मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने 19 सप्ताह की गर्भवती दुष्कर्म पीड़िता को गर्भपात की अनुमति दी। कोर्ट ने कहा कि महिला की मर्जी के बिना उसे गर्भ जारी रखने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता।
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने नाबालिग दुष्कर्म पीड़िता के मामले में अहम टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि गर्भपात का निर्णय केवल गर्भवती महिला का अधिकार है और इस मामले में पीड़िता की प्रजनन स्वतंत्रता का सम्मान करते हुए, कोर्ट ने गर्भपात की बाध्यता से इनकार किया। निजता और गरिमा के हक (अनुच्छेद 21) पर आधारित महत्वपूर्ण फैसला।














