सतना में आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या से हमले बढ़े। रोजाना 30 नए काटने के मामले, विशेषज्ञों ने नसबंदी केंद्र खोलने की जरूरत बताई।
By: Yogesh Patel
Jan 29, 20264:41 PM
हाइलाइट्स
सतना, स्टार समाचार वेब
ओह! बढ़ती आबादी और इससे पैदा हुए खाने की कमी ने इंसान को छोड़ दीजिए कुत्तों तक को नहीं छोड़ा। विशेषज्ञों की राय भी इसी ओर इशारा करती है कि कुत्तों की बढ़ती आबादी ने इनके बीच भूख की एक बड़ी खाई खोद दी है जिसकी तलाश में इनके अंदर चिड़चिड़ापन पैदा कर दिया है। यह बात इसलिए कही जा रही है कि क्योंकि हाल ही में कोठी के गांव पैकोरा में पांच साल की महक के एक सड़क के कुत्ते ने मुंह नोचने का प्रयास किया। इससे उसके खूंखारपने का अंदाजा लगाया जा सकता है। जिला अस्पताल के आंकडेÞ भी इसी बात की तस्दीक करते हैं कि यहां कुत्तों के काटने की घटनाएं बढ़ रहीं हैं।
पहला डोज, डेली 30
सतना में बढ़ रही कुत्तों द्वारा मानव को काटने की घटनाओं ने विशेषज्ञों की पेशानियों में सिकन पैदा कर दी है। इसके लिए जिला अस्पताल के डेली के डाटा पर नजर दौड़ाएं तो 200-250 लोग रोजाना एंटी रैबीज का इंजेक्शन लेने पहुंच रहे हैं। इनमें 30 ऐसे भी है जिन्हे एंटी रैबीज का पहला डोज देना होता है। इससे साफ है कि सतना में कुत्तों द्वारा मानव को काटने की घटनाएं रोजाना 30 के आसपास हो रहीं हैं।
नसबंदी केन्द्रों की जरूरत
सड़कों पर कुत्तों की बढ़ती आबादी को देखते हुए नसबंदी केन्द्रों को खोलने की मांग बढ़ने लगी हैं। यहां के एक संगठन ने इसकी मांग भी लंबे समय से कर रहा है लेकिन अब तक यह फाइनल नहीं हो सका है। पीपुल फॉर एनीमल नामक संगठन करीब डेढ़ साल से कुत्तों के लिए नसबंदी केन्द्र खोले जाने की मांग कर रहा है। हालांकि इस संगठन द्वारा नसबंदी कराई जाती रही है।
सड़कों पर 29 हजार कुत्ते
गांव हो या शहर हर एक के गली मोहल्लों में कुत्तों की आबादी है। यूं तो इनकी तादाद ज्यादा है लेकिन सरकारी आंकड़ों में यह 29 हजार से भी अधिक हैं। पशु चिकित्सा एवं डेयरी विभाग द्वारा की गई 21 वीं पशुगणना के अनुसार सड़कों के कुत्तों की संख्या 29 हजार 1 सौ 96 है इसमें 14 हजार 1 सौ 8 मेल और 15 हजार 88 फीमेल हैं।
आबादी के हिसाब से भोजन कम: डॉ. भारती
इनकी आबादी में लगातार बढ़ोत्तरी हो रही है। जिसके हिसाब से समय पर खाना उपलब्धता कम है। यह कारण है कि उनमें हरमोनल इनबैलेंस आया है। जिससे उन पर चिड़चिड़ापन पैदा हो रहा है। आदमी में यह इसलिए छोटे बच्चों को निशाना बना रहे हैं। वह उनकी हाइट के हिसाब से पहुंच में होते हैं। यह कहना है पशु चिकित्सक ब्रहस्पति भारती का।
मेटिंग पीरियड में भी आया बदलाव: अतुल वोरा
सड़कों के कुत्तों का व्यवहार नहीं बदला उनमें मेटिंग को लेकर जो भी हरमोनल बदलाव आते हैं उसके कारण ही वह अग्रेसिव हो जाता है। ऐसा न होने की दशा में उनमें चिड़चिड़ापन भी हावी हो रहा है। यह कहना है डॉग लवर अतुल वोरा का। वह यह भी कहते हैं इनकी पापुलेशन को नसबंदी के माध्यम से ही रोका जा सकता है।