डर 25 अक्टूबर 2025 को जारी किया गया। यानी पहले भुगतान और बाद में कार्य आदेश जो सीधे-सीधे शासकीय वित्तीय नियमों की धज्जियां उड़ाने जैसा है। हालांकि इस मामले में 12 जनवरी को जिला शिक्षा अधिकारी कंचन श्रीवास्तव ने प्रभारी प्राचार्य रामलाल साकेत (मूल पद सहायक शिक्षक) को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया था। 

मैहर कलेक्टर के संज्ञान में मामला 

रामनगर की दर्जन भर स्कूलों में छत,यूरीनल मरम्मत, साइकिल स्टैंड एवं अन्य कार्य व कार्य प्रणाली का मामला मैहर कलेक्टर के संज्ञान में जा पहुंचा है। बताया गया कि दोनों जिलों में केवल रामनगर विकासख्ांड की हाई एवं हायर सेकेंड्री स्कूलों में डीपीआई से सीधे वित्तीय स्वीकृत दी गई है। इस मामले में रामनगर के बीईओ भी घेरे में आ रहे हैं। बताया गया कि उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में कंदवारी, मर्यादपुर, देवराजनगर, मिगरौती, हर्रई, छिरहाई तो वहीं हाई स्कूलों में मझटोलवां, गोविंदपुर, देवरा मोलहाई, बड़वारा, मड़वारा, मनकहरी, एवं  सुलखमा स्कूल जांच के घेरे में आ सकती है। 

किस स्कूल का कितना फर्जी बिल लगाया 

  • सांदीपनी शा. उमावि बगहा : 5 लाख 
  • हाईस्कूल माधवगढ़ : 4 लाख 99 हजार 840 
  • हाईस्कूल मुड़हा : 4 लाख 99 हजार 730 
  • शा.उमावि खम्हरिया तिवारियान : 4 लाख 99 हजार 978 
  • शा. हाईस्कूल सिजहटा : 4 लाख 99 हजार 500 
  • शा. उमावि गौरैया : 4 लाख 99 हजार 245 
  • कुल राशि : 28 लाख 98 हजार 293 रुपए 

(भवन मरम्मत, रंगाई एवं पुताई का लगाया गया है फर्जी बिल)

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