13 फरवरी को शेयर बाजार में हाहाकार। सेंसेक्स 1048 अंक टूटकर 82,627 पर बंद हुआ। जानें क्यों अमेरिकी AI के डर से गिरे भारतीय IT शेयर

मुंबई। बिजनेस डेस्क। स्टार समाचार वेब
भारतीय शेयर बाजार के लिए शुक्रवार, 13 फरवरी का दिन बेहद निराशाजनक रहा। वैश्विक स्तर पर तकनीकी क्षेत्र में मची खलबली और बिकवाली के भारी दबाव के चलते सेंसेक्स और निफ्टी दोनों ही बड़े नुकसान के साथ बंद हुए। 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 1048 अंक (1.25%) की भारी गिरावट के साथ 82,627 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 50 भी 336 अंक (1.30%) फिसलकर 25,471 के स्तर पर आ गया। बाजार में चौतरफा बिकवाली का आलम यह था कि सेंसेक्स के 30 में से 28 और निफ्टी के 50 में से 45 शेयरों में लाल निशान दर्ज किया गया।
AI के खतरे ने हिलाया IT सेक्टर का भरोसा
बाजार में आई इस बड़ी गिरावट के पीछे मुख्य कारण अमेरिका से आई नकारात्मक खबरें हैं। दरअसल, अमेरिकी बाजारों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को लेकर निवेशकों की चिंताएं बढ़ गई हैं। निवेशकों को डर है कि नई AI तकनीकें पारंपरिक आईटी सेवाओं (IT Services) के अस्तित्व के लिए खतरा बन सकती हैं। चूंकि भारतीय आईटी कंपनियां अपने राजस्व का एक बड़ा हिस्सा अमेरिकी ग्राहकों से प्राप्त करती हैं, इसलिए अमेरिकी आईटी शेयरों में हुई बिकवाली का सीधा और गहरा असर भारतीय बाजार के मेटल, आईटी और एनर्जी शेयरों पर पड़ा है।
वैश्विक बाजारों का हाल: अमेरिका से एशिया तक गिरावट
अमेरिकी बाजारों में गिरावट का सिलसिला काफी तेज रहा, जहाँ डाउ जोन्स 669 अंक (1.34%) गिरकर बंद हुआ। टेक-आधारित इंडेक्स नैस्डैक (Nasdaq) में 2.03% की बड़ी गिरावट देखी गई, जबकि S&P 500 इंडेक्स 1.57% फिसल गया। इस वैश्विक दबाव का असर एशियाई बाजारों पर भी दिखा; जापान का निक्केई 1.21% और हॉन्गकॉन्ग का हैंगसेंग 1.72% की गिरावट के साथ बंद हुए। दक्षिण कोरिया और चीन के बाजारों में भी गिरावट का ही रुख रहा।
लगातार दूसरे दिन गिरावट और निवेशकों का रुझान
यह बाजार में गिरावट का लगातार दूसरा दिन है। इससे पहले 12 फरवरी को भी सेंसेक्स 558 अंक गिरकर 83,675 पर बंद हुआ था। विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की बात करें तो उन्होंने 12 फरवरी को 108 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे, जबकि घरेलू निवेशकों (DII) ने 277 करोड़ रुपये की खरीदारी की। हालांकि, फरवरी महीने में अब तक FII और DII दोनों ही शुद्ध खरीदार रहे हैं, लेकिन वैश्विक अनिश्चितता और AI के बढ़ते प्रभाव ने फिलहाल बाजार की धारणा को कमजोर कर दिया है।

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भारतीय शेयर बाजार के लिए विदेशों से रेड सिग्नल मिल रहे थे और जिसका डर था वही हुआ। आज खुलते के साथ ही शेयर मार्केट औंधे मुंह गिर गया। इस बड़ी गिरावट के बीच पावर ग्रिड, टाटा स्टील, मारुति, एचडीएफसी बैंक, अडानी पोर्ट्स और टाइटन जैसी दिग्गज कंपनियों के शेयर बिखरे हुए दिखाई दिए।
अदाणी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अदाणी ने बिहार में 50,000 से 60,000 करोड़ रुपये के बड़े निवेश का एलान किया है। भागलपुर के पीरपैंती में पावर प्रोजेक्ट और सारण में आई हॉस्पिटल का उद्घाटन। पढ़ें पूरी खबर।
दिल्ली-एनसीआर में सीएनजी के दाम आज एक बार फिर एक रुपए प्रति किलो बढ़ा दिए गए। इससे पहले गैस कंपनियों ने शुक्रवार को सीएनजी की कीमतें दो रुपए प्रति किलो बढ़ा दी थी। पिछले तीन दिन में सीएनजी तीन रुपए महंगी हुई है।
भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में तीन प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी के बाद केंद्र सरकार ने तेल कंपनियों के लिए नियमों में बदलाव किया है। सरकार ने पेट्रोल एक्सपोर्ट पर तीन रुपए प्रति लीटर का विंडफॉल टैक्स लगा दिया है। इसके साथ ही डीजल और जेट फ्यूल पर टैक्स घटाया है।
अमेरिकी प्रतिभूति एवं विनिमय आयोग (SEC) ने गौतम अदाणी और सागर अदाणी के खिलाफ चल रहे मुकदमे के निपटारे पर सहमति दी है।
भारतीय शेयर बाजार में सप्ताह के आखिर कारोबारी दिन शुक्रवार की शुरुआत पॉजिटिव रही। प्रमुख बेंचमॉर्क इंडेक्स बीएसई सेंसेक्स और एनएसई निफ्टी 50 हरे निशान पर ट्रेड करते हुए ओपन हुए। इससे पहले मार्केट में गुरुवार के कारोबारी दिन जोरदार तेजी देखने को मिली थी।
हफ्ते के चौथे कारोबारी दिन आज घरेलू शेयर बाजार में राहत की किरण नजर आ रही है। बीते कुछ दिनों से बिकवाली का दबाव झेल रहे बाजार के प्रमुख सूचकांक हरे निशान पर कारोबर करते दिख रहे हैं। हालांकि, शुरुआती कारोबार में बढ़त के बाद बेंचमार्क सूचकांकों पर बिकवाली का जोर दिखा।
देश में आज से दूध महंगा हो गया है। देर शाम दिग्गज कंपनियों अमूल और मदर डेयरी ने एक के बाद एक अपनी पैकेज्ड मिल्क की कीमतों में बढ़ोतरी का ऐलान किया था और गुरुवार को महंगाई का झटका देश की जनता को लगा है।
अमेरिका और ईरान के बीच चल रही बातचीत को लेकर छाई अनिश्चितता और पश्चिम एशिया में लगातार बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का सीधा असर भारतीय शेयर बाजार पर पड़ा है। विदेशी निवेशकों की ओर से बिकवाली के दबाव के कारण इक्विटी बाजारों में लगातार चौथे कारोबारी सत्र में भारी दबाव दिखा।
बीते रविवार को पहली बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के लोगों से एक साल तक सोना न खरीदने की अपील की थी और 24 घंटे के भीतर ही अपनी इस अपील को दोहराया भी था। अब सरकार ने गोल्ड को लेकर एक बड़ा फैसला ले लिया है।